भयानक जंगलो की खतरनाक कहानिया – Search and Rescue Horror Stories

Search and Rescue Horror Stories in Hindi – Part 3

एक बार एक ट्रेनिंग के दौरान हम एक फायर फाइटर के साथ काम कर रहे थे कि ट्रेनिंग के बीच में ही हमें एक बच्चे को बचाने की कॉल आती है.
वो बच्चा एक बहुत ही बड़े और ऊंचे पेड़ के ऊपर था और उसको वहां से उतारना था. उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं बताया, बस इतना ही कहा कि यहां आ जाओ क्योंकि हमारे पास उसको नीचे उतारने के साजो सामान नहीं है.
और वो फायर फाइटर इस काम में एक्सपर्ट था इसीलिए वो और हम सब उस जगह पहुंचे जहां वो बच्चा था. वहां जाकर हमने देखा कि वो तो बहुत ही बड़ा पेड़ था. उस जंगल का सबसे बड़ा पेड़ होगा वो. वो फायर फाइटर इतने ऊंचे पेड़ को देखकर पहले तो हंसा की इस पर कोई बच्चा कैसे चढ़ सकता है और जरूर उन्होंने बच्चे के बजाय किसी बिल्ली को ऊपर देख लिया होगा.
लेकिन हमारा सुपरवाइजर मजाक के मूड में नहीं था उसने उसको ऊपर जाकर बच्चे को नीचे उतारने के लिए बोला.
उसने बताया कि जब वो पर जा रहा था तो एक बार तो उसको लगा कि हम उसके साथ कोई prank कर रहे हैं. क्योंकि वो पेड़ कितना बड़ा था कि उस पर किसी बच्चे का जाना इंपॉसिबल था. ऊपर जाते हुए बीच बीच में मुड़ मुड़कर हमारी तरफ देख रहा था.
उसने बताया कि वो पेड़ नीचे से तो बहुत मोटा था लेकिन ऊपर की तरफ बहुत ही पतला होता जा रहा था. इतना पतला एक बार तो उसको लगा की शायद वो उसका वेट भी नहीं संभाल पाएगा.
फिर वो जैसे ही पेड़ के बिल्कुल ऊपर पहुंचने वाला होता है उसको ऊपर कुछ नीला नीला दिखाई देता है. वो बच्चे की शर्ट थी जो की टहनियों में फंसी हुई थी. उसने बच्चे को आवाज लगाई और उसको थोड़ा पास आने के लिए बोला.
बच्चे ने कोई जवाब नहीं दिया.
उसने बताया कि जब तक मैं बच्चे के करीब पहुंचा मुझे पता चल गया था ये बच्चा कोई जवाब नहीं देगा क्योंकि वो जिंदा ही नहीं था.
पास पहुंचकर उसने देखा कि बच्चा एक टहनी से लटका हुआ है, ऐसे मानव की किसी ने ऊपर से गिराया हो. उस ने बच्चे को घुमा के उसका चेहरा देखा तो उसके होश उड़ गए. बच्चे के पेट की अंतड़ियों उसके मुंह से बाहर लटक रही थी, यहां तक की आस पास की टहनियों में भी लटक रही थी. उसने और ध्यान से देखा तो पाया कि उसकी अंतड़ियां उसके पीछे butthole से भी बाहर निकल रही थी. उसकी आंखे बाहर लटकी हुई थी. जैसे कि किसी बहुत ही भारी चीज से उसको दबा दिया गया हो. और उसकी अंतड़ियां और आंखें बाहर निकल आई हो.
कभी पानी में तैरती लाश देखी है. जैसे उसकी जीभ फुल कर बाहर आ जाती है ना बिल्कुल ऐसे ही उसकी जीभ भी बाहर निकली हुई थी और उस पर मक्खियां भिनभिना रहीं थी.
उसने बताया–” फिर मैंने एक लम्बी टहनी से उसकी लाश को हिलाकर पेड़ से नीचे गिरा दिया. मुझे पता है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था और इसी इस वजह से मेरी नौकरी भी जाते जाते बची थी. लेकिन उसकी इतनी डरावनी लाश को मैं अपने कंधो पर उठा के नीचे नहीं उतरना चाहता था. ऐसा नहीं है कि मैंने पहली बार किसी बच्चे की लाश देखी थी मैंने और भी बहुत डरावनी लाशें देखी थी. एक लाश तो एक बच्चे की थी जो कि एक आग से बचने के लिए बाथटब में जाकर छुप जाता है और आग में झुलस के उस का सूप बन जाता है. लेकिन ये तो कुछ और ही था. उसको हाथ लगाने में भी मुझे डर लग रहा था. मैंने लाश नीचे गिरने की आवाज सुनी और मुझे पता था एक बार के लिए उसकी लाश को देखकर सब अपना होश खो बैठेंगे.
लेकिन उन सबको पहले से ही पता था कि बच्चा मर चुका है लेकिन उन्होंने मुझे बताया नहीं था. इसलिए कोई चिल्लाया भी नहीं. मैं नीचे उतरा. उतरते ही मैंने अपने सुपरवाइजर से गुस्से में पूछा कि जब उनको पता था कि बच्चा मर चुका है तो उन्होंने मुझे वहां क्यों भेजा. सुपरवाइजर ने बोला क्योंकि ये तुम्हारा काम है और सबूत को नीचे लाने के लिए शुक्रिया.
” सुबूत …???”
मैंने मन ही मन सोचा की मेरे सुपरवाइजर ने कितनी आसानी से बोल दिया –“सुबूत”
जैसे कि वो बच्चा कोई इंसान ही नहीं था. जैसे कि उस मासूम का कोई था ही नहीं जिसके साथ वो कभी खेला करता था. और उनसे जुदा हो गया और इतनी दर्दनाक मौत मरा था.
एक बार के लिए तो मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन मैं कुछ नहीं बोला.
फिर सुपरवाइजर ने एक साथी को मेरे साथ भेजा मुझे बाहर छोड़ने जाने के लिए. बाहर जाते हुए मैंने उससे पूछा कि जब मैंने ही उसकी लाश को नीचे उतारा था तो मुझे ही उसकी लाश को बाहर क्यों नहीं लाने दिया. उसने बताया कि क्योंकि ये एक ओपन केस है इसीलिए इस पर ज्यादा बात नहीं करी जा सकती.
मैंने उससे पूछा कि तुम्हें क्या लगता है बच्चा कैसे मरा होगा. कुछ देर के लिए उसने सोचा, फिर बोला कि ऐसा लग रहा था कि बच्चे को हजारों किलो वेट के नीचे दबा दिया गया हो. लेकिन ऐसा हो ही नहीं सकता था. क्योंकि बच्चे के ऊपरी शरीर पर किसी भी चोट का कोई निशान नहीं था. ऐसा लग रहा था कि मानो किसी बहुत बड़े वैक्यूम में बच्चे को डाल दिया गया हो और उसके अंदर की सारी चीजें अपने आप बाहर खिंच आई हो. लेकिन फिर भी कोई चोट का निशान क्यों नहीं था. इस बात ने मुझे बहुत परेशान कर दिया था. बहुत ज्यादा परेशान.
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एक बार एक पुराने साथी के साथ गप्पे मार रहा था. बातों बातों में मैंने उससे सीढ़ियों के बारे में पूछ लिया. मेरे पूछते ही उसके चेहरे पर चमक आ गई. मानो वो मेरे पूछने का ही इंतजार कर रहा था. उसने बोला कि उसको लगता है कि हमें इनके बारे में ज्यादा बात करनी चाहिए, जिससे की आम पब्लिक को भी इनके बारे में पता लग सके. क्योंकि हमारे ऑफिसर ऐसी खबरों को बिल्कुल ही दबा देते हैं.
मैंने पूछा तुम किस बारे में बात कर रहे हो ? उसने बोला किस बारे में ..???
तुम्हें नहीं पता किस बारे में …???
सीढ़ियों के बारे में, खोए हुए बच्चों के बारे में जो अपनी जगह से सैकड़ों किलोमीटर दूर मिलते हैं. उनके बारे में मीडिया को भी जानकारी होनी चाहिए. ऐसा नहीं है की हमें रोज ही ऐसी चीजें मिलती हैं, लेकिन फिर भी हमारा जितना इनसे सामना होता है वो काफी है ये शक पैदा करने के लिए की इन जंगलो में कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ है जिसकी अच्छे से इन्वेस्टीगेशन होनी चाहिए . खासकर सीढ़ियों के बारे में.
वो मुझसे पूछता है सीढिया तो तुमने भी बहुत देखी होंगी, लेकिन क्या तुमने कभी उल्टी सीढ़ियां देखी ..???
मैंने कहा-” उल्टी ..?? नहीं तो, कभी नहीं..”
क्या यार तुम्हें कितने साल हो गए सर्विस में और तुमने कभी उल्टी सीढ़ियां नहीं देखी.
सच में मैंने कभी नहीं देखी ना मुझे कभी किसी ने बताया उल्टी सीढ़ियों के बारे में.
तुम्हारे मुंह से पहली बार सुन रहा हूं इनके बारे में. मुझे और बताओ इनके बारे में, कैसी उल्टी सीढ़ियां.
अरे जैसी हमेशा मिलती हैं, नॉर्मल सीढ़ियां, जंगलों में, मुझे पता है तुम भी बहुत बार देख चुके होंगे. बस वो सीढ़ियां उल्टी होती हैं मानो किसी ने उठाकर उल्टा करके रख दिया हो. लेकिन ऐसी उल्टी सीढ़ियां बहुत ही कम मिलती हैं. नॉर्मल वालियों से ज्यादा तो मुझे इन से डर लगता है. पता नहीं क्यों. उसने कहा वैसे तो मैं बहुत मजबूत दिल का हूं और आसानी से नहीं डरता लेकिन जब भी वो उल्टी वाली सीढ़ियां देखता हूं तो कई दिनों तक दिल से डर नहीं जाता.
बस इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता उनके बारे में
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फिर मैं उससे बिना मुंह वाले आदमी के बारे में पूछता हूं, क्या उसके पास भी ऐसा कोई केस आया कभी. तो वो मुझे इसके बारे में बताता है.
उसने बताया-” एक बार हम ट्रेनिंग के दौरान एक कैंप में थे जंगल में.
रात में मैं अपने टेंट में था कि मुझे बाहर कुछ दूर किसी के चलने की आवाज सुनाई दी. वैसे तो हम सबको इंस्ट्रक्शन होती हैं कि किसी भी हालत में कैंप से दूर नहीं जाना है लेकिन फिर भी कई बार नए लड़के इधर-उधर निकल जाते हैं और रास्ता भूल जाते हैं. जैसा कुछ साल पहले हुआ था जब एक नया लड़का रास्ता भूल गया था और पहाड़ से नीचे गिर कर मर गया था. तो मुझे लगा कि शायद ये भी कोई हमारी ही टीम का नया लड़का है और टॉयलेट के लिए बाहर गया होगा और रास्ता नहीं ढूंढ पा रहा होगा वापस आने का.
तो मैं अपने टेंट से बाहर निकलकर कैंप से बाहर जाता हूं और आवाज़ मारता हूं कि कैंप यहाँ है और वो इस तरफ आ जाए, और जंगल में ज्यादा दूर ना जाए.
लेकिन वो आवाज जंगल के अंदर की तरफ ही चलती जाती है और मैं भी उसके पीछे पीछे ही चल दिया.
मुझे पता है कि वो मेरी बहुत बड़ी बेवकूफी थी लेकिन उस वक्त मैं आधी नींद में था और मैं नहीं चाहता था कि मेरी टीम का कोई नया लड़का जंगल में खो जाएं.
तो मैं उस चीज के पीछे करीब 1 किलोमीटर जंगल में चला जाता हूं फिर वो एक नदी किनारे पहुंचकर रुक जाता है मैं उसको ठीक से तो नहीं देख पा रहा था लेकिन उसकी परछाई मुझे नदी के पानी में अच्छे से दिख रही थी चांद की रोशनी में. परछाई से तो वो नॉर्मल ही लग रहा था. उसने कमर पर एक बैग बाँधा हुआ था और ऐसा लग रहा था कि वो मेरी तरफ देख रहा है.
मैं उसको चिल्ला कर पूछता हूं कि क्या वो ठीक है, क्या उसे किसी हेल्प की जरूरत है. वो सर हिलाता है जैसे उसको कुछ समझ ही ना आया हो.
मैं जंगल में हमेशा अपने पास एक चाकू रखता हूं जिसमें की एक टॉर्च लगी हुई है. तो मैं अपनी टॉर्च जलाकर उसकी छाती पर लाइट मारता हूं उसको देखने के लिए. मैं उसके चेहरे पर लाइट नहीं मारता है क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उसकी आंखों में लाइट लगे और वो मुझे देख ना पाए.
टॉर्च की रोशनी में मैंने देखा कि वो गहरी सांसे ले रहा था, धीरे-धीरे.
मैंने सोचा कहीं ये नींद में तो नहीं चल रहा है. तो मैं थोड़ा आगे बढ़ता हूं और फिर से आवाज लगाकर पूछता हूं कि क्या वो ठीक है. वो कोई जवाब नहीं देता.
फिर मैं उसके मुंह पर टॉर्च मारता हूं. कुछ ठीक से तो नहीं दिखता लेकिन मैं समझ जाता हूं कि कुछ गड़बड़ है और मैं वोीं रुक जाता हूं.
वो लंबी गहरी सांसे लिया जा रहा था कुछ ही सेकंड मे मैं समझ जाता हूं कि ये सांस लेने का सिर्फ नाटक कर रहा है. क्योंकि वो बहुत ज्यादा लंबी सांसे ले रहा था और उसके कंधे और छाती भी नॉर्मल नहीं लग रहे थे.
मैं उसको चिल्ला कर पूछता हूं-” कौन हो तुम?” तो वो एक अजीब सी दबी हुई आवाज निकालता है. मैं फिर से उसके मुंह पर लाइट मारता हूं तो मेरे होश उड़ जाते हैं. उसका तो कोई चेहरा ही नहीं था. मैं हड़बड़ा जाता हूं और देखता हूं कि वो मेरे पास आ गया है. लेकिन वो तो अपनी जगह से हिला भी नहीं. एक सेकंड पहले वो नदी किनारे था और अगले ही सेकंड वो मेरे से 5 फीट दूर खड़ा था. मैंने अपनी पालक तक नहीं झपकाई थी.
मैं हड़बड़ा कर गिर गया और मैंने देखा कि उसके गले पर एक लाइन सी बनी है, जो कि खुल रही है. और वो अपना गला खोल कर हंस रहा है. उसके गले में कोई खून नहीं था बस काला गहरा गड्ढा था. मैं सच कह रहा हूं वो मुझे देख कर अपना गला खोल कर हंस रहा था. जैसे हम मुंह खोल कर हंसते हैं ना. बस वो अपना गला खोल कर हंस रहा था.
मैं उठ कर अपने कैंप की तरफ तेजी से भागता हूं. मैंने उसके अपने पीछे आने की कोई आवाज नहीं सुनी लेकिन मुझे पता था कि वो मेरे पीछे ही है. मैं उसको महसूस कर सकता था. मैंने पीछे मुड़ कर देखा भी लेकिन कुछ नहीं दिखा. मैं अपने कैंप पहुंच गया. हमारी जलाई हुई आग कैंप में जल ही रही थी. वहां सब के बीच में पहुंचकर मैं ने राहत की सांस ली. हांलाकि सब अपने टेंट के अंदर ही थे. लेकिन फिर भी मुझे सुकून था कि मैं अपने दोस्तों के बीच पहुंच चुका हूं. मैं कुछ देर के लिए वोी आग के पास ही रुका लेकिन वो मुझे फिर दोबारा दिखाई नहीं दिया.
कुछ देर के बाद में वापस अपने टेंट में चला गया. उस रात जो हुआ वो बिल्कुल एक डरावने सपने की तरह था ”

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कुछ दिन पहले हम कई सारे दोस्त साथ में खाना खा रहे थे रात में. और एक दूसरे को डराने के लिए डरावनी भूतों की कहानियां सुना रहे थे. ज्यादातर डरने वाले नए लड़के ही हुआ करते थे.
लेकिन एक लड़की ने एक ऐसी कहानी सुनाई जिसे सुनकर मैं भी डर गया था. सच बताऊं तो मुझे नहीं पता कि वो कहानी सच्ची थी या नहीं, लेकिन उसने कसम खाई थी कि वो कहानी बिल्कुल सच्ची है. और मुझे भी यही लगा था कि वो सच बोल रही है. उसने बताया कि जब वो छोटी थी तब उनके घर के पीछे एक बहुत बड़ा जंगल हुआ करता था.
और वो अपनी दोस्त के साथ अक्सर उस जंगल में जाकर खेला करती थी. वो जिस इलाके में रहते थे वहां के जंगल बाकी जंगलों की तरह नहीं थे बल्की बहुत ही ज्यादा घने थे. इतने घने की दिन के समय भी जंगल के अंदर अंधेरा रहता था क्योंकि रोशनी पेड़ों को पार करके नीचे नहीं पहुंच पाती थी. वो और उसकी दोस्त उसी इलाके में पले बड़े थे, इसीलिए जंगल में खेलने जाते हुए उन्हें ज्यादा डर नहीं लगता था.
लेकिन फिर भी थोड़ा सावधान जरूर रहते थे. उसने बताया कि उसको ये तो नहीं पता कि क्यों लेकिन उनके पेरेंट्स उनको हमेशा जंगल के ज्यादा अंदर जाने के लिए मना करते थे. जंगल के अंदर जंगली जानवर भी नहीं थे. लेकिन फिर भी चाहे कोई छोटा हो या बड़ा, कोई भी जंगल के ज्यादा अंदर नहीं जाता था. बस यही मान लो कि ये एक तरह का अनकहा रूल था कि कोई भी जंगल के ज्यादा अंदर नहीं जाएगा.
हम सब बच्चे आपस में खेलते और एक दूसरे को डराते ये बोलकर कि जंगल के अंदर बड़े-बड़े भालू हैं. हम खेल खेल में छुप जाते और भालू की आवाज निकाल कर एक दूसरे को डराते.
उसने बताया कि एक बार गर्मियों में बहुत सारे भयंकर तूफान आए थे जंगल में. तूफान इतने भयंकर थे कि बहुत सारे पेड़ तक उखड़ के हवा में उड़ गए थे. और उसके घर के करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल के एक हिस्से में आग भी लग गई थी.
हालांकि आग बुझाने वाले फायर फाइटर्स ने उस आग पर काबू जरूर पा लिया था. लेकिन जब वो लोग आग बुझा के वापस आ रहे थे के तो उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो वो किसी जंग से वापस आ रहे हैं. उन सबके चेहरे पर एक अजीब सी बदहवासी और दहशत थी. मानो उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसी आग कभी ना देखी हो.
वो ऐसे चल रहे थे जैसे कि वो जिंदा ही ना हो. यहां तक कि अगर उनके पास जाकर उनसे कुछ बात करने की भी कोशिश करते तो भी वो कोई जवाब नहीं देते थे. ना ही उनके चेहरे पर कोई खुशी थी.
उनमें से ज्यादातर लोग बाहर से ही आए थे. इसीलिए जब सब कुछ नॉर्मल होते ही वो लोग भी शहर से चले गए.
मैंने अपने पेरेंट्स से भी इस बारे में पूछा लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया. कुछ दिन बाद जब सब कुछ नॉर्मल हो गया तो 1 दिन मैं और मेरी दोस्त ने प्लान बनाया कि हम जंगल के उस इलाके में जाकर देखते हैं जहां आग लगी थी.
हमने अपने घर वालों को भी नहीं बताया इस बारे में. हम दोनों बच्चे ही थे और ये सोच कर कि हम दोनों बिना घर वालों को बताए जंगल में जाएंगे, हम बहुत एक्साइटेड हो गए थे.
हम करीब 3-4 किलोमीटर पैदल चलते चलते उस इलाके में पहुंच गए जहां आग लगी थी. वहां चारों तरफ जले हुए पेड़ खड़े थे. मुझे याद है मेरी दोस्त कुछ जले हुए हिरण को देखकर डर गई थी. वो हिरण आग में बिल्कुल जल चुके थे और पेड़ों से चिपके हुए थे. उसने मुझसे बोला कि इनको जमीन में दबा देते हैं, लेकिन मैंने मना कर दिया. क्योंकि मुझे उनके सींघ बहुत अजीब से लग रहे थे. और मैं नहीं चाहती थी कि हम में से कोई भी उनके नजदीक जाए.
हम जितना अंदर जाते जा रहे थे हमें उतनी ही ज्यादा झुलसी हुई चीजें मिलती जा रही थी. आख़िर में हम एक ऐसी जगह पहुंच गए जहां एक भी पेड़ नहीं बचा था. सब आग में खत्म हो चुके थे. ऐसा लग रहा था कि मानो हम किसी दूसरी ही दुनिया में आ गए हैं. कहीं कुछ हरा नजर ही नहीं आ रहा था. बस सब जगह काला रंग ही था. आग में झुलसी हुई चीजों का. हम वहीं खड़े वो सब देख ही रहे थे कि अचानक कुछ दूर से हमें किसी के चिल्लाने की आवाज आती है. मैं डर गई क्योंकि मुझे लगा वो मेरे पापा हैं और अब मेरी पिटाई होगी, जंगल में बिना बताए आने के लिए.
मेरी दोस्त भाग के एक बड़े पत्थर के पीछे छुप गई क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि मेरे पापा उसको वहां देखें. उसके घर वालों ने भी उस को सख्त मना करा था जंगल में अकेले जाने के लिए. और वो तो अपने घर ये बता कर आई थी कि वो मेरे घर एक मूवी देखने जा रही है. मैं वहीँ खड़ी रहती हूं और महसूस करती हूं की आवाज हमारे करीब आ रही थी. तो पता लगता है कि कोई हेल्प के लिए आवाज़ लगा रहा है. मुझे लगा वो कोई hiker है जो कि जंगल में खो गया है और मदद के लिए आवाज मार रहा है. क्योंकि अक्सर ऐसा होता ही रहता था उस जंगल में.
तो मैं भी उसको आवाज देती हूं, aur वो मेरी आवाज का पीछा करते करते मेरे पास आ जाता है.
वो मुझसे थोड़ी ही दूर खड़ा होता है, तो मैं देखती हूं की उसका चेहरा बिल्कुल लाल है.
मैंने अपने दोस्त को आवाज़ लगाई उसका बैग लेने के लिए क्योंकि उसके बैग में फर्स्ट एड किट थी. लेकिन वो चिल्ला के मुझसे बोलती है-” तुमने उसका चेहरा देखा ?”
मैं उसको गुस्से से चुप होने के लिए बोलती हूं और भाग के उस आदमी के पास जाने लगती हूं. और जब मैं पास पहुंचती हूं तो देखती हूं कि उसकी नाक और होंठ गायब हो चुके हैं. मानो जैसे किसी तलवार से एक झटके से काट दिए गए हो. उसके चेहरे से बहुत ज्यादा खून निकल रहा होता है. मेरा ध्यान उसके घुटनो पर जाता है तो देखती हूँ कि उसके घुटनों से भी खून निकल रहा है. ये देख कर मैं तो बहुत ज्यादा डर गई थी इतना कि डर के मारे पीछे भी नहीं हो पा रही थी.
वो मेरे कंधे पकड़ लेता है. उसके हाथ लगाते ही ऐसा लगा कि मानो कोई बिजली का झटका लगा हो. और वो एकदम से पीछे हो जाता है और पता नहीं क्या बड़बड़ाने लगता है. मुझे ज्यादा कुछ तो समझ नहीं आ रहा था बस इतना ही समझ आया कि वो ये पूछ रहा था कि वो वहां कितनी देर से है. उसने मुझसे पूछा कि उसकी यूनिट कहां है.
मैं डरते-डरते जवाब देती हूं “मुझे नहीं पता”
वो मुझे ध्यान से देखता है, मेरे पास मेरा वॉकमेन भी था, जिसको देखकर वो चिल्लाता है.
वो लगातार बड़बड़ाया जा रहा था और अपने चेहरे को टच किए जा रहा था.
मैंने उसको ध्यान से देखा तो नोटिस किया कि उसने कुछ अजीब से ही कपड़े पहने हुए थे. उसने कोई अजीब सी ही जैकेट पहनी थी और उसकी पेंट फॉर्मल लग रही थी. उसकी जैकेट पर अजीब से बटन थे जिन पर की रेट बॉर्डर था. ऐसा लग रहा था कि वो सौ साल पुराना सिपाही है. मैंने उसको बोला कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आप क्या बोल रहे हो. मैंने फर्स्ट एड बॉक्स को खोलना चाहा लेकिन वो फिर से मुझ पर चिल्लाया–” मुझे मत छेड़ो. तुम मुझे वापस वहीँ भेज दोगी.”
इतना बोलते ही वहां से भाग गया. भागते हुए वो चीखे जा रहा था. और जब उसके चीखने की आवाज मुझे सुनाई देना बंद हुई तो मैं पलटी.
पलट कर देखा तो मेरी दोस्त मेरे पीछे खड़ी रो रही थी. फिर हम दोनों भागकर अपने घर की तरफ जाने लगे. वो बार-बार मुझसे पूछ रही थी कि वो आदमी कौन था. मैं कुछ नहीं बोली घर पहुंच कर हम दोनों ने फैसला किया कि हम अब कभी जंगल में नहीं जाएंगे. हम आज भी दोस्त हैं लेकिन उस दिन के बाद हमने उस आदमी के बारे में कभी कोई बात नहीं की.
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जब मैंने जंगल में अपनी नौकरी शुरु करी थी तब मुझे किसी ने ज्यादा कुछ नहीं बताया था इन सब चीजों के बारे में. मेरा मतलब कि जंगल में होने वाली इन अजीब अजीब चीजों के बारे में.
शायद इसीलिए कि कहीं मैं डर ना जाऊं और डर के भाग ना जाऊं. लेकिन कुछ महीने बाद एक पार्टी में एक दोस्त ने नशे में मुझे कई सारी बातें बताई थी. मैंने उससे पूछा कि मैंने सुना है जंगलों में बहुत गड़बड़ है. उसने नशे में ही बोला हां इन जंगलों में बहुत अजीब अजीब चीजें होती हैं. सबसे अजीब तो ये है कि लोग ऐसी जगहों पर मर जाते हैं जहां उनके मरने का कोई मतलब ही नहीं होता या फिर ये कि लोग खोते होते ही मर जाते हैं. जैसे कि 10 मिनट पहले कोई खोया और 10 मिनट बाद उसकी डेडबॉडी मिल जाए. इतनी जल्दी कोई कैसे मर सकता है. जैसे कि एक आदमी के साथ हुआ था कुछ साल पहले.
वो आदमी जंगल में गया था hiking के लिए और वो जिस रास्ते से जा रहा था वो बहुत ही पॉपुलर रास्ता था. और उस रास्ते पर लोग आते जाते ही रहते थे. किसी ने हमको फोन किया कि कोई आदमी मरा पड़ा है रास्ते में. हम वहां पहुंचे तो देखा कि वो आदमी खून में लथपथ पढ़ा था. वहां बहुत ही ज्यादा खून था. वो शक्स मर चुका था. और मरता भी क्यों ना उसका सिर पीछे से किसी आलू की तरह पिचका हुआ था. पीछे से सर की हड्डी टूटी हुई थी और दिमाग बाहर लटक रहा था. वो आदमी बूढा था. तो शायद वो चलते-चलते लड़खड़ा गया होगा और सिर के बल गिर गया होगा. बूढ़े लोग अक्सर लड़खड़ा के गिर जाते हैं और चोट लगवा बैठते हैं. तो ये कोई बड़ी बात नहीं थी. सिवाय इसके कि वहां कोई ऐसा पत्थर नहीं था जिस पर गिरके उसका सर इस तरह फूट जाए. ना ही वहां कोई उबड़-खाबड़ रास्ता था. बिल्कुल प्लेन रास्ता था और झाड़ियां भी नहीं थी. और ना ही आस-पास कोई खून था इसका मतलब यही था कि वो शख्स वहां गिरते ही मर गया था. हो सकता है किसी ने उसका मर्डर किया हो. लेकिन उसके कुछ दूर पीछे ही और लोग भी थे और अगर कोई उसके पीछे से आकर उसका खून करता तो ऐसा हो ही नहीं सकता था कि किसी को सुनाई ना दे. फिर भी मान लिया जाए कि कोई आवाज नहीं सुन पाया हो तब भी आस-पास खून के छींटे तो होने चाहिए थे ना. लेकिन जिसने भी उसको देखा सबको यही लगा कि वो वहां गिरा और उसका सर किसी पत्थर पर लगा और उसके सिर के टुकड़े हो गए. तो आखिर उसके सर पर लगा क्या. किसी को नहीं पता.

उसी तरह एक औरत का केस था जो मुझे एक दूसरे जंगल में कुछ साल पहले मिली थी. वो हमें एक बड़े से पतले पेड़ से लिपटी हुई मिली थी. उसने उस पेड़ को अपने हाथ पैरों से जकड़ रखा था. जैसे कि वो पेड़ को हग कर रही हो. हमने उसको जैसे ही खींचकर पीछे किया तो उसके मुंह से पानी की लंबी धार निकल पड़ी और मेरे दोनों पैर भिगो दिए. उसके कपड़े सूखे हुए थे बाल भी बिल्कुल सूखे थे. लेकिन उसके फेफड़ों और पेट में बहुत ही ज्यादा पानी भरा था. वो मर चुकी थी. मैंने पूछा -“पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निकला”
उसने बताया पोस्टमार्टम में पता चला कि उसकी मौत डूबने से हुई थी. उसके फेफड़े पानी से लबालब भरे हुए थे. जिस जगह वो मिली थी वो एक सूखा जंगल था और उसके कई कई किलोमीटर दूर तक पानी नहीं था. ना कोई नदी ना कोई झरना कुछ भी नहीं था. ना ही किसी और के वहां होने का कोई निशान था. जाहिर है वो खुद तो नहीं मर सकती थी. क्योंकि डूब के मरने के बाद वो वहां तक कैसे आती. इसका मतलब किसी और ने ही उसको मारा था. लेकिन किसी को अगर उसको मारना ही था तो इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत थी. पहले उसको डुबाकर मारा और फिर दूर जंगल में लाकर छोड़ दिया. मारने के तो और भी आसान तरीके हैं. इतने सारे सवाल लेकिन एक जवाब नहीं.

ये दोनों कहानियां सुनकर मैं तो डर ही गया था. क्योंकि मैं तब नया नया ही था लेकिन उस समय हम दोनों ही नशे में थे तो मुझे लगा कि शायद वो नशे में ही बातें बढ़ा चढ़ाकर बोल रहा है.

ये जो अगला केस मैं बताने जा रहा हूं, इस केस के बारे में बातें करना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता. ये बहुत ही दर्दनाक case था जिसको कि मैंने भुलाने की बहुत कोशिश की. लेकिन ऐसे किसी केस को भुलाना इतना आसान नहीं होता. ये जो मैंने आपको अपने दोस्त की पिछले वाली कहानी सुनाई थी ये केस उसके करीब 6 महीने बाद का ही था. तब मुझे 1 साल ही हुआ था इस नौकरी में और उस समय तक मैंने ऐसा कोई केस नहीं देखा था. बस कुछ हल्के फुल्के केस ही देखे थे, और सीढ़ियां देखी थी. बस ज्यादा कुछ नहीं. एक 20 साल का लड़का जो कि मेंटली चैलेंज्ड था वो एक जगह से खो गया था. उसका खोना ही अपने आप में अजीब था क्योंकि उसकी मम्मी ने बताया कि वो बिल्कुल उनके साथ ही था उसका हाथ पकड़े हुए. अचानक वो गायब हो गया. वो बार-बार बोले जा रही थी कि जरूर उसको किसी ने kidnap किया है. उसकी मम्मी बार-बार अपने आप को कोसे जा रही थी कि उसकी वजह से उसका बेटा खो गया है.
हमने उसको बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो मान ही नहीं रही थी. आखिर में हमने उसको शांत किया और उनसे डिटेल्स पूछी उसके खोने की. सिचुएशन बहुत अर्जेंट थी क्योंकि वो लड़का मेंटली चैलेंज्ड था aur वो अकेले रह ही नहीं सकता था. हमने लोकल पुलिस को भी कॉल किया हमारी मदद करने के लिए. पहली रात तो वो हमें नहीं मिला जो कि वाकई में बहुत परेशान कर देने वाला था क्योंकि हम सबको पता था कि हमें जितनी देर ढूंढने में लगेगी उसके मिलने के चांसेस उतने ही कम होते जाएंगे. हम सब यही मान रहे थे कि वो हमसे आगे ही चलता जा रहा है. अगली सुबह हेलीकॉप्टर लाया गया. हेलीकॉप्टर की मदद से वो कुछ ही घंटों में हमें मिल गया. वो 1 गड्ढे में फंसा हुआ था. हमने उसको बाहर निकाला और हेलीकॉप्टर पर चढ़ाया. उसकी हालत देखकर मैं समझ गया था कि वो नहीं बच पाएगा. उसकी रीड की हड्डी टूट गई थी उसको अपनी कमर के नीचे का हिस्सा महसूस ही नहीं हो पा रहा था. उसके दोनों पैर भी टूट चुके थे. और उनमें से बहुत खून निकल रहा था. वापस आते समय मैं उसके साथ हेलीकॉप्टर में ही था. मैंने उससे पूछा तुम क्यों चले गए थे ? मैं बस कुछ ऐसा सुनना चाहता था जो कि मैं उसकी मां को बता सकूं ये बताने के लिए कि ये उसकी गलती नहीं थी. उसका बहुत सारा खून बह चुका था और मुझे पता था कि हॉस्पिटल पहुंचने तक ये बच नहीं पाएगा और अपनी मां से बात नहीं कर पाएगा.
वो रो रहा था. रोते-रोते उसने बताया कि जब वो अपनी मम्मी के साथ जा रहा था तो वहां उसको एक छोटा बच्चा मिला जो कि बहुत उदास था. वो बच्चा उसके साथ थोड़ी देर खेलना चाहता था.
उसने बताया कि वो छोटा बच्चा उससे अदला बदली करना चाहता था जिससे कि वो अपने घर जा सके.
छोटे बच्चे ने उसको अपनी आंखें बंद करने को कहा, उसने एक सेकेंड के लिए अपनी आंखें बंद करी और जब उसने आंखे खोली तो वो उस गड्ढे में फंसा हुआ था.
हेलीकॉप्टर में वो रोए जा रहा था और बार-बार अपनी मम्मी के बारे में पूछ रहा था. मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको शांत किया.
“वहां बहुत ठंड थी वहां बहुत ठंड थी मेरे पैरों में बहुत ठंड है मेरे अंदर बहुत ठंड है” वो लड़का यही बड़बड़ाया जा रहा था उसको कमजोरी आती जा रही थी. कुछ ही देर में वो चुप हो गया और उसने अपनी आंखें बंद कर ली. फिर जब हम हॉस्पिटल से 5 मिनट ही दूर थे उसने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखते हुए बोला. बोलते हुए उसकी आंखों से लंबे लंबे आंसू निकल रहे थे “मम्मी अब मुझे कभी नहीं देख पाएंगी. लव यू मम्मी. काश आप यहां होती, मेरे पास.” इतना कहकर उसने अपनी आंखें बंद कर ली और फिर, फिर कभी नहीं खोली.
ये बहुत दर्दनाक था. इस बारे में मैं याद करना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता. सच बताऊं तो ये पहला ऐसा केस था जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था. इसके इसके बाद मैं कई दिनों तक उदास रहा. मुझको उदास देखकर एक दिन मेरे सीनियर ने मुझे अपने पास बुलाया और मुझसे इस बारे में पूछा. मैंने अपने सीनियर को सब कुछ बता दिया.
बातों बातों में हम काफी घुलमिल गए थे. अगले कुछ दिनों में हमारी अच्छी दोस्ती भी हो गई थी. फिर एक दिन मेरे सीनियर ने मुझे उसकी एक कहानी सुनाई. उसकी कहानी भी बहुत परेशान कर देने वाली थी. लेकिन उसको सुनकर कम से कम मुझे ये सुकून तो मिला था कि मैं अकेला ऐसा नहीं हूं जिसको ऐसे केसेस परेशान कर देते हैं.
उसने बताया कि एक बार जंगल की एडमिनिस्ट्रेशन ने जंगल का एक छोटा सा हिस्सा एक प्राइवेट कंपनी को बेचने का फैसला किया था. इसको लेकर बहुत हल्ला भी हुआ था लेकिन उस टाइम recession के कारण एडमिनिस्ट्रेशन को पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत थी.
जिस कंपनी को वो प्लॉट बेचा गया था वो एक पेड़ काटने वाली कंपनी थी.
उनके लोग पेड़ काट ही रहे थे कि हमारे पास कॉल आई कि जल्दी से सभी सुपरवाइजर और ऑफिसर्स को उस जगह भेजो. वहां जाने वाले सुपरवाइजर में एक मैं भी था. वहां पहुंचे तो देखा कि वो सब लोग एक पेड़ के चारों तरफ भीड़ बनाकर खड़े थे. वे लोग जिस पेड़ के चारों तरफ खड़े थे उस पेड़ को उन्होंने तब काटा ही था. वो सब लोग गुस्से में थे और बहुत ज्यादा डरे हुए थे. उनका ऑफिसर गुस्से में हमारे पास आकर पूछता है “तुम लोग चाहते क्या हो? ये किस तरह का बेहूदा मजाक है. हमने पूरे पैसे दिए हैं इस जमीन को खरीदने के लिए तो फिर तुम्हारी ये हरकत करने की हिम्मत कैसे हुई ?””
वो बहुत गुस्से में था. हमें समझ नहीं आ रहा था कि वो किस बारे में बात कर रहा है. हमने उससे पूछा तो वो हमको उस पेड़ के पास ले गया जो उन्होंने कुछ देर पहले ही काटा था. पेड़ के अंदर का हिस्सा सड़ा हुआ था और खोखला था उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पेड़ काटा तो उनको पेड़ के अंदर से ये मिला. मैंने पास जाकर देखा तो वो एक कटा हुआ हाथ था. एक परफेक्टली कटा हुआ हाथ. उसको देख कर लग रहा था कि वो पेड़ के साथ ही उगा हो. उस पॉइंट पर हम सबको लगा कि ये लोग हमसे मजाक कर रहे हैं.
हमने उनसे नाराज होते हुए बोला कि हमें इस तरह का मजाक पसंद नहीं है. और हम वहां से वापस जाने लगे. लेकिन उसने हमें बताया कि वो पुलिस को पहले ही फोन कर चुके हैं और अगर हमने वहां रुक कर उनकी हेल्प नहीं करी तो वो सीधा मीडिया में चले जाएंगे. मीडिया की बात सुनते ही हमारा ऑफिसर रुक गया
पुलिस भी पहुंच चुकी थी और हम सब इस बारे में बात करने लगे. पुलिस ने पूछताछ की तो सब मना कर रहे थे कि उन्होंने वो हाथ वहां नहीं रखा. और सच बताऊं तो ऐसा हो भी नहीं सकता था कि कोई उस हाथ को वहां रख दें.
हमने ध्यान से देखा तो वो एक इंसान का ही हाथ था. असली हाथ. कोई ममी नहीं थी. और वो बिल्कुल नया हाथ था. जैसे कि अभी-अभी कटा हो. 1 दिन पुराना भी नहीं लग रहा था. और वो बिल्कुल ऐसा था कि जैसे वो पेड़ का ही एक हिस्सा हो. पुलिस वालों ने पेड़ के उतने हिस्से को काटा और अपने साथ ले गए इंवेस्टिगेशन के लिए. उस एरिया को भी कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया. बहुत बड़ी इन्वेस्टिगेशन चली थी. लेकिन मुझे पता था कि उनको इंवेस्टिगेशन में कुछ नहीं मिलेगा.
उसके बाद हमने जंगल की जमीन कभी किसी को नहीं बेची.

एक बार मैं एक ट्रेनिंग सेमिनार में गया था. और वहां कुछ बहुत ही डरावनी कहानियां सुनी थी. वहां मुझे एक बंदा मिला था जिस से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई थी. तो एक रात कैंप फायर के दौरान हम एक दूसरे को अपनी अपनी कहानियां सुना रहे थे. हम दोनों काफी नशे में थे. एक कहानी बो सुनाता फिर एक कहानी मैं उसे सुनाता.
उसने मुझे ये वाली कहानी सुनाई. उसने बताया -“एक रात मैं और मेरा एक साथी जंगल में गश्त पर गए थे क्योंकि कुछ campers ने रात के समय जंगल में चीखने की आवाजें सुनाई देने की रिपोर्ट दी थी. हमें लगा कुछ जंगली बिल्लियां होंगे. तो हम उनको ढूंढने के लिए उस तरफ जाते हैं. मैं बहुत गुस्से में था क्योंकि उस साल व तीसरा ऐसा केस था उन जंगली बिल्लियों का. और मैं उनको ढूंढ ढूंढ के बहुत परेशान हो चुका था. वैसे भी मुझे बिल्लियां बिल्कुल पसंद नहीं थी.
साली बिल्लियां.
मैं बार-बार गुस्से में गालियां देते हुए आगे बढ़ रहा था.
आगे हमको टूटी टहनियां मिलती हैं और कुछ छोटी-छोटी गुफाएं सी भी मिलती है.
हम देखते ही समझ जाते हैं कि यही बिल्लियों का इलाका है. मैं अपने base फोन करके बताता हूं कि हमें बिल्लियों का इलाका मिल गया है. तो मेरा सीनियर मुझसे कहता है कि अच्छे से कंफर्म कर लो. अच्छे से कन्फर्म करने का मतलब था कि उनके shit को इकट्ठा करके proof के लिए लेकर जाना है. आसपास हमें कुछ कही कुछ नहीं मिलता.
फिर मैं टॉयलेट करने के लिए थोड़ा साइड में चला जाता हूं. मेरा साथी आगे ही निकल जाता है. मैं वहां खड़ा टॉयलेट ही कर रहा था कि मुझे दूसरी तरफ से टहनियों के टूटने की आवाज आती सुनाई पड़ती है. मुझे लगा शायद कोई जंगली जानवर होगा या वो जंगली बिल्लियां होंगी. ये जंगली बिल्लियां बिल्कुल छोटे शेरो की तरह होती हैं और बहुत खतरनाक होती हैं.
तो मैं अपनी पिस्टल निकाल लेता हूं. हालांकि मुझे पता था कि उन जंगली बिल्लियों के सामने वो पिस्टल ज्यादा कुछ नहीं कर सकती.
लेकिन फिर भी मैं अपनी पिस्टल को हाथ में निकाल लेता हूं और अपने साथी को गुस्से से आवाज देता हूं इधर आने के लिए. लेकिन वो शायद काफी दूर निकल चुका था और मेरी आवाज नहीं सुन पाया. मैं alert हो कर वही खड़ा हो जाता हूं और उस तरफ ध्यान लगाता हूं जहां से वो आवाज मेरी तरफ आ रही थी.
और मां कसम मैं अपनी पेंट गीली ही करने वाला था. वो आदमी सीधा मेरी तरफ आ रहा था पलटियां खाता हुआ जंगल के बीच में से.
आप समझ रहे हो ना. जैसे कि चलने के बजाय वो आदमी पलटियां खाता हुआ भागकर मेरी तरफ आ रहा था.
और बाय गॉड, वो एक एक पेड़ और झाड़ी को ऐसे पार कर रहा था जैसे कि उसको पता है कि वो कहां जा रहा है. मैं उसकी तरफ चिल्लाकर उसको रुकने के लिए बोलता हूं.
मैं उसको बोलता हूं कि मेरे पास पिस्टल है लेकिन वो मेरी तरफ आता जाता है. जब वो मुझसे करीब 20 कदम दूर होता है, मैं उसकी तरफ गोली चला देता हूं. जैसे ही मैं गोली चलाता हूं, वो वहीँ रुक जाता है. और फिर वापस जंगल के अंदर चला जाता है पलटियां खाता हुआ.
गोली की आवाज सुनकर मेरा साथी मेरे पास भागा चलाता है. मैं उसको सब कुछ बताता हूं. उसके बाद हम वहां से जल्दी से निकल जाते हैं अपने बेस पर. पता नहीं वो कमीना कौन था और मुझसे क्या चाहता था. लेकिन उसने मुझे बहुत ज्यादा डरा दिया था.

इस नौकरी में मैंने 35 साल किया काम किया है. 35 सालों तक मैंने डरावनी जंगलों की खाक छानी है.
और अक्सर लोग मुझसे मेरे एक्सपीरियंस के बारे में पूछा करते थे. सीढ़ियों के बारे में तो बहुत ही कम लोग जानते हैं इसीलिए उनके बारे में कोई कुछ नहीं पूछता था क्योंकि किसी ने कभी सुना ही नहीं होता था उनके बारे में.
ज्यादातर लोग goatman और wendigo को के बारे में ही पूछते थे.
wendigo एक ऐसा जीव होता है जिसके बारे में बताते हैं कि वो किसी भी इंसान या जानवर की शेप ले सकता है. सच बताऊं तो मुझे भी इन चीजों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता. बस बचपन से ही इनके बारे में किस्से कहानियां सुनते आए हैं. लेकिन हमारे पेशे में इन सब चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचा जाता थे.
जैसे कि किसी हॉस्पिटल में काम करते हुए होता है ना. या तो आप दिनभर हॉस्पिटल में मरने वाले लोगों के बारे में ही सोचते रहो. या फिर उनको भुलाकर आगे अपने काम पर ध्यान दो.
जैसे कि मैंने आपको पहले भी बताया था कि इन जंगलों में डर कर काम नहीं करा जा सकता. क्योंकि या तो आप हर वक्त यही सोचते रहो कि इन जंगलों में ना जाने क्या-क्या है. भूत हैं, सीढ़ियां है. या फिर ये सब अपने दिमाग से निकाल कर अपने काम पर ध्यान दो. और शाम को अपने घर चले जाओ अपने परिवार के पास.
और हम में से ज्यादातर लोग ऐसा ही करते हैं. ऐसे ही pretend करते हैं कि सब कुछ ठीक है क्योंकि एक बार आपके दिल में डर आ जाएगा तो फिर आप हमेशा ही डरेंगे. और ऐसा होता भी है. बहुत सारे लोग नौकरी शुरु करने के पहले कुछ महीनों में ही छोड़ देते हैं. खासकर हमारी यूनिट में तो बहुत सारे ऐसे कैडेट्स थे जो इतना डर जाते थे कि उन्हें छोड़ना ही पड़ जाता था.

इससे पहले मैंने आपको अपनी दोस्त KD के बारे में बताया था. एक बार मैंने उससे wendigo के बारे में पूछा क्योंकि मैं जानना चाहता था कि वो उनके बारे में क्या सोचती हैं.
KD ने बताया कि उसको तो कभी ऐसा कुछ नहीं मिला और वो इन सब चीजों के बारे में ज्यादा सोचना भी नहीं चाहती लेकिन एक बार उसके एक दोस्त के साथ ऐसा कुछ हुआ था.
उसके दोस्त का नाम Harry है. ये उसका असली नाम नहीं है.
तो Harry ने KD को जो कुछ बताया था वो मैं सब कुछ वैसे ही आप लोगों को बताता हूं.
हैरी ने बताया–“मैं सेंट्रल ऑर्गन में पला बढ़ा हूं, और मेरे घर से करीब 2 घंटे की दूरी पर एक बहुत बड़ा जंगल है. उस जंगल में एक Tribe भी रहता है. और वो Tribals उसी जंगल में रहते हैं.
जब हम छोटे थे तब हम उस जंगल में घूमने जाते थे. और उस Tribe के कई आदिवासी बच्चों से मेरी दोस्ती भी हो गई थी. एक बच्चा तो मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त बन गया था. उसका नाम था Nolan. और जब भी मेरी फैमिली जंगल में घूमने जाती तो मैं उससे जरुर मिलता और उसके साथ खेलता था. हमें पेरेंट्स की भी अच्छे से जान पहचान हो गई थी एक दूसरे से. जब भी हम जंगल में रात में रुकते कैंप में तो वो लोग भी हमारे साथ आ जाते थे. हम हर साल छुट्टियों में वहां जाते थे और कई बार तो हम दो-दो हफ्ते तक जंगल में ही कैंप लगाकर रहते थे.
मुझे बहुत ही मजा आता था. रात में टेंट लगा कर सोना और मस्ती करना. बहुत अच्छा लगता था. एक बार मैं और Nolan वहीँ जंगल में ही थे, तब हमारी उम्र कोई 12 साल रही होगी. हम दोनों शाम को अपने कैंप से निकलकर पास ही एक नदी पर चले हम लोग रात में फिशिंग करना चाहते थे हम अपने मेन कैंप से करीब 2 किलोमीटर दूर निकल गए होंगे. ज्यादा दूर तो नहीं थे लेकिन इतनी दूर जरूर थे कि किसी को हमारी आवाज ना सुनाई दे.
मुझे ठीक से तो याद नहीं लेकिन नदी किनारे Nolanने एक पत्थर घिस कर आग लगाई और हम वोीं बैठ गए. अंधेरा भी हो गया था और हम दोनों वहीँ बैठ कर हंसी मजाक और मस्ती करने लगे. जैसा कि कोई भी 12 साल के बच्चे करेंगे. रात हो चुकी थी. की Nolan ने अचानक मेरे पीछे कुछ देखते हुए मुझसे पूछा-” तुम्हें वो दिखा क्या”
मैं आपको बता दूं कि उस वक्त हम नदी से करीब 10 फीट दूर बैठे थे. और जिस जगह हम बैठे थे उस किनारे से नदी का दूसरा किनारा करीब 20 फीट दूर था.
गर्मियों के दिन जरूर थे लेकिन नदी का पानी बहुत ही ठंडा था.
मैंने पीछे मुड़ के देखा तो मैंने देखा कि दूर नदी में कुछ चल रहा है. हमको लगा वो कोई हिरण है. लेकिन आग की वजह से कुछ ठीक से दिख नहीं रहा था.
मैं थोड़ा पास जा कर देखता हूं तो मुझे दो सींघ दिखाई देते हैं जैसे हिरण के होते हैं, बिल्कुल वैसे.
हमको पक्का यकीन हो गया था कि वो कोई हिरण ही है. लेकिन हमें ये नहीं समझ आ रहा था कि वो इतनी रात में नदी में क्या कर रहा है. और वो पक्का हमारी ही तरफ आ रहा था.
मैंने Nolan से पूछा कि अब हमें क्या करना चाहिए. Nolan आग की तरफ अजीब ही तरीके से देख रहा था और उसने मुझे चुप करके बैठने को बोला. मैं चुपचाप बैठ गया.
वो मुझे धीरे से बोलता है कि उसकी तरफ मत देखो और नॉर्मल बातें करते रहो जैसे हम पहले कर रहे थे.
लेकिन मेरे दिमाग में तो कोई बात ही नहीं आ रही थी. वो मुझे एक मूवी की कहानी सुनाने लगा.
लेकिन मैं उस हिरण के नदी में चलने की आवाज सुन रहा था. उसकी बातों पर मेरा ध्यान ही नहीं जा रहा था.
बीच-बीच में उस हिरण की तरफ देखने की कोशिश करता तो नोलन हर बार मेरे कंधे पर हाथ मारकर मुझे उस तरफ ना देखने को बोलता. मैं ज्यादा डरा हुआ तो नहीं था क्योंकि तब तक मुझे यही लग रहा था कि वो कोई हिरण ही है. बस मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि Nolan इस तरह से क्यों act कर रहा है.
फिर मैंने उसके पानी में से बाहर निकलने की आवाज सुनी. मैं उसकी तरफ देख तो नहीं रहा था लेकिन फिर भी तिरछी नजर से मैं उसको हल्का हल्का देख पा रहा था. मुझे उसकी shape का अंदाजा हो रहा था और तभी मुझे पता चला कि वो कोई हिरण नहीं है. क्योंकि वो दो पैरों पर चल रहा था.
उस वक्त मैं बहुत ज्यादा डर गया था और बस उठ कर भागने वाला ही था कि Nolan ने मुझे पकड़ कर बैठा दिया और जोर-जोर से मूवी की कहानी सुनाने लगा. वो भी मेरे जितना ही डरा हुआ था. या शायद मुझसे भी ज्यादा.
Nolan थोड़ा सा आगे झुका आग में लकड़ी डालने के बहाने और मुझसे धीरे से बोला-” कि चाहे कुछ भी हो जाये, बस उससे बात मत करना”
मैं उसको हमारे पास आते हुए देख रहा था और वो बिल्कुल Nolan के पीछे आकर खड़ा हो जाता है.
मैं अपनी पेंट गीली करने वाला था और वहां से भागने की सोच रहा था लेकिन मैं Nolan को वहां अकेला छोड़कर भागना नहीं चाहता था. तो मैं वोीं बैठा रहा. और बीच-बीच में तिरछी नजर से उसको देख रहा था.
वो बहुत ज्यादा लंबा तो नहीं था लेकिन जिस तरह से वो खड़ा था वो बहुत ही अजीब था. उसका सेंटर ऑफ बैलेंस बिल्कुल ही अजीब था. मैं ठीक से तो नहीं बता सकता लेकिन वो बहुत ज्यादा आगे की तरफ झुका हुआ था.
वो बहुत देर तक Nolan के पीछे ही खड़ा रहा और फिर Nolan की भी बातें खत्म हो गई.
हम कुछ देर ऐसे ही बैठे रहे. आग के जलने का हल्का हल्का शोर आ रहा था.
मुझे लगा शायद मुझे उसकी आवाज सुनाई दे रही है, हल्की हल्की सी. तो मैं थोड़ा सा आगे झुकता हूं उसकी आवाज को ठीक से सुनने के लिए. और कसम से मैंने अपनी पेंट गीली कर दी थी क्योंकि मेरे थोड़ा सा आगे झुकते ही वो भी आगे झुकता है. मैं उसका चेहरा तो नहीं देख पाया लेकिन मैंने उसकी आंखें देखी. उसकी आंखें धुंदली और सफेद थी. बड़ी-बड़ी मानो उनके अंदर मवाद भरा हुआ है. दो बड़ी बड़ी आंखें बिल्कुल Nolan के सर के ऊपर तैर रही थी.
और उसके सर में से दो बड़े बड़े सींघ निकल रहे थे. और बस. वही मौका था जब मैं और Nolan वहां से भाग निकले.
हम बहुत तेजी से भागे थे. और अपने camp पहुंचने तक हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा. मेन कैंप में पहुंचते ही मैंने पीछे मुड़ कर देखा लेकिन हमारे पीछे कोई नहीं था. हम थोड़ी देर वोीं खड़े होकर सांस लेने लगे. हमारी सांसें फूली हुई थी. मैंने Nolan से पूछा कि वो क्या चीज थी. Nolan ने कहा- मुझे नहीं पता, बस मुझे मेरे दादा जी ने एक बार बताया था कि जंगल में कभी ऐसी कोई चीज तुम्हारे पास आए तो कभी उससे बात मत करना और उसकी बात मत सुनना.
मैंने नोलन से पूछा कि तुमने भी उसकी कोई बात सुनी क्या उसने बताया कि उसको सिर्फ एक ही बात समझ आई थी-“Help”

हैरी की ये कहानी wendigo की कहानियों से बिल्कुल मिलती जुलती है.
wendigo के बारे में कहा जाता है कि wendigo सुनसान जगहों की आत्मा होती है .
बहुत बार जब मैं जंगलों में अकेला होता हूं, जहां की मुझे पता होता है कि यहां से कई कई किलोमीटर दूर तक कोई नहीं है और मैं बिल्कुल अकेला हूं तो मुझे ये अजीब सी भूख लगती है जिसको कि मैं ठीक से बयान भी नहीं कर सकता. वो कोई नॉर्मल भूख नहीं होती है जैसे की हम को खाने के लिए लगती है वो ऐसी भयंकर भूख होती है मानो कि हमारे शरीर का हर एक हिस्सा भूखा हो

wendigo की तरह Faceless Man यानी कि ऐसा इंसान जिसका कोई चेहरा नहीं होता इसके भी किससे बहुत फेमस है और बहुत पुराने समय से लोग इनके बारे में बातें करते आये हैं.
मेरे एक दोस्त के साथ ऐसा ही कुछ हुआ था. एक रात हम सब दोस्त अपने बेस पर ही थे. और रात में डिनर कर रहे थे. अपने रूम में हम पांच लोग थे मुझे मिलाकर. तो हमारा एक दोस्त अपनी एक कहानी सुनाता है.
मेरा ये दोस्त एक बार हमारे Base के गेट पर बने एक बोर्ड को पेंट कर रहा था.
तभी उसके पीछे से कोई आदमी आकर उसको आगे कैंप का रास्ता पूछता है.
मेरा दोस्त पीछे पलट के नहीं देखता क्योंकि वो उस वक्त सीढ़ी पर चढ़ा हुआ था. ऊपर चढ़े चढ़े ही वो बिना पीछे मुड़े उसको जवाब देता है कि यहां आसपास कोई Campsite नहीं है. लेकिन अगर वो सीधा जाएगा तो 4-5 किलोमीटर दूर एक दूसरा जंगल है और वहां एक कैंप साइट है. फिर मेरा दोस्त उससे पूछता है कि वो उसकी कोई और हेल्प कर सकता है क्या. वो आदमी जवाब देता है- No. थैंक यू.

मेरे दोस्त ने बताया कि वो सारा टाइम सीढ़ी पर ही चढ़ा हुआ था और पेंट कर रहा था. उसने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा. लेकिन उसे सुन सब रहा था.
उसने उस आदमी के जाने की आवाज नहीं सुनी.
मेरे दोस्त ने बताया कि “जब वो आदमी मेरे पीछे आकर मुझसे बात कर रहा था तो पता नहीं क्यों मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे. और माहौल में एक अजीब सा डर आ गया था. और मैं बस जल्दी से वो पेंट खत्म कर के वहां से निकल जाना चाहता था.
और शायद ये भी एक कारण था कि मैंने उस आदमी को पीछे मुड़कर नहीं देखा. यहां तक की उस आदमी के मुझसे बात करने से पहले ही एक अजीब सी बदबू आने लगी थी हवा में. जैसे पुरानी लाश में आती है बिलकुल वैसी.
मैंने पीछे मुड़ कर भी देखा. लेकिन उस वक्त कुछ नहीं दिखाई दिया. फिर थोड़ी देर बाद वो आदमी वहां आया लेकिन मैंने उसके वापस जाने की कोई आवाज नहीं सुनी.
इसीलिए मैंने फिर से उससे पूछा कि उसको कोई और हेल्प चाहिए क्या.
उसने कोई जवाब नहीं दिया.
लेकिन मुझे पता था वोीं खड़ा हुआ है. मुझे उसकी मौजूदगी का अहसास हो रहा था. तो मैं ऊपर सीढ़ी पर ही चढ़े चढ़े पलट कर नीचे देखता हूं उस आदमी को कि वो कर क्या रहा है और मां कसम 1 सेकंड के लिए तो मुझे लगा कि शायद मेरा दिमाग खराब हो गया है. उस साले का तो कोई चेहरा ही नहीं था.
उसका फेस बिल्कुल smooth था. मुझे लगा मुझे हार्ट अटैक आ जाएगा लेकिन तभी अगले ही पल उसका चेहरा वापस आ गया. मुझे लगा मेरा दिमाग मुझसे खेल खेल रहा है.
मेरी डरी हुई शक्ल देखकर वो मुझसे पूछता है-” आप ठीक तो हैं”
मैं हड़बड़ाते हुए जवाब देता हूं, हां मैं ठीक हूं.
वो फिर से मुझ से पूछता है campsite के बारे में.
मैं उसको अपना हाथ उठा कर इशारा करता हूं – कि इस रास्ते पर आगे चलते जाओ आपको 4- 5 किलोमीटर दूर ek campsite मिल जाएगी.
वो बोलता है कि उसकी वो इस इलाके में नया है और मैं उसके साथ चल के उस को रास्ता दिखा दू.
उसी पल मेरे कान खड़े हो जाते हैं. मैं समझ जाता हूं कि जरूर कुछ गड़बड़ है. क्योंकि ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई नया आदमी रात में इस इलाके में आ जाए. और तो और वहां कोई car भी नहीं खड़ी थी तो वो आदमी वहां आया कैसे.
मैं उसको बोलता हूं -sorry मैं आपको अपनी सरकारी गाड़ी में नहीं ले जा सकता, हमें इसकी परमिशन नहीं है.
तो वो बोलता है- प्लीज मेरे साथ चलो ना.
उस पॉइंट तक मुझे पक्का यकीन हो जाता है की जरूर कुछ गड़बड़ है. मैं उसे बोलता हूं ठीक है तो मैं आपके लिए टैक्सी बुला लेता हूं और जहां आपका जाना है टैक्सी आपको ले जाएगी. ये बोलकर मैं अपनी जेब से अपना फोन निकालने लगता हूं.
मुझे फोन निकालते देख वो बोलता है नहीं नहीं और जल्दी से पीछे जाने लगता है.
लेकिन वो कमीना बाहर नहीं जा रहा था. वो घने जंगल के अंदर जा रहा था. उसके जाते ही मैं बोलता हूं- भाड़ में जाए पेंट, और मैं जल्दी से अपनी car स्टार्ट करके वहां से निकल जाता हूं.
कार स्टार्ट करते हुए मैं रियर व्यू मिरर से पीछे देखता हूं तो वो कमीना एक पेड़ के पास ही खड़ा था. मुझे नहीं पता वो इतनी जल्दी वहां तक कैसे पहुंचा लेकिन इस बार मुझे पक्का यकीन हो गया था उसका चेहरा नहीं है.
वो वही खड़ा मुझे बाहर जाते हुए देख रहा था. और जैसे ही मैं कार बाहर ले जाने लगा, उसने जंगल की तरफ एक बड़ा सा कदम बढ़ाया और जंगल में ही गायब हो गया.
अंधेरे की वजह से शायद मैं ठीक से देख ना पाया हूं लेकिन बिल्कुल ऐसा लगा जैसे कि वो जंगल में ही घुल गया हो.

उस वक्त तक हम सब डिनर कर ही रहे थे रहे थे और मैं सीढ़ियों की बात छेड़ देता हूं.
सीढ़ियों की बात सुनते ही जैसे सब के कान खड़े हो जाते हैं. लेकिन कोई भी कुछ बोलता नहीं है. सीढ़ियों के बारे में बात शुरू करते ही सब ऐसा ही करते हैं .उनका डर ही इतना है सबके दिलों में.
खैर.
मन हल्का करने के लिए मैं अपनी एक कहानी सुनाता हूं सबको.
मेरी कहानी सुनने के बाद मेरा वो ही दोस्त जिसने अभी वो बिना चेहरे के आदमी की कहानी सुनाई थी वो अपनी एक और कहानी सुनाने लगता है. लेकिन इस बार बड़ी धीमी आवाज में.

वो बताता है कुछ साल पहले मैं अपनी गर्लफ्रेंड के साथ जंगल में कैंपिंग कर रहा था. हम मेन रोड से करीब 2 किलोमीटर दूर थे. रात में हम सोने के लिए जाते हैं अपने tent में. लेकिन सो नहीं पा रहे थे. क्योंकि बाहर से एक अजीब सा शोर आ रहा था.
जैसे कि कोई कुछ घिस रहा हो.
मेरे भाई को नींद में दांत घिसने की आदत थी और वो आवाज बिल्कुल वैसे ही लग रही थी.
मेरी गर्लफ्रेंड डरने लगती हैं लेकिन मैं उसको शांत करता हूं और उसका आवाज पर ध्यान ना देने को बोलता हूं.
कुछ देर बाद वो आवाज आनी बंद हो जाती है. और उसके थोड़ी ही देर बाद हमारी भी आंख लग जाती है और हम सो जाते हैं. लेकिन करीब 2 घंटे बाद अचानक मेरी आंख खुल जाती है पता नहीं क्यों मुझे कुछ गलत सा लग रहा था. मैं पलट कर देखता हूं तो मेरी गर्लफ्रेंड वहां से गायब थी. मेरी जान निकल जाती है. मैं जल्दी से टेंट से बाहर निकलता हूं और उसका नाम लेकर आवाज़ लगाता हूं. मैं थोड़ी सी दूर गया था कि मुझे वो आगे खड़ी दिखाई देती है. वो पेड़ों की तरफ किसी चीज को देख रही थी. उसका रंग बिल्कुल पढ़ चुका था. मैं उसके पास जाता हूं तो देखता हूं कि वो तो गहरी नींद में है. लेकिन उसकी आंखें खुली हुई थी. उसके चेहरे पर एक अलग ही लुक था जो की मैंने पहले कभी नहीं देखा था.
तो मैं अपना एक हाथ उसके कंधे पर डालकर उसको वापस ले जाने की कोशिश करता हूं लेकिन वो बिल्कुल भी नहीं हिलती. वो धीरे से मुझसे बोलती है -“अब मुझे जाना होगा, वो यहां आ चुके हैं”
मैं उस को हिलाते हुए बोलता हूं- तुम नींद में चल रही हो. चलो वापस चलो.
लेकिन वो हिलती. तक नहीं है. वहीँ खड़ी रहती है और बस यही बोले जा रही थी की अब उसको जाना होगा अब उसको जाना होगा. तभी मैं ध्यान देता हूँ कि वो देखा क्या रही है. देखता हूं तो सामने करीब 20 कदम दूर एक staircase है.
ग्रे कलर की कंक्रीट की बनी हुई सीढ़ियां. वो उन सीढ़ियों की तरफ आगे बढ़ने लगती है तो मैं उसपर जोर से चिल्लाता हूं.
मेरे चिल्लाने की आवाज सुनकर वो मानो नींद से जागती है. वो हैरानी से मेरी तरफ देखती है जैसे कि उसको कुछ पता ही नहीं है. वो मुझसे पूछती है कि हम वहां tent से बाहर क्या कर रहे हैं.
मैं उसको कुछ नहीं बताता. बस यही बोलता हूं कि वो नींद में चल रही थी. इसके बाद हम वापस अपने tent में चले आते हैं. वो घिसने की आवाज भी बंद हो चुकी थी. मुझे इस बारे में याद करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता.

हम सब उसकी बात समझ सकते थे

फिर वो आगे बोलता है- “तुमने उस बच्चे के बारे में सुना है जो शायद मेंटली हैंडीकैप्ड था और गायब हो गया था और एक हफ्ते बाद जब वो मिला तो उसने जो बताया वो दिमाग घुमा देने वाला था”

हम ने जवाब दिया नहीं तो. क्या हुआ था बताओ.

वो बताता है कि वो बच्चा अपने पापा के साथ ही एक कैंप में था और अपने पापा को आग जलाते हुए ही देख रहा था की सीढिया उसके पास आती हैं और उस को उन सीढ़ियों के ऊपर जाना ही पड़ता है नहीं तो कुछ बहुत बुरा हो जाता. वो बताता है पुलिस वालों को समझ नहीं आ रहा था कि बच्चा क्या बोल रहा है. लेकिन वो बच्चा बार-बार तेज आवाज सुनाई देने की बात कर रहा था इतनी तेज कि उसको अपने कानों पर हाथ रखना पड़ रहा था. पुलिस वाले बच्चे से बस यही पूछ रहे थे कि वो कहां चला गया था. और वो बस यही बोल रहा था कि वो तो यहीं था. वो बार-बार अपनी तरफ इशारा कर रहा था कि वो तो यहीं था. उसने बताया कि सीढ़ियों को देखकर वो डरा नहीं था क्योंकि वो सीढ़ियों उससे बात कर रही थी. लेकिन वो नॉर्मल इंसानो जैसी बात नहीं थी बस उसको सीढ़ियों की बात उसके दिमाग में सुनाई दे रही थी. पुलिस वालों को कुछ समझ नहीं आया कि बच्चा क्या बोल रहा है और सबने यही मान लिया कि शायद बच्चा नींद में ही चल के कहीं दूर निकल गया था. लेकिन एक हफ्ते बाद जब वो मिला तो बिलकुल अच्छी हालत में था उसके कपड़े बिल्कुल साफ थे और उसको भूख भी नहीं लगी थी. ये बात किसी को समझ नहीं आई.

अजीब केसेस की बात करूं तो एक केस काफी फेमस हुआ था कुछ टाइम पहले. एक जवान लड़की अपने घर से गायब हो गई थी. शुरु शुरु में तो सबको यही लगा कि शायद वो घर से भाग गई है क्योंकि उसके घर में बहुत लड़ाई झगड़ा रहता था. लेकिन फिर कुछ लोगों ने रिपोर्ट दी उन्होंने उस लड़की को जंगल के आसपास देखा था उसके गायब होने से पहले. तो फिर कुछ Rangers को भेजा गया जंगल में उसको ढूंढने के लिए ये सोच कर कि कहीं उसने किसी पेड़ से लटक कर फांसी ना खा ली हो. उनको थोड़ा वक्त लगा लेकिन वो मिल ही गई. पूरी तो नहीं मिली बस उसका कुछ हिस्सा ही मिला था. उसकी जीभ और नीचे वाला जबड़ा ही मिले थे. बिल्कुल सफाई से कटे हुए. बाकी का शरीर कभी नहीं मिला.

खोए हुए बच्चों के बहुत केस आते थे. कुछ गायब हो कर किसी गुफा में पहुंच जाते या ऐसी किसी टाइट गड्ढे में फंसे मिलते जहां पहुंचना बिल्कुल इंपॉसिबल ही होता था. या फिर ऊंची ऊंची पहाड़ियों पर मिलते हैं या फिर अपने खोने के जगह से दसियो किलोमीटर दूर.
एक बार एक यंग कपल एक ऊंची पहाड़ी पर Hiking के लिए गए थे. उन्होंने बताया कि वो लोग ऊपर पहाड़ी पर चढ़ ही रहे थे कि उन्होंने ऊपर अपने binocular से देखा कि एक और Hiker ऊपर चढ़ रहा है.
बाद में जब वो पहाड़ी के ऊपर पहुंचते हैं तो वो दूसरा Hiker भी उनको वहीँ खड़ा दिखाई देता है.
वो दूर से उनकी तरफ हाथ हिला रहा था. हाथ हिलाते हिलाते ही वो बीच में से टूट गया और उसके दो टुकड़े हो गए और वो पहाड़ी से नीचे गिर गया. उन्होंने मुझको इसकी रिपोर्ट दी. मैंने बोल दिया कि मैं पता लगाऊंगा लेकिन मैंने वो रिपोर्ट नोट ही नहीं की क्योंकि वो दसवीं ऐसी रिपोर्ट थी मेरे पास उस आदमी के देखे जाने की. हम सब को उसके बारे में पता था.

इन जंगलों में इतने साल बिताने के बावजूद बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जिनको मैं आज तक समझ नहीं पाया और शायद कभी समझ भी नहीं पाऊंगा. समझ में आई तो सिर्फ एक बार अगर आप जंगल में जाओ तो अपना ध्यान रखो. अपने साथ पानी, खाना और इमरजेंसी इक्विपमेंट्स लेकर जाओ. और ऐसे किसी रास्ते पर मत जाओ जिसका आपको अच्छे से नहीं पता है और सबसे जरूरी- कभी उनके पास मत जाना, उनको छूना मत और उनके ऊपर मत जाना.

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7 Comments

  1. Mahie February 25, 2018
    • razia sultana May 5, 2018
    • Arnav July 6, 2018
    • Nadeem akhtar July 7, 2018
  2. Yashwant March 31, 2018
  3. Abhishek April 22, 2018
  4. Bulbul Ranawat July 5, 2018

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