भोपाल का शमशान घाट

haunted places in india

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मेरा नाम आदि चौहान है और मैं भोपाल के गोंविदपुरा में रहता हूं। वैसे तो हमारा भोपाल बहुत ही सुंदर है और इसे झीलों की नगरी भी कहा जाता है। पर यहां बहुत सारी भूतियां और ड़रवानी जगह भी है। ये बात पिछली महीनें की ही है। अभी गर्मियों का सीजन चल रहा है और गर्मियों के साथ ये शादियों का भी सीजन है। पिछले हफ्तें मैं और मेरा एक दोस्‍त अमन, हम हमारे एक स्‍कूल फ्रैंड़ की सिस्‍टर की शादी में गए थें। हम दोनों ने और बाकी के स्‍कूल फ्रैंड़स ने पहले तो बीयर पी और फिर सब एक साथ शादी हॉल में चले गए। वहां पहुंच कर हमने खूब मस्‍ती की और खाना खायां। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories फिर हमें नींद आने लगी हम सब नशें में तो थे ही फिर हम वहां से निकल गए घर जाने के लिए। हमारे बाकी दोस्‍त भी अपने-अपने घर निकल गए। मैं और मेरा दोस्‍त अमन अकेले ही वापस घर आ रहे थें मेरी बाईक पर। रात के करीब दो बज रहे थें। सड़कों पर सन्‍नाटा पसरा हुआ था। सड़कों पर लगी स्‍ट्रीट लाईट की टिमटिमती रोशनी माहौल को ड़रावना तो बना रही थी। पर उतना ही खूबसूरत भी बना रही थी। मैं बाईक चला रहा था। और अमन मेरे पीछे मेरी पीठ पर सिर टिका कर सो रहा था। हम रास्‍ते में ही थे तभी अमन बोला बाईक स्‍लों कर। मैंने बोला ‘क्‍यों मोटे’ मैं अपने दोस्‍त को मोटा ही बोला करता हूं। तो उसने बोला देख- सामने बीच चौराहे पर कुछ जल रहा है। मैंने जब उसके पास से बाईक निकाली तो देखा की सड़क पर किसी ने टोटका कर रखा था। एक बड़ा-सा फल था, एक अंडा था और पता नहीं क्‍या-क्‍या रखा हुआ था। और उस फल के ऊपर जलता हुआ दिया रखा था। मैंने मजाक में बोला-‘अरे पागल! इतनी-सी चीज से ड़र गया, ये सुन कर हम दोनों जोर-जोर से हसने लगे और बाईक को लहराते हुए मस्‍ती करते हुए जाने लगे। हम बस घर पहुंचने ही वाले थें। हम दोनों के घर आमने-सामने है।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories और हमारे घर के करीब 5 मिनट की दूरी पर एक शमशान घाट है, जो की मैंन रोड़ से चिपका हुआ है। लोग कहते है कि ये शमशान घाट बहुत पुराना है और अमिताभ बच्‍चन की मदर-इन-लॉ को भी यही अग्‍नि दी गई थी। हम बस घर पहुंचने ही वाले थे और मुझे यह कहना अच्‍छा तो नहीं लग रहा लेकिन, रात में उस शमशान के सामने से निकलने पर मुझे बहुत ड़र लगता है। क्‍योंकि रात-रात भर मैं आपकी ड़रवानी कहानियां जो सुनता हूं। मुझे भूतों की थोड़ी बहुत नॉलेज भी है। और मैं ड़रपोक भी हूं। खैर जब हम जब शमशान घाट के सामने से निकल ही रहे थें तभी अमन ने भारी आवाज में बोला गाड़ी रोक। शमशान के सामने से निकलने पर मुझे पहले ही बहुत ड़र लग रहा था। मैंने बाईक नहीं रोकी। लेकिन, पता नहीं अमन को क्‍या हो गया था। उसने पीछे बैठे-बैठे ही खुद ही बाईक की ड़िक्‍स ब्रैक दबा दी। हम गिरते-गिरते बचें थे। मैंने मुश्‍किल से बाईक संभाली। अमन की इस हरकत से मुझे बहुत तेज गुस्‍सा आया और मैंने उसको एक थप्‍पड़ मारा और बोला पागल हो गया है क्‍या। उसने बोला मुझे टाएलेट जाना है। मैंने कहा नहीं, यहां रहने दें। घर पर ही कर लेना, पर वे नहीं माना और शमशान घाट के सामने ही खड़े होकर टॉएलेट करने लगा। मैं वहीं खड़ा लगातार उस शमशान घाट के अंदर ही देखें जा रहा था। उसके फिनिश होते ही मैंने झट से बाईक की और एक मिनट में ही हम घर पहुंच गए। मैंने उसे बाऐ गुड़ नाईट बोला और मैं अपने घर चला गया।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories वो भी घर जा रहा था। मैं इतना थका हुआ था कि मैं बिना कपड़े चेंज किए ही बैड़ पर लेटा और सो गया। मैं बस सोया ही था कि बस 10 मिनट बाद ही बाहर से चिल्‍लाने की आवाज सुनाई दी। मैंने ध्‍यान नहीं दिया और वापस सो गया। और तभी मेरा छोटा भाई मेरे पास आया और मुझे जगाया। बोला की अमन की मम्‍मी चीख रही है और मुझे बुला रही है। मैं जल्‍दी से बाहर अमन की मम्‍मी के पास गया तो उन्‍होंने बताया की अमन घर नहीं आया है। ये सुनते ही मानो मेरे तो पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई। तभी मेरे जस्‍ट सामने रहने वाल बाबू चाचा ने कहा- तुम लोग कहीं रूकें तो नहीं थे। वो पूजा-पाठ करने वाले और धार्मिक किस्‍म के इंसान है। मैंने उन्‍हें ड़रते-ड़रते बताया की वापिस आते हुए अमन ने उसी शमशान घाट के सामने ही टॉयलेट किया था। ये सुनकर वे मुझ पर बहुत गुस्‍सा हो गए। और भगवान की फोटों वाला एक स्‍कार्फ लेके शमशान की तरफ भागने लगें। मैं और हमारे कुछ पडोसी भी उनके पीछे-पीछे भागने लगे। जब हम शमशान के सामने पहुंचे तो वे देख के मेरा तो मानो पूरा शरीर ही जम गया। हमने देखा कि अमन उसी शमशान घाट के गेट के ठीक सामने खड़ा था। उसके हाथ में एक नींबू था, जिसकों वो चाट रहा था। और ऐसा करते हुए वो किसी जानवर की तरह गुर्रार रहा था। ये सब देख के अमन की मम्‍मी रोने लगी। हम सब भी बहुत ड़र गए थे। किसी में इतनी हिम्‍मत नहीं थी की कोई उसके पास जा सके। तभी बाबू चाचा उसके पास गए। और उससे पूछा यहां क्‍या कर रहा है। तो अमने किसी जानवर की तरह गुर्राते हुए बोला- अब ये मेरा शरीर है तू चला जा यहां से। ये सुनके मैं तो ड़र के मारे बुरी तरह से कापने लगा। तभी बाबू चाचा जोर-जोर से हनुमान चालीसा पढ़ने लगे और वो स्‍कॉर्फ अमने के कंधे पर उढ़ा दिया। ऐसा करते ही अमन जोर-जोर से गुर्राने लगा और चिल्‍ला भी रहा था। बाबू चाचा जोर-जोर से हनुमान चालीसा पढ़ते रहे और तभी बेहोश हो गया। फिर वो उसे गोद में उठा कर घर लाए और उस पर फूंक मारके उसको सुला दिया। उस रात हम सारे पड़ौसी पूरी रात मेरे घर के बाहर बने चबूतरे पर ही बैठे रहे और बातें करते रहे। बाबू चाचा ने बताया की अमन ने किसी लाश के ऊ पर फेंके हुए गुलाब के फूलों के ऊपर टॉयलेट कर दिया था। जिससे उस मरे हुए इंसान की आत्‍मा अमन के शरीर पर हावी हो गई थी। इसलिए दोस्‍तों कभी भी शमशान घाट या कब्रिस्‍तान के सामने टॉयलेट मत करना। वरना शायद आपका भी वहीं हाल होगा जो अमन का हुआ था। hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
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