2 सच्ची डरावनी कहानियां

कहानी-1 मेरा नाम मरियम है। मैं मुस्‍लिम हूं और अहमदाबाद की रहने वाली हूं। और जो मैं बताने जा रही हूं वो 1999 की बात है। उन दिनों मेरा मामा बहुत छोटें थे उनकों कबूतर पालने का बहुत शोक हुआ करता था। उनके पास बहुत सारे कबूतर थे और वे अपने कबूतरों की अपने घर के बाहर ही रखा करते थे। कुछ दिनों बाद उन्‍होंने नोटिस किया की उनके कबूतर धीरे-धीरे कम होने लगे है इसलिए मामा सारा-सारा दिन कबूतरों के पास ही रहते। और उनकी रखवाली करते। लेकिन, कबूतर दिन में गायब नहीं होते थें, रात में गायब हुआ करते थें। और एक रात करीब 3 बजे मेरी खाला बाथरूम जाने के लिए उठी, बाथरूम भी बाहर हुआ करता था। खाला बाहर गई तो उन्‍होंने देखा एक लाल रंग की साड़ी में एक औरत हमारे कबूतरों के पास बैठी है। और वो मेरे मामा के कबूतर खा रही है। वो सब देख के तो मेरी खाला को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। वो उस औरत पर चिल्‍लाई कि तू क्‍या रही है? चली जा यहां से। तू ही इतनो दिनों से हमारे कबूतर गायब कर रही है। ये सुनके उस औरत ने अपना लंबा घूघंट हटाया। उसके बाल बिल्‍कुल बिखरे हुए थे और और उसकी आंखे बिल्‍कुल काली थी। और उसका चेहरा भी बिल्‍कुल काला था। जैसे जला हुआ हो। मेरी खाला समझ गई की ये कोई औरत नहीं बल्‍कि कोई चूड़ैल है। उन्‍होंने आयत पढ़ना चालू कर दिया। तो वो चूड़ैल उनके पास नहीं आ सकी। और चलकर दूर जाने लगी। आगे जाते हुए उसने फिर से मेरी खाला की तरफ मुड़कर देखा उसी वक्‍त वहां से गायब हो गई। उसके बाद मेरी खाला कई दिनों तक बीमार रही। और तब से मेरे मामा ने भी कभी कबूतर नहीं पाले। मेरी खाला आज भी जब ये बात याद करती है तो बहुत ड़र जाती है। उसके बाद उन्‍हें वो औरत कभी दिखाई नहीं दी। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories

कहानी-2 ये जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूं ये एक बिल्‍कुल सच्‍ची कहानी है। जब पहली बार मुझे यकीन हुआ था की इन दुनिया में भूत-प्रेत वाकई में होते है।
दो साल पहले की बात है। कॉलेज के दिन थे। हम बी-टेक के स्‍टूड़ेस का एक ग्रुप हुआ करता था। उस वक्‍त मेरी उम्र 23 साल थी। मैं हिमाचल प्रदेश के बिलापुर डिसट्रीक में दोस्‍त की शादी में गया था। मेरा घर भी बिलासपुर में ही है। जहां शादी थी, वहां से मेरा घर करीब 5 किलोमीटर दूर था। मेरे फ्रैंन्‍डेस ने मुझे वहीं रूक जाने के लिए काफी फोर्स भी किया लेकिन, उस रात मेंरे घर पर कोई नहीं था। इसलिए मुझे घर जाना ही था। मैरिज सेलिब्रेट करते-करते मुझे घर वापस जाने के लिए रात के 11 बज गए थे। वैसे तो रात में गावं के इलाके से अकेले जाने में मैं कभी नहीं ड़रता था। लेकिन, उस दिन पता नहीं क्‍यों मेरा दिल घबरा रहा था। जैसे की मेरा दिल जाने से रोक रहा हो। लेकिन, फिर भी मैं निकल ही गया। मैं जैसा ही निकलने वाला था। मेरे एक दोस्‍त ने कहा- यार मैं भी तेरे साथ तेरे ही घर चलता हूं। उसकी बात सुनके मुझे तो बहुत सुकुन मिला। हम दोनों घर की तरफ निकल गए। और करीब एक किलोमीटर चलने के बाद मैंनें अपने दोस्‍त से कहा-कि यार 5 मिनट रूकों मैं थोड़ा थक गया हूं। वो भी पैदल चलते-चलते थक चुका था। और हम दोनों थोड़ी देर वहीं रूक गए। हम दोनों वहां खड़े ही थे कि अचानक मुझे कुछ दूर से एक लड़की के रोने की आवाज सुनाई दी। वो आवाज सुनते ही मैं तो बहुत घबरा गया लेकिन, मेरे दोस्‍त ने कहा शायद कोई मुसीबत में है, हमें हेल्‍प करनी चाहिए। और हम धीरे-धीरे उस ओर बढ़े जहां से आवाज आ रही थी। हम कुछ ही दूर आगे पहुंचे थे कि हमने देखा कि एक लड़की समाने बैठी हुई है।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories उसने बिल्‍कुल लाल रंग की ड्रैस पहनी हुई थी। उसके पास पहुंच के हमने उससे पूछा कि तुम इस वक्‍त यहां क्‍या कर रही हो। तो उस लड़की ने कहा मैं बाहर से आई हूं और अनजान हूं और मुझे अपने चाचा जी के घर जाना है। क्‍या आप जानते हो उन्‍हें? तुम्‍हारा नाम क्‍या है? हमने पूछा। लेकिन, उसने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आवाज में एक अजीब-सी गुर्राहट थी। मुझे तो उससे बात करते हुए भी ड़र-सा लग रहा था। लेकिन, उसकी हालात को देखते हुए हमने उससे पूछा कि कौन है आपके चाचा, उनका नाम क्‍या है। तो उसने जिसका नाम लिया उनका घर मेरे घर से 1 किलोंमीटर पीछे था और मैं उनको अच्‍छी तरह से जानता भी था। मेरा दोस्‍त अपना फोन वहीं शादी में अपनी बहन को दे आया था और मेरे फोने में भी बैट्री नहीं थी। बस एक टार्च लाईटर था। तो मैंने उससे कहा तुम हमारे साथ चलों, हम तुम्‍हे वहां छोड़ देंगे। और वों भी हमारे साथ-साथ चल पड़ी। उसी बीच मेंरे दोस्‍त ने उसका दोबारा उसका नाम पूछा। उसने गुस्‍से में अपना नाम बताया ‘रेखा’। फिर हम 10 मिनट तक चुप-चाप चलते रहे। किसी ने कुछ नहीं बोला। लेकिन, फिर मेरे दोस्‍त ने कहा-एक मिनट रूकों। मुझे अपने शू के लैस बाधंने है। तो मैं पीछे रूका और रेखा थोड़ा आगे जाकर रूक गई। क्‍योंकि मुझे बातें करने की आदत थी तो मैं भी उसके पास चला गया। और उससे बातें करने लगा। मुझें अब बिल्‍कुल भी ड़र नहीं लग रहा था। लेकिन, फिर जैसे ही मेरा दोस्‍त हमारे करीब आया। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
मैंने देखा कि उसका चेहरा बहुत ज्‍यादा ड़रा हुआ था। उस रात पूरा चांद निकला था। और चांद की रोशनी में मैं उसके चेहरे से ड़र के मारे निकलता पसीना साफ-साफ देख पा रहा था। लेकिन, मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो इतना ड़रा क्‍यों हुआ है? चलते हुए वो बार-बार मुझे जमीन की तरफ देखेनें का इशारा कर रहा था। लेकिन, मैं उसको इग्‍नोर करता रहा। और हम लगभग उस जगह पहुंचने ही वाले थें जो जगह उस लड़की ने बताई थी। कि तभी मेरी नजर उसके पैरों पर पड़ी। उसके पैर उल्‍टे थे इतना सफर साथ चलने के बाद भी मैंने उसके पैरों की तरफ ध्‍यान ही नहीं दिया था। वो देखते ही तो जैसे मेरे मुंह से आवाज ही निकलना बंद हो गई थी। मैंने अपने दोस्‍त की तरफ देखा तो वो भी बहुत ज्‍यादा ड़रा हुआ था। ऐसा खौफनाक मंजर मैंने पहले कभी नहीं देखा था। मैंने अपने दोस्‍त का हाथ पकड़ा और कान में धीरे से कहा कि मेरे 3 गिनने पर जितना तेज हो सकें यहां से भागना। मैंने इतना कहा ही था कि उस लड़की ने मेरा हाथ पकड़ लिया। और बोली क्‍या ये सहीं रास्‍ता है। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
मैंने हां में सर हिलाते हुए जैसे ही अपना हाथ छुड़ाया, मैंने जोर से अपने दोस्‍त को आवाज लगाई भाग! मेरे मन में तो ऐसा चल रहा था कि आज हमारी आखरी रात है। और किसी भी टाईम ये हमें खा जाएगी। और हम भागे बहुत तेज। और जो घर उसने बताया था। हम वहां पहुंचने ही वाले थे कि हमें एक मंदिर दिखाई दिया। मेरे दोस्‍त ने कहा कि आज अगर जिंदा रहना है तो हम उस मंदिर में चलते हैं। भागते-भागते मेरी सास फूल चुकी थी। मैं अपनी मम्‍मी को याद करते हुए रो रहा था। और जैसे-तैसे करके हम मंदिर तक पहुंचे। बाहर से कहराने की आवाज आ रही थी। जैसे की कोई हमें बुला रहा हो। हम बुरी तरह से ड़रे हुए चिल्‍लाने लगें। हमारी चीखें सुनकर उसने जो घर बताया था वहां से एक बूढ़ा आदमी निकला और हमारी तरफ आने लगा। उस वक्‍त मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मैं अपने दिल की धड़कन साफ-साफ सुन सकता था। वो जैसे ही मंदिर में आए उन्‍होंने हमारी हालत देखकर हमसे पूछा कि क्‍या हुआ है। ऐसे रात में शोर क्‍यों मचा रहे हो। तभी ऐसी आवाज आई जैसे बहुत सारे पत्‍थर पानी में गिर रहे हों। 5 मिनट तक वो आवाज आती रही। और धीरें-धीरें कम होकर बहुत जोर से धड़ाम की आवाज आई। और अचानक से सबकुछ शांत हो गया। कुछ देर बाद हमने अपना होश संभाला। और उस बूढ़े आदमी को सबकुछ बताया। हमारी बात सुनके वो आदमी रोने लगा। बोला की वो मेरी ही भतीजी है। और 2 महीनें पहले जहां हमें वो मिली थी, ठीक उसी जगह लैंड़ स्‍लाईड़ में मौत हो गई थी और एक टूटे हुए घर में उसकी बॉड़ी मिली थी। जब उसकी मौत हुई तब वह अपने चाचा के घर ही आ रही थी। हम पूर रात मंदिर से नहीं निकलें। उन्‍होंने वहीं हमे एक कम्‍बल दिया और बहुत मुश्‍किल से आखिर में हम सो गए। सुबह जैसे ही हमारी आंख खुली तो मैंने टाईम देखने के लिए अपना हाथ देखा तो जहां से उस लड़की ने मेरा हाथ पकड़ा था। वो एक दम काला हो चुका था। वो रात मेंरी जिंदगी की सबसे ड़रावनी रात थी। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories

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