वो डरावनी रात

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मेरा नाम नीता है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ. बचपन से ही मैने कई बार भूत प्रेतों को देखा है और इनसे सामना हुआ है. मुझे बचपन से ही ऐसा लगता था की मैं भूतो को देख और महसूस कर सकती हूँ. बचपन में कोई मेरी बातो पर यकीन नहीं करता था इसलिए ज्यादातर बातें मैं किसी को बताती ही नहीं थी और अपने तक ही रखती थी.
आज जो घटना आपको बताने जा रही हूँ ये तब की बात है जब मैं कोलकाता में पढाई कर रही थी अपने कॉलेज में. मैं एक फ्लैट में किराये पर रहती थी, जिसमे मेरे साथ 5 और लड़किया भी थी. जिस फ्लैट में हम रहते थे वो एक 2 मंजिला मकान था जिसमे सिर्फ दो ही घर थे. नीचे वाला हमारा था और ऊपर वाले में 2 बूढी औरतें रहती थी. उनसे हमारी कभी बात नहीं होती थी. वो दिखने में ही अजीब लगती थीं. हमारा फ्लैट बहुत बड़ा था और उसमे तीन कमरे थे. मैं अकेली एक कमरे में रहती थी, साथ वाले दूसरे कमरे में 4 लड़किया रहती थी और तीसरे कमरे मैं एक और लड़की अकेली रहती थी. तीनो कमरों के बीच में Dining area था और उसके ठीक सामने किचन था. Dining area मुझे हमेशा से ही अजीब सा लगता था क्योकि उसके चारो तऱफ की दीवारें काली थी, मानो की वो आग में झुलसी हो.

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साथ वाले कमरे की तीनो लड़कियाँ कॉल सेण्टर में काम करती थी, इसलिए वो रोज रात में 2 बजे तक ही वापिस आती थी. उनमे से एक लड़की का नाम श्वेता था. उस रात श्वेता, मैं और तीसरे कमरे वाली लड़की देर रात तक जाग रहे थे और बाते कर रहे थे. बातो बातो में पता ही नहीं चला की कब रत के 2 बज गए. इसी बीच बाकी तीनो लड़कियाँ ( नेहा, फातिमा और मनदीप) भी office से वापिस आ गयी और उन्होंने घंटी बजायी. हमारा
main गेट काफी बड़ा था और उसको खोलने के लिए हमें अपने flat से नीचे उतर के जाना पड़ता था. श्वेता और वो तीसरे कमरे वाली लड़की गेट खोलने नीचे गयी. मैं फ्लैट में अकेली ही थी तब. अचानक वो तीनो भागती हुई वापिस आयी. मैने हैरानी से उनसे पूछा – ” क्या हो गया ?” उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोला – ” निकी तुमने इतनी जोर से क्यों चीखा ?, और हमने अजीब से आवाज़ भी सुनी, जोर से. ”
मैं हैरान थी. मैने चीखा ही नहीं था, और इतनी रात के सन्नाटे में मुझे कोई चीखने की आवाज़ भी नहीं सुनाई दी थी. ये घटना हम सभी को बहुत अजीब लगी, लेकिन फिर कुछ दिन में हम इसको भूल गए.
कई दिन गुजर गए, हम उस बात को भूल ही गए थे. ना हे हमें वो आवाज़ फिर से सुनाई दी, लेकिन जब भी हम में से कोई भी फ्लैट पर अकेला होता था, हमें हमेशा ऐसा महसूस होता था की हमारे साथ कोई है, कोई हमें देख रहा है. एक डरावना सा अहसास होता था.
वो दिन मेरा उस फ्लैट में आखरी दिन था, क्योकि कॉलेज ख़तम हो चूका था. बाकी की साड़ी लड़किया पहले ही दूसरी जगहों पर shift कर चुकी थी. मुझे भी अगले दिन जाना ही था, और उस फ्लैट में मुझे बस एक रात और बितानी थी. अकेले.
सारा सामान मैं पहले ही पैक कर चुकी थी. सिर्फ एक गद्दा था जिसको मैने सोने के लिए रखा था, और कुछ कपड़े निकाल के रखे थे जो की मुझे अगले दिन पहनने थे.
रात के करीब 12.30 बजे थे. मैने गद्दे पर लेटी हुई थी जो की फर्श पर ही बिछा हुआ था, मैं फ़ोन पर बात कर रही थी. कमरे का दरवाज़ा बंद था. अचानक मैंने देखा की कमरे का दरवाज़ा अपने आप खुल गया. वो कोई हल्का दरवाज़ा नहीं था, बल्कि बहुत भरी दरवाज़ा था जो की हवा से नहीं खुल सकता था. दरवाज़ा खुलते देख मैं बहुत सेहम गयी थी, क्युकी उसके साथ ही मुझे ऐसा महसूस हुआ की कमरे में घुस गया है. मैं बहुत अच्छे से मेहसूस कर पा रही थी की मेरे साथ कमरे में कोई और भी है. मेरा रोंग रोंग खड़ा हो गया, और दिल में अजीब सी दहशत भर गयी. मैं डर के मारे हिल भी नहीं पा रही थी. हिम्मत करके मैने अपना फ़ोन नीचे रखा. मैं गद्दे पर ही लेटी हुई थी. बिलकुल सन्नाटा था. मै किसी के सांस लेने की आवाज़ अच्छे से सुन सकती थी. मैं फर्श पर किसी के चलने की आवाज़ भी सुन रही थी. आवाज़ बहुत साफ़ आ रही थी और मुझे पता था की मैं कोई सपना नहीं देख रही हूँ. मैं अपने पूरे होश में थी. मैने उठने की कोशिश की लेकिन डर के मारे हिल भी नहीं पा रही थी. पूरी हिम्मत करके मैने अपना फ़ोन उठाया और अपनी मम्मी को फ़ोन किया. मैं रो रही थी और रोते रोते मैंने अपनी मम्मी को सबकुछ बताया, उस समय हर एक सेकंड जो हो रहा था मैं अपनी मम्मी को बताती जा रही थी. मेरी मम्मी ने पहचान लिया के ये जरूर कोई शैतान आत्मा है और मुझसे हिम्मत न हारने को बोला और मेरा हौसला बढ़ाया. मेरी माँ ने मुझको बोला की भगवन मेरे साथ है और मुझे डरने की कोई जरुरत नहीं है. मैं साई बाबा की तस्वीर हमेशा अपने पर्स में रखती थी. मैने किसी तरह अपने पर्स से जल्दी से साई बाबा की तस्वीर को बाहर निकाला. बाबा की तस्वीर देखते ही मुझे ताकत मिली. मैं जोर जोर से अपने भगवान का नाम लेने लगी और धीरे धीरे मुझे वो साया वहां से गायब होता महसूस हुआ. मैं महसूस कर सकती थी की मैं कमरे में फिर से अकेली हूँ और वो साया जा चूका था. मैं पूरी रात जगी रही और एक second के लिए भी नहीं सोई. मैं सारी रात भगवान का नाम लेती रही और सुबह होने की दुवायें करती रही.
किसी तरह रात गुजरी और सुबह हो गयी. सुबह सामान उठाने वाले लोग आये तो उन्होंने बताया की ये तो भुतहा घर है, और वहां आसपास के सब लोगो को इस घर के बारे में पता है, और उस घर में कोई रहने के लिए नहीं आता है. और कई साल पहले यहाँ एक आग लगी थी जिसमे एक आदमी की मौत हो गयी थी.

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