भयानक जंगलो की खतरनाक कहानिया – Search and Rescue Horror Stories

 

 

Search and Rescue Horror Stories in Hindi – Part 2

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ये जो कहानी आज बताने जा रहा हूँ ये मेरी जिंदगी की सबसे डरावनी कहानियो में से एक है. मुझे नहीं पता की अभी तक मेरे दिमाग में यह वाली कहानी क्यों नहीं आयी. शायद इसलिए की बहुत लम्बे अरसे तक मैने इस कहानी को भुलाने की बहुत कोशिश करी थी, और शायद मैं इस बात को भूल भी गया था. लेकिन ये कहानिया लिखते लिखते मुझे वो घटना फिर से याद आ गयी.
मेरे जैसे शख्स जिसका की सबसे ज्यादा समय अकेले जंगल में ही बीतता था, मुझे अपना दिल मजबूत करके रखना पड़ता था की जंगल में अकेले डर न लगे, क्युकी ये मेरी नौकरी थी और मेरा घर इसी से चलता था. जब आप ऐसी किसी नौकरी में होते हैं तो आपको अपने आप को हर तरह की सिचुएशन के लिया तैयार रहना होता है, खासकर अपने दिल और दिमाग को मजबूत बनाना होता है. इसलिए जब आपके साथ इस तरह की कोई घटना होती है जैसी के मैं बताने वाला हूँ, आपको ऐसी बात को भूलने में बहुत समय लग जाता है. और एक बार जब आप इसको भूल जाते हैं तो दुबारा आप उसको याद नहीं करना चाहेंगे. सच बताऊ तो ये एक ऐसी घटना थी जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया था की मैं ये नौकरी कर भी पाउँगा या नहीं. क्या आप ऐसी नौकरी करना भी चाहेंगे. मैं उस घटना के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करता हु, लेकिन फिर भी जितना मुझे याद है उतना जरूर बताऊंगा.
जहाँ तक मुझे याद है बसंत तब खत्म ही हुआ था. शुरू में तो बिलकुल नार्मल सा एक खोये हुए बच्चे का ही केस था. एक 4 साल की बच्ची पिकनिक मनाने आयी थी अपने परिवार के साथ और उस जगह से गुम हो गयी. जब हमें फ़ोन किया गया तब बच्ची को खोये हुए 2 घण्टे हो चुके थे, जैसा की आमतौर पर सभी खोये हुए बच्चो के पेरेंट्स बोलते हैं की हमारा बच्चा बहुत सीधा है, हमारी मर्जी के बिना कहीं नहीं जाता, उस बच्ची के पेरेंट्स ने भी हमको ये ही बोला. हमने उनको भरोसा दिलाया की हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे खोयी बच्ची को ढूंढ़ने में. फिर हम अपने काम पर लग गए. हमने ३ टीम्स बनायीं और उस इलाके को छानना शुरू कर दिया. मेरे साथ मेरा एक बहुत ही अच्छा दोस्त था. हम ऐसे ही बातें करते हुए उस इलाके को ढूंढ रहे थे. हो सकता है आपको लगे की बच्ची को ढूंढ़ते हुए हम हंसी मजाक कैसे कर सकते हैं, तो मैं आपको बता दू की जब आपका सामना रोज ही ऐसे केसेस से होता है तो एक समय के बाद आपके अंदर की भावनाये भी खत्म सी हो जाती है. क्युकी ये आम सी बात बन जाती है आपके लिए और अगर आप हर केस में भावुक होने लग जाएंगे तो आप ये नौकरी कर ही नहीं पाएंगे. तो फिर हमने उस इलाके को 2-3 घण्टे अच्छे से ढूंढा, ऐसी जगहों पर भी ढूंढा जहाँ उसके मिलने की संभावना बहुत ही कम थी. ढूँटते ढूँटते हम एक छोटी सी घाटी में पहुंचे. हम घाटी में पहुंचे ही थे की किसी चीज ने हम दोनों क़े कदमो को एक साथ रोक दिया. हम दोनों चुपचाप वही खड़े एक दूसरे को ही देख रहे थे की तभी ऐसा मह्सूस हुआ जैसे किसी लिफ्ट से नीचे उतरते हुए महसूस होता है. हम वही खड़े थे लेकिन ऐसा लग रहा था की मनो हम हवा में नीचे गिर रहे हैं. मेरी कान में ऐसी आवाज़ आयी आयी — “पट्ट” — जैसे की कुछ दूर कुछ गिरा हो. मैने अपने साथी से पूछना चाहा की उसको भी ऐसा कुछ सुना क्या, लेकिन इससे पहले की मैं उससे कुछ पूछ पाता, मेरी जिंदगी की सबसे तेज आवाज़ मुझे सुनाई दी. बहुत ही तेज आवाज़. ऐसा मानो की 100 रेलगाड़िया बिलकुल आपके कान के पास से गुजरी हो. लेकिन सिर्फ एक दिशा से नहीं बल्कि चारो तरफ से आवाज़ आ रही थी, यहाँ तक की ऊपर और नीचे से भी. मानो संसार अब खत्म होने वाला है, ऐसी दिल दहला वाली आवाज़. मेरा दोस्त मेरी तरफ देख के कुछ चिल्लाया, लेकिन उस शोर मैं कुछ सुन नहीं पाया. हम दोनों डरे हुए बदहवास से अपने चारो तरफ देख रहे थे की वो आवाज़ आ कहाँ से रही है, लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था. एक बार के लिए सोचा की हो सकता है पहाड़ी से पत्थर नीचे गिर रहे हो, लेकिन हमारे आस पास कोई ऐसी ऊँची पहाड़ी भी नहीं थी, और अगर होती भी तो इतनी देर में हम पत्थरो के नीचे ही दबे होते. शोर लगातार आये ही जा रहा था और बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा था, और हम दोनों एक दूसरे से चिल्ला चिल्ला के बात करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन बिलकुल पास खड़े होने के बावजूद हमें एक दूसरे की आवाज़ समझ नहीं आ रही थी.

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फिर अचानक आवाज़ बंद हो गयी, जैसे एकदम से शुरू हुई थी उसी तरह एकदम से बंद भी हो गयी. मानो किसी ने बटन on किया और फिर off कर दिया. हम कुछ पल वही खड़े रहे, हैरान परेशान. फिर धीरे धीरे जंगल की नार्मल आवाज़ भी लौट आयी. मेरे दोस्त ने मुझसे पूछा – ” ये आखिर क्या था ? ”
मैने भी अपने कंधे झटकते हुए कहा – ” मुझे नहीं पता ”
मैने अपने दूसरे साथिओ को उनके रेडियो फ़ोन पर कॉल किया और उनसे पूछा की क्या उनको भी कोई ऐसी आवाज़ सुनाई दी क्या, लेकिन हैरानी थी की उनमे से किसी ने कोई आवाज़ नहीं सुनी जबकि वो लग हमसे बहुत दूर नहीं थे.
मैं और मेरा दोस्त कुछ देर तक वही रुके, फिर हम भी आगे चल दिए अपने काम पर.
फिर करीब एक घंटे बाद हमनसे सभी टीम्स से पता किया उनके रेडियो फ़ोन्स पर , लेकिन लड़की का कहीं कोई सुराग नहीं मिला था. ज्यादातर हम अँधेरा होने की बाद ढूंढ़ना बंद कर देते थे, लेकिन क्युकी इस बार हमको एक भी सुराग नहीं मिल पाया था इसलिए हम में से कुछ रुक गए उसको और ढूंढ़ने की लिए. जिनमे मैं और मेरा दोस्त भी शामिल थे. हम ढूँटते हुए बीच बीच में उस बच्ची नाम भी पुकार रहे थे की शायद उसको सुन ही जाये. उम्मीद बहुत कम थी लेकिन फिर मैं उम्मीद बांधे हुए था की शायद बच्ची मिल ही जाये. मुझे बच्चे ज्यादा पसंद नहीं हैं लेकिन एक छोटी सी बच्ची जंगल में अकेले कैसी होगी, ये ख्याल मुझे मजबूर कर रहा था उसको ढूंढ़ने की लिए. इन घने जंगलो में तो दिन भी अकेले इंसान को डर लगे. फिर वो तो एक छोटी से बच्ची थी, और रात की समय में तो ये जंगल किसी शैतान से कम नहीं लगता. लेकिन हमें बच्ची का कोई निशान ही नहीं मिल रहा था, और ढूँटते ढूँटते आधी रात हो चली थी, इसलिए हम सबने वापिस चलने का फैसला किया.
वापिस जाते हुए हम आधी दूर ही पहुंचे थे की मेरे दोस्त ने हमारी बायीं ओर टोर्च लाइट दिखाई. जहाँ उसने लाइट करी थी वहां खाना जंगल और झाडिया थी और घुप्प अँधेरा था.
मैने उससे पूछा की उसने कुछ सुना क्या, लेकिन उसने मुझे शांत रहने का इशारा किया और सुनने को बोला.
मैंने ध्यान लगाया उस दिशा में, तो थोड़ी सी दूर बहुत ही हलकी हलकी आवाज़ सुनाई दी की मानो कोई बच्चा रो रहा हो.
हम दोनों ने उस बच्ची का नाम पुकारा जोर से और उसके जवाब देने का वेट किया. लेकिन सिर्फ हलकी हलकी सी आवाज़ आ रही थी किसी बच्चे की रोने की.
फिर क्या था, हम सभी उस तरफ बढ़ गए घने जंगल में जहाँ सी वो आवाज़ आ रही थी. बीच बीच में हम उसका नाम भी पुकार रहे थे. जैसे जैसे हम उस रोने की आवाज़ की करीब पहुंचते जा रहे थे, मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. किसी मनहूसियत का आभास हो रहा था. मैंने अपने दोस्त को बताया की मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है, तो उसने भी यही बोला की उसको भी कुछ ठीक नहीं लग रहा है. लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था की ऐसा क्यों लग रहा है. हम वही रुक गए जहाँ हम खड़े थे. और बच्ची का नाम लेके उसको पुकारने लगे.
फिर हमने उस रोने की आवाज़ को ध्यान से सुना. हर बार एक ही रोने की आवाज़ आ रही थी – पहले सुबकने की आवाज़ आती, फिर जोर से रोने की आवाज़ आती फिर एक हिचकी सी आती जैसे बच्चे रोते हुए करते हैं. फिर वही शुरू से. ऐसा लगा मानो कोई कैसेट चल रही हो, एक ही आवाज़ बार बार.
जैसे ही हमको ये समझ आया, हमने एक दूसरे की तरफ देखा, और बिना एक शब्द बोले हम पूरी तेजी से वहां से भागने लगे. जिंदगी में पहली बार मैंने अपना आपा ऐसे खोया था. उस जगह बहुत ही मनहूसियत सी थी, और हम सब वो महसूस कर सकते थे. हम में से कोई वहां रुकना नहीं चाहता था. जब हम वापिस अपने बेस पहुंचे तो हमने अपने बाकि साथिओ से पूछा की क्या उनको भी कुछ अजीब आवाज़ सुनाई दी. लेकिन उनमे से किसी को कुछ नहीं सुनाई दिया था. सच बताऊ तो उस केस ने लम्बे समय तक मुझे सदमे में डाल दिया था. जहाँ तक उस बच्ची का सवाल है, उसका कही कोई सुराग नहीं मिला. और खोये हुए मासूम बच्चो की लिस्ट में एक नाम और जुड़ गया था, जिसको हम कभी नहीं ढूंढ पाए.

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दोस्तों इस दुनिया में बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो हमारी समझ से परे हैं. ऐसी ऐसी जगह है जहां इंसान ने आज तक पैर तक नहीं रखा है. बहुत सारी चीजें तो ऐसी हैं जिनको साइंस भी आज तक समझ नहीं पाया है.
सैकड़ों किलोमीटर में फैले जंगल जहाँ इंसान की सोच भी नहीं जा सकती, ऐसी जगहों पर किस किस तरह के रहस्य हो सकते हैं, हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते
हम लोग अपने घर के अंदर बैठकर अपने आप को सेफ महसूस करते हैं, लेकिन क्या पता इस दुनिया में और क्या क्या छुपा हुआ है.
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यह वाला केस ज्यादा डरावना तो नहीं है लेकिन फिर भी आपको बताना चाहता हूं, क्योंकि हमें ऐसे cases भी मिला करते थे. एक बार एक 20 22 साल का यंग लड़का जंगल में घूमने गया था. सर्दियों में. और वहां गायब हो गया.
वह ऐसे समय में जंगल में गया था जबकि किसी को भी जंगल में इतना दूर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि उस टाइम बहुत ज्यादा बर्फ पड़ रही होती है जंगलों में.
ज्यादातर रास्ते तो हम बंद ही कर देते थे अंदर जाने के लेकिन फिर भी कुछ बच ही जाते थे. तो फिर हमने उसको ढूंढने के लिए ऑपरेशन चलाया.
बता दूं कि उस साल कुछ ज्यादा ही बर्फ गिरी थी और जमीन पर 6 फीट मोटी बर्फ जमा हो गई थी. हमें शुरू से ही पता था की इतनी बर्फ में उसको ढूंढना नामुमकिन है और बसंत आने पर ही बर्फ के हटने के बाद ही उसका कुछ पता चल सकता है. और हुआ भी ऐसा ही. बर्फ के हटते ही एक hiker ने रिपोर्ट किया उसको एक बॉडी दिखाई दी है, मेन रास्ते से थोड़ा सा ही दूर.
हमें उसकी लाश एक पेड़ के नीचे मिली थी, पिघली हुई बर्फ के ढेर में. उसकी लाश देखते ही मैं समझ गया था कि उसके साथ क्या हुआ है और उस बात ने मुझे बहुत बेचैन सा कर दिया था.
आप में से जो लोग पहाड़ों पर रहते हैं जहां बहुत बर्फ गिरती है तो आपको भी पता होगा कि मैं क्या बात कर रहा हूं. होता क्या है कि जब बर्फ पड़ती है तो पेड़ो के नीचे बर्फ ज्यादा इकट्ठा नहीं होती, क्योंकि वह ऊपर पेड़ पर ही रह जाती है. तो पेड़ के चारों तरफ एक अलग सी जगह बन जाती है, जहां के बर्फ बहुत हल्की होती है. और एक गड्ढा सा बन जाता है पेड़ के चारों तरफ.
और जिसको इनके बारे में पता नहीं होता वह इनको देख कर पहचान भी नहीं सकते और इनमें फस जाते हैं. हम हर साल लोगों को सावधान रहने के लिए बोर्ड भी लगाते हैं, लेकिन हर साल दो चार लोग फँस ही जाते हैं इनमें.
जहां तक मेरा ख्याल है वह लड़का जंगल में चलते चलते थक गया होगा और थोड़ी देर आराम करने के लिए पेड़ के नीचे गया होगा, यह सोच कर कि वहां बर्फ कम है और उस गड्ढे में फस गया होगा.
उसका सिर नीचे और पैर ऊपर थे. उल्टा लटके लटके वह बहुत तड़पा होगा, सांस लेने के लिए छटपटाया होगा. उसके फेफड़ों में बर्फ भर गई होगी. यह सब सोचकर मैं बहुत बेचैन हो गया था. पता नहीं वह अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों में क्या सोच रहा होगा.
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जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरा ज्यादातर टाइम घने जंगलों में ही बीतता था. तो मुझे कई बार लोग गोटमैन(goatman) के बारे में पूछते थे.
Goatman मतलब ऐसा आदमी या कहें शैतान जिसका चेहरा बकरे जैसा होता है और बाकी का शरीर इंसान जैसा. सच बताऊं तो मुझे खुशी है कि मेरा कभी ऐसे किसी आदमी से सामना नहीं हुआ. हां एक बार एक बिना आंखों वाला आदमी जरूर मिला था लेकिन उसको मैं ठीक से देख नहीं पाया.
लेकिन एक बार मेरे पास ऐसा केस आया जहां इसी से कुछ मिलता जुलता हुआ था मेरे साथ.
हमारे पास एक बार एक कॉल आई कि एक बूढ़ी औरत जंगल में बेहोश हो गई है और उसको बाहर के एरिया में लेकर आना है. तो हम जल्दी से उस जगह पर पहुंचे जो हमको बताई गई थी. वहां पहुंचे तो देखा कि उसका हस्बैंड भी वहीं पर है उसके साथ.
हम को देखते ही वह भाग के हमारे पास आया. उसने बताया कि वह अपनी वाइफ से बस थोड़ा सा ही दूर था और कुछ ढूंढ रहा था और वह उसके पीछे ही थी. कि अचानक उसको उसके चिल्लाने की आवाज आई वह उसके पास पहुंचा तो देखा कि वह बेहोश हो चुकी है.
तो फिर हमने उसको स्ट्रेचर पर लिटाया और बाहर लाने लगे. इसी बीच उसको होश आ गया और वह फिर से चीखने लगी. मैंने उस को शांत किया और उससे पूछा कि क्या हुआ है.
उसने बताया कि वह अपने हस्बैंड के पीछे ही थी, की उसको कोई अजीब सी आवाज सुनाई दी. उसने बताया कि उसको वह आवाज बिल्ली की सी लगी. लेकिन वह बहुत अजीब सी थी. वह थोड़ा पास गई उस आवाज को अच्छे से सुनने के लिए तो उसको लगा कि वह आवाज भी उसके नज़दीक आ रही है. उसने बताया कि जैसे जैसे वह आवाज उसके पास आ रही थी उसको मनहूसियत महसूस हो रही थी और आखिर में उसको पता चल गया कि वह आवाज कहां से आ रही है. वह कोई बिल्ली नहीं थी वह एक आदमी था जो बार-बार बिल्ली की आवाज निकाल रहा था और कोई आवाज नहीं सिर्फ– म्याऊ.. म्याऊ..
लेकिन उसने बताया वह कोई आदमी भी नहीं था वह हो ही नहीं सकता था क्योंकि उसने पहले कभी किसी आदमी को इस तरह की आवाजें निकालते नहीं सुना था.
उसने बताया कि उसको लगा शायद उसकी सुनने की मशीन कान से निकल गई है लेकिन ऐसा भी नहीं था. उसने मशीन को ठीक किया लेकिन वही आवाज आ रही थी वह पास आते जा रहा था लेकिन दिख नहीं रहा था. जैसे जैसे वह पास आ रहा था माहौल में मनहूसियत सी बढ़ती जा रही थी. उसने देखा की झाड़ियों में से कोई परछाई बाहर निकल रही है और यह देखकर वह बेहोश हो गई.
अब जाहिर है यह सुनकर मैं तो बहुत कंफ्यूज हो गया था कि क्यों कोई आदमी एक घने जंगल में लोगों को देख कर बिल्ली की आवाज निकालेगा. इसलिए नीचे बेस में पहुंचते ही मैंने अपने सीनियर से बोला कि मैं एक बार उस एरिया को चेक करना चाहता हूं. मेरे सीनियर ने मुझे परमिशन दे दी. मैंने अपनी वॉकी-टॉकी उठाई और वहां दोबारा पहुंच गया जहां वह औरत बेहोश हुई थी. मुझे वहां कोई नहीं दिखा, इसलिए मैं और आगे 1-2 किलोमीटर चलता रहा मुझे फिर भी कोई नहीं दिखा. तो फिर मैं वापस आने लगा. वापस आते समय मैं उसी रास्ते से वापस आ रहा था जहां से वे लोग वापस आए थे यह सोच कर की शायद मुझे वह जगह दिख जाए जहां से उसने उस आदमी को निकलते देखा था.
उस समय तक सूरज भी ढलने लगा था और अंधेरा छा रहा था. और मैं अंधेरे में इस घने जंगल में अकेला नहीं होना चाहता था. तो मैंने अपने दिमाग से वह बात निकाल दी और सोचा कि कल दिन में फिर से यहां आकर चेक करता हूं. अब जैसे ही मैं नीचे आ रहा था मुझे कुछ दूर कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी. मैं रूका और चिल्लाया कि कौन है, कोई जवाब तो नहीं आया लेकिन वही आवाज फिर से आई, आवाज ना तो तेज हुई ना ही हल्की हुई, लेकिन बिल्कुल ऐसी थी जैसे कोई आदमी बिल्ली की आवाज निकाल रहा हो, तो मैं उस तरफ आगे बढ़ता हूं जिस तरफ से वह आवाज आ रही थी, लेकिन मैं आवाज के पास ही नहीं पहुंच पा रहा था ऐसा लग रहा था कि वह आवाज चारों तरफ से आ रही है. फिर अचानक वह आवाज आनी बंद हो जाती है. मैं कुछ देर वहीँ रुकता हूं लेकिन पता नहीं क्यों दिल से आवाज आती है कि मुझे यहां से निकल जाना चाहिए. उसके बाद में अपने बेस्ट पर वापस आ जाता हूं. उसके बाद मुझे उस एरिया में कभी ऐसी आवाज सुनने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली. मैं उस एरिया में दोबारा भी गया चेक करने के लिए लेकिन कुछ नहीं मिला हो सकता है वह किसी की शरारत हो लोगों को डराने के लिए, लेकिन फिर भी उसने मुझे थोड़ा सा तो परेशान कर ही दिया था.
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इससे पहले मैंने आपको रहस्यमई सीढ़ियों के बारे में बताया था, कि कैसे हम को अक्सर घने जंगलों के बीच में जहां कोई इंसान आ भी नहीं सकता हमें सीढ़ियां रखी मिलती हैं. इन्हीं सीढ़ियों के बारे में मैं आपको और बताता हूं.
यह वाला किस्सा मेरे साथ नहीं बल्कि मेरे एक साथी के साथ हुआ था. मेरे साथी ने भी जब पहली बार वह सीढ़ियां देखी थी तो उसको भी बहुत अजीब लगा था और उसको भी उसके ट्रेनर ने सख्त हिदायत दी थी कि कभी उनके पास मत जाना उनको छूना मत और उनके ऊपर मत जाना. पहले 1 साल तो उसने इन बातों को अच्छे से माना, लेकिन एक बार वह अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सका. और एक बार एक केस के चक्कर में जब वह जंगलों में था तो वह अपनी टीम से थोड़ा सा अलग हो गया उन सीढ़ियों को चेक करने के लिए.
उसने बताया कि वह लोग एक लड़की को ढूंढने के लिए जंगल में गए थे और उसके खोने की जगह से करीब 10 किलोमीटर दूर उसको ढूंढ रहे थे और खोजी कुत्ते उस लड़की की गंध का पीछा कर रहे थे. वह मेन टीम के पीछे अकेला ही था कि उसको अपने बाई ओर सीढ़ियां दिखाई देती है.
उनको देखकर लग रहा था वह किसी नए घर से निकाल कर रखी हो. क्योंकि उन पर बिछी कालीन बिल्कुल सफेद थी. उसने बताया कि जब वह उनके पास पहुंचा तो उसको कुछ भी अजीब सा महसूस नहीं हुआ, ना ही कोई अजीब सी आवाज सुनाई दी. उसको लग रहा था की उनके पास पहुंचते ही कुछ अजीब सा होने लगेगा जैसे कि उसकी नाक और कान से खून निकलने लगेगा या फिर वह बेहोश हो जाएगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
तो उसने पहली सीढी के ऊपर पैर रखा. उसने बताया कि उन सीढ़ीओ के बारे में जो चीज उसको सबसे अजीब लगी वह थी कि वह सीढ़ियां बिल्कुल साफ थी. उन पर किसी तरह की कोई धूल नहीं थी. ना ही कोई पत्ता गिरा था.
जबकि वह बीच घने जंगल में रखी थी और ना ही कोई गिलहरी या किसी दूसरे जानवर के पैरों के निशान उस पर थे जो की बहुत ही अजीब था.
उसने उन सीढ़ियों को हाथ लगाया लेकिन उसको कुछ अलग सा नहीं लगा. उसने अपनी वॉकी-टॉकी चेक की, कि वह ऑन तो है और फिर वह उन सीढ़ियों के ऊपर चढ़ गया. ऊपर चढ़ते हुए उसको बहुत डर लग रहा था क्योंकि जिस तरह की बातें उन सीढ़ीओ के बारे में करी जाती थी उसको लगा पता नहीं क्या हो जाएगा उसके साथ.
वह मज़ाक मज़ाक में मुझे बता रहा था कि उसको लगा कि या तो वह गायब हो कर किसी दूसरी दुनिया में पहुंच जाएगा या फिर कोई दूसरे ग्रह का प्राणी वहां आकर उसको पकड़ लेगा. लेकिन उस वक्त ऐसा कुछ नहीं हुआ, फिर वह सीढ़ियों के ऊपर पहुंच गया. उसने बताया कि जब वह सीढ़ियों के बिल्कुल ऊपर खड़ा था और चारों तरफ देख रहा था तो उसको ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो वह कुछ बहुत, बहुत गलत कर रहा है.
उसको ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई अभी आकर उसको पकड़ लेगा और उसको पीछे से गोली मार देगा किसी भी पल.
लेकिन उसने उन सब खयालो को वहम समझकर दिमाग से निकालना चाहा. लेकिन वह जितनी देर वहां खड़ा हो रहा था वह डर वाली फीलिंग बढ़ती जा रही थी. अचानक उसने महसूस किया कि उसको आसपास की जंगल की कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही है. यहां तक कि वह अपनी खुद की सांसें भी नहीं सुन पा रहा था. वह जल्दी से नीचे उतर आया.
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लेकिन सबसे अजीब बात तो बाद में हुई उसने बताया कि शाम को जब वह अपने बेस वापस पहुंचा तो उसके सुपरवाइजर ने उसको अकेले में बुलाया. उसने बताया कि उसका सुपरवाइजर उसको बहुत ही गुस्से से देख रहा था. उसने अपने सुपरवाइजर से पूछा “क्या हुआ?”
“तुम उनके ऊपर गए थे ना” सुपरवाइजर ने गुस्से से पूछा.
उसने अपने सुपरवाइजर से पूछा कि उसको कैसे पता चला कि वह ऊपर गया था सुपरवाइजर ने अपना सिर झटकते हुए गुस्से से कहा-“क्योंकि वह लड़की हमको नहीं मिली और हमारे कुत्तों ने भी उसकी गंध खो दी”
मेरे दोस्त ने हैरानी से पूछा कि इन सब बातों का उसके ऊपर जाने से क्या मतलब है.
सुपरवाइजर ने उससे पूछा कि वह कितनी देर तक ऊपर था. उसने बताया बस दो-तीन मिनट.
उसके सुपरवाइजर ने उसको बहुत गुस्से से देखा जैसे कि वह अभी उठ कर उसको मारेगा और वह उसको गुस्से से बोला कि आज के बाद अगर वह उनके आसपास भी चला गया तो वह उसकी नौकरी का आखरी दिन होगा.
यह बोलकर उसका सुपरवाइजर वहां से चला गया.
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जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था कि मेरे पास आने वाले लगभग आधे केसेस खोए हुए लोगों के ही हुआ करते थे. जहां पर कि खोने वाले शख्स का कोई नामोनिशान तक नहीं मिलता था. ज्यादातर केसेस में होने वाला शख्स अगर कुछ ही घंटों में नहीं मिलता तो या तो वह कभी मिलते ही नहीं या फिर ऐसी जगहों पर मिलते जहां उनके होने का कोई मतलब ही नहीं होता. जैसे कि उनके खोने की जगह से सैकड़ों किलोमीटर दूर .
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एक केस मुझे याद है, एक 5 साल का mentally challanged बच्चा, जो कि खो गया था.
वह छोटा लड़का एक पिकनिक वाली जगह से गायब हो गया था. मेंटली चैलेंज्ड होने के साथ-साथ वह बच्चा अपाहिज भी था. और उसके मां-बाप हम को बार-बार समझा रहे थे कि वह बच्चा खुद से कहीं जा ही नहीं सकता और जरूर उसको किसी ने गायब किया है.
हमने उस बच्चे को कई हफ्तों तक ढूंढा उसके खोने की जगह से कई कई किलोमीटर दूर तक लेकिन उसका कोई नामोनिशान नहीं मिला.
यहां तक कि हमारे कुत्तों को भी उसकी कोई गंध नहीं मिली. उस पिकनिक एरिया से भी नहीं जहां से वह गायब हुआ था . ऐसे जैसे मानो कि वह लड़का कभी वहां आया ही ना हो. मां बाप पर भी शक गया लेकिन मां-बाप की हालत देखकर ऐसा नहीं लगा कि वह अपने मासूम बच्चे के साथ ऐसा कुछ गलत कर सकते हैं.
करीब 1 महीने बाद उसको ढूंढना बंद कर दिया गया. और कुछ टाइम बाद तो हम उसको भूल ही चुके थे.
कुछ महीनों बाद हम एक ऊंची पहाड़ी पर बर्फ में ऑपरेशन चलाने की ट्रेनिंग ले रहे थे कि अचानक कुछ दूर मुझे बर्फ में कुछ अजीब सा दिखाई देता है. जब मैं पास पहुंचता हूं तो मैं देखता हूं कि वह एक शर्ट है. जमी हुई और बर्फ में आधी बाहर निकली हुई. उस शर्ट का कलर और डिजाइन देख कर मैं तुरंत पहचान गया कि यह उसी बच्चे की शर्ट है.
और उसके करीब 20 कदम दूर ही हमें उस बच्चे की लाश मिलती है. आधी बर्फ में फंसी हुई.
उसको देख कर लग रहा था कि यह मुश्किल से दो-तीन दिन पुरानी लाश है. जबकि उस बच्चे को खोए हुए कई महीने हो चुके थे. जब हमने बॉडी को बाहर निकाला तो देखा कि बच्चा किसी चीज से लिपटा हुआ है. हमने बर्फ हटाकर ठीक से देखा तो हमें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. वह एक बड़ी बर्फ का टुकड़ा था जो कि बिल्कुल किसी इंसान की शेप में था. बच्चे ने उस बर्फ के टुकडे को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उसके हाथ और पैर उस बर्फ से चिपक गए थे.
मैंने वॉकी टॉकी पर अपनी टीम को वहां बुलाया और बॉडी को निकाला. सच बताऊं तो एसा बिल्कुल हो ही नहीं सकता था कि वह बच्चा अपने खोने की जगह से 70 किलोमीटर दूर चल कर उस जगह पहुंचा हो. क्योंकि वह चल भी नहीं सकता था. ऊपर से पोस्टमार्टम में पता चला की उसका पेट बिल्कुल खाली था यहां तक कि पानी भी नहीं था. यह सब बिल्कुल ऐसा था कि मानो किसी ने बच्चे को धरती से अचानक गायब कर दिया और फिर कुछ महीनों बाद उसको बर्फीले पहाड़ पर छोड़ दिया ठंड से मरने के लिए.
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यह अगला केस जो बताने जा रहा हूं यह मेरी रिटायरमेंट के कुछ दिन पहले का ही है. हम जंगल के एक इलाके में गश्त करने गए थे क्योंकि वहां पिछले कुछ दिनों में हमें कुछ तेंदुआ के होने की कई रिपोर्ट मिली थी.
जंगल में लोगों को ढूंढने के अलावा हमारा एक काम यह भी होता था कि कोई जंगली जानवर उन जगहों पर ना जा पाएं जहां की लोग आते हैं. जब हमें ऐसा कोई इलाका मिलता है तो या तो हम उसको बंद कर देते हैं या फिर वहां लोगों को नहीं आने देते.
तो उस बार की बात बताऊं तो वापस आते समय मैं अकेला ही था. उस जगह बहुत ही घना जंगल था. दिन छुपने वाला था कि दूर मुझे किसी औरत के चीखने की आवाज सुनाई देती है. जैसा कि आपको पता होगा कि कई बार तेंदुए भी ऐसे ही आवाज निकालते हैं जैसे कि कोई औरत बहुत दर्द में हो और जोर से चीख रही हो. थोड़ा अटपटा सा तो लगा लेकिन कुछ खास डर नहीं लगा .
मैंने अपने बेस पर फोन किया और अपने सीनियर को बताया कि मैंने तेंदुए की आवाज सुनी है. और मैं उसी तरफ आगे बढ़ रहा हूं यह पता करने के लिए कि वह किस इलाके में है. उसके बाद मैंने दो तीन बार फिर वही चीख सुनी. हर बार बिल्कुल उसी जगह से जहां से वह पहली बार आई थी. और मुझे पक्का यकीन हो गया था कि तेंदुआ उसी जगह है.
फिर मैं वापस बेस पर जाने लगा. जैसे ही मैं वापस जाने के लिए पलटा मैंने फिर से एक तेज चीख सुनी. इस बार यह चीख मुझसे कुछ कदम दूर से ही आई थी. जाहिर है मैं डर गया और जल्दी जल्दी से वहां से निकलने लगा. मैं नहीं चाहता था कि कोई भूखा तेंदुआ मुझे पकड़कर अपनी भूख शांत कर ले. जैसे-जैसे मैं आगे जा रहा था वह चीखने की आवाज मेरे पीछे से आए जा रही थी. मैं भागने लगा. जब मैं अपने बेस के करीब 1 किलोमीटर नजदीक पहुंचा तो वह चीखने की आवाज बंद हो गई
मैंने पलट के देखना चाहा कि अभी भी कोई चीज मेरे पीछे है क्या. उस समय तक अंधेरा हो चुका था. और मैंने देखा कि थोड़ी सी दूर एक पेड़ के पास एक परछाई सी दिखाई देती है.
जो कि किसी आदमी की परछाई दिखाई पड़ती है. मैं जोर से उसको आवाज़ लगाता हूं कि जंगल में घूमने का टाइम खत्म हो गया है और वह अपने घर चला जाए. वह परछाई वहीं खड़ी रहती है. मैं उस परछाई के पास जाता हूं और उस परछाई के करीब 10 कदम दूर पहुंचते ही वह परछाई लंबे-लंबे कदम बढ़ाकर मेरी तरफ बढ़ती है और वही चीखने की आवाज निकालती है. बस वह देखते ही मैं पलट के जोर से भागता हूं अपने बेस की तरफ बिना पीछे देखें.
थोड़ी देर बाद वह चीखने की आवाज वापस जंगल की तरफ जाती सुनाई देती है.
मैंने यह बात आज तक किसी को नहीं बताई. यहां तक कि अपने साथियों को भी बस तेंदुए की आवाज के बारे में ही बताया था.
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मैंने अपने कैरियर में बहुत सारे लोगों के साथ काम किया है. और एक साथ काम करते-करते आपस में दोस्ती भी हो जाया करती थी. और कई बार जब हम लोग खाली होते थे तो आपस में एक दूसरे के डरावने किस्से सुनते थे.
आगे की कुछ कहानियां मेरे दोस्तों की बताई हुई है.
मेरी एक अच्छी दोस्त हुआ करती थी उसका नाम था KD.
हालांकि वह मुझसे 15 साल जूनियर थी लेकिन फिर भी वह अपने काम में बहुत तेज थी. और उसको हमारे डिपार्टमेंट के सबसे बेस्ट ऑफिसर्स में से जाना जाता था. हम दोनों ने बहुत सारे cases पर एक साथ काम किया था और उसने अपने कई किस्से मुझे सुनाए थे. उनमें से चार किस्से मैं आपको बताता हूं.
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हम लोगों को ज्यादातर समय जंगलों और पहाड़ों पर ही गुजरता था. और ऐसी जगहों पर कोई खतरनाक हादसा होने के बहुत ही ज्यादा चांसेस होते थे. KD ने बताया कि कुछ साल पहले पहाड़ों पर बहुत ज्यादा बर्फ पड़ी थी. उस साल इतनी ज्यादा बर्फ पड़ी थी कि हर दूसरे दिन 2 फुट बर्फ जमा हो जाती थी रास्तों पर. लोगों को वार्निंग भी दी जाती थी पहाड़ों की तरफ ना जाने के लिए लेकिन फिर भी कोई ना कोई ऐसा निकल ही जाता था जो वार्निंग पर ध्यान ही ना दे.
उसने बताया कि उसी टाइम उनके पास एक बहुत ही भयानक केस आया था जिसमें एक पूरी फैमिली ही खत्म हो गई थी उनके पापा की गलती से. बार-बार दी गई वार्निंग को ना सुनकर भी वह अपने परिवार को पहाड़ों पर ले गया बर्फ में मस्ती करने के लिए. वह लोग बर्फ पर खेल रहे थे और KD के हिसाब से खेलते खेलते वह ऐसी बर्फ पर चले गए जो दिखने में तो मजबूत लग रही थी लेकिन नीचे से खोखली थी. अचानक से सारी बर्फ ढह गई. और वह लोग नीचे 300 फ़ीट खाई में जा गिरे. नीचे सीधा पत्थरों पर गिरे थे. तो मां-बाप और एक बच्चा तो वहीँ गिरते ही मर गए, लेकिन दो बच्चे बच गए. एक का सिर्फ एक पैर टूटा था और कुछ पसलियां टूटी थी जबकि दूसरे बच्चे को सिर्फ कुछ खरोंचे ही आई थी. तो वह बच्चा जिस को चोट नहीं लगी थी वह अपने भाई को वहीं छोड़ कर आगे चला गया, यह सोच कर की शायद कुछ मदद मिल जाए.
KD ने बताया कि वह मुश्किल से आधा किलो मीटर दूर ही गया होगा की तूफान की चपेट में आ गया. वह शायद तूफान से बचने के लिए यह कुछ देर आराम करने के लिए वहां रुक गया होगा, लेकिन बच नहीं पाया. बच्चा ठंड में जम गया और मर गया. KD की टीम जब उस फैमिली को ढूंढने गई तो उनको आसानी से वह फैमिली मिल गई, क्योंकि कुछ लोगों ने उस फैमिली को जाते हुए देखा था पहाड़ों के उस तरफ. और वह बच्चा जो मदद के लिए आगे गया था वह भी सबसे पहले KD को ही मिला था. KD ने बताया कि जब वह बच्चे को ढूंढ रही थी तो उसको कुछ दूर पत्थर पर कोई बैठा हुआ दिखाई दिया. वह जल्दी से भागकर उसके पास पहुंची. KD ने बताया कि उसके पास पहुंचते हुए उसको दिख गया था कि वह कोई बच्चा है और यह भी कि वह मर चुका है. और उसकी मौत बहुत दर्दनाक थी. उसने बताया कि बच्चा सीधा बैठा हुआ था. उसके घुटने उसकी छाती पर लगे हुए थे और दोनों हाथों से उसने अपने पैरों को जकड़ा हुआ था जैसे कि ठंड से बचने के लिए सिकुड़ कर बैठा हो. उसके कोट के कॉलर खड़े थे और उसने अपना सर अपने कोट की कॉलर्स में छुपाया हुआ था. KD ने बताया कि जब उसने कॉलर को हटाया बच्चे का चेहरा देखने के लिए तो उसने देखा कि मरते हुए बच्चा रो रहा था. उसका चेहरा बहुत डरा हुआ था और उसकी आंखों में आंसू थे जो की जम चुके थे. मरते समय बच्चा बहुत ज्यादा डरा हुआ था और रो रहा था, और ठंड में ठिठुरते हुए उसकी मौत हो गई.
एक मां होने के नाते KD की भी आंखों से आंसू आ गए उस बच्चे का चेहरा देखकर.
वह बार-बार उनके पापा को कोस रही थी उन मासूम बच्चों की मौत के लिए.
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दूसरी कहानी जो KD ने मुझ को बताई थी वह तब की थी जब वह नई-नई ही थी इस डिपार्टमेंट में. उसने बताया कि उनकी टीम को एक रिपोर्ट मिली थी एक पुराने हाईकर(hiker) के वापस ना आने की. उस हाईकर की वाइफ को यकीन था कि जरूर उसके साथ कुछ बहुत बुरा हुआ है क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ था कि वह टाइम पर वापस ना आया हो. तो KD की टीम उसको ढूंढने के लिए गयी और उनको कुछ बेहद मुश्किल पहाड़ियां चढ़नी पड़ी थी उस जगह पर पहुंचने के लिए. KD ने बताया कि जब वह लोग ऊपर पहुंचे तो वह एक फ्लैट इलाका था. कुछ दूर आगे चलते ही उनको बर्फ पर खून दिखाई देता है. वह लोग उस रास्ते पर आगे बढ़ते हैं जहां जहां खून पड़ा होता है. आगे बढ़ते हुए उनको कुछ मांस के टुकड़े भी पड़े हुए दिखाई देते हैं. लेकिन उनको देखकर बता पाना मुश्किल था कि यह मांस शरीर के कौन से हिस्से का है. लेकिन जैसे जैसे वे लोग आगे बढ़ते हैं उनको और मांस के टुकड़े मिलते जाते हैं बर्फ में. और आखिर में उनका पीछा करते-करते वह एक गुफा में पहुंचते हैं. अंदर उनको वह Hiker पड़ा हुआ मिलता है.
KD ने बताया कि वहां इतना सारा खून था जितना उसने अपनी जिंदगी में नहीं देखा. हाईकर मुंह के बल नीचे पड़ा होता है, ऐसा मानो कि उसकी मौत रेंगते रेंगते हुई हो. वह पास जाकर ध्यान से देखती है तो दिखता है कि उसका पेट फटा हुआ है और अंदर की सारी अंतड़ियां बाहर लटक रही है. आसपास उनको कुछ बहुत बड़े पैरों के निशान भी दिखाई देते हैं जैसे किसी भालू या किसी और बड़े जानवर के हूं. लेकिन ऐसा नहीं हो सकता था कि उसको किसी जानवर ने मारा हो क्योंकि पहली बात तो उनको वहां किसी जानवर के होने की कोई रिपोर्ट नहीं आई थी, दूसरी अगर किसी जानवर ने उसको मारा होता तो उस को खाया भी होता. लेकिन उसके शरीर का कोई हिस्सा खाया नहीं हुआ था. सिर्फ पेट फटा हुआ था. ऐसा लग रहा था कि मानो किसी ने उसके पेट में हाथ डाला और पेट को फाड़ दिया. उसके साइड में एक कुल्हाड़ी भी पड़ी हुई थी. जिसकी मदद से बर्फ पर चढ़ा जाता है. और उस पर भी खून लगा हुआ था. पहले तो सबको यही लगा की शायद वह उस कुल्हाड़ी की मदद से ऊपर चढ़ रहा होगा और ऊपर चढ़ते हुए फिसल गया होगा और नीचे गिरते ही उसकी कुल्हाड़ी उसके पेट में घुस गई होगी. और वह रेंगते रेंगते उस गुफा तक पहुंचा होगा. यह थ्योरी बिल्कुल ठीक बैठ रही थी सिवाय एक सवाल के, कि वह पैरों के निशान किसके थे. इस का कभी कोई जवाब नहीं मिला.
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मैंने KD से पूछा कि कोई ऐसा किस्सा सुनाओ जिसमें कोई बिल्कुल गायब ही हो गया हो.
सुनते ही वह हंस पड़ी और बोली- डरोगे तो नहीं ?
मैंने कहा -नहीं, सुनाओ.
उसने बताया कि उसकी शुरूआत के ही दिनों में उसको एक केस मिला था जो कि मीडिया में भी बहुत पॉपुलर हुआ था. उसने बताया कि एक फैमिली जंगल में गई थी पिकनिक मनाने के लिए. वह लोग मेन एंट्रेंस के पास ही बेर(berries) तोड़ रहे थे. फैमिली में दो छोटे लड़के थे. दोनों की उम्र 5 साल से कम ही थी.
दिन का ही समय था और बेर तोड़ते हुए ही एक बच्चा गायब हो गया.
बच्चे को ढूंढने के लिए बहुत ही बड़ा ऑपरेशन चलाया गया. लेकिन बच्चे का कहीं कोई नामोनिशान नहीं मिला. यहां तक कि कुत्तों को भी बच्चे की कोई गंध नहीं मिली. यह भी उन्ही cases जैसा ही था, जहां लग रहा था कि बच्चा वहां गया ही नहीं.
बच्चे को करीब 2 महीने ढूंढा गया लेकिन बच्चा नहीं मिला. न ही बच्चे की कोई लाश मिली. आखिर में केस बंद कर दिया गया.
करीब 6 महीने बाद वही फैमिली एक मेमोरियल पर फूल चढ़ाने के लिए आती है जो कि उसी खोए हुए बच्चे की याद में बनाया गया था. वह अपने दूसरे लड़के को साथ लाते हैं. जैसे ही मां बाप फूल चढ़ा रहे होते हैं छोटा लड़का उनके पीछे ही खड़ा होता है. और इन्ही 2-3 सेकेंड्स में वह भी गायब हो जाता है. ऐसे जैसे की हवा में गायब हो गया हो. अब जाहिर है कि मां बाप का रो रो कर बुरा हाल था. एक बच्चे को खोने का दर्द क्या काम था कि उनका दूसरा बच्चा भी गायब हो जाता है. बहुत ही बड़ा ऑपरेशन चलाया गया उस बच्चे को ढूंढने के लिए. इतना बड़ा जितना कि हमारे स्टेट में किसी को ढूंढने के लिए पहले कभी नहीं चलाया गया था. करीब 300 लोगों को काम पर लगाया जाता है पार्क का एक-एक इंच खोजने के लिए. लेकिन फिर से वही.
बच्चे का कहीं कोई निशान नहीं मिला. ऑपरेशन करीब एक हफ्ता चला उसके खोने की जगह से 10-20 किलोमीटर दूर दूर तक. फिर 1 दिन करीब 2 हफ्ते बाद एक वॉलंटियर(volunteer) को दूसरा बच्चा मिल जाता है. उसके खोने की जगह से करीब 20 किलोमीटर दूर. वॉलंटियर ने बच्चे की खबर देने के लिए हमारे रेडियो फोन पर कॉल किया.
हम सब को लगा कि बच्चे की डेड बॉडी मिली होगी. लेकिन वॉलंटियर ने बताया कि ना सिर्फ बच्चा जिंदा है बल्कि बिल्कुल अच्छी हालत में है. KD और उसकी टीम बच्चे को लेने के लिए जाते हैं. और वहां पहुंचकर जब वह बच्चे को देखते हैं तो उनको अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं होता कि यह वही बच्चा है जो इतने दिनों से गायब है. उसके कपड़े बिल्कुल साफ थे. मिट्टी का एक कतरा तक नहीं था. यहां तक कि बच्चा बिल्कुल डरा हुआ भी नहीं था. वॉलंटियर ने बताया कि जब उसको वह बच्चा मिला तब वह एक बड़े लक्कड़ के ऊपर बैठा हुआ था और एक घास की बनी बॉल से खेल रहा था, जिसको की किसी पुरानी रस्सी से बांधा हुआ था.
KD ने बच्चे से पूछा कि वह 2 हफ्ते तक कहां था और किसके साथ था. बच्चे ने बताया कि वह धुंधले आदमी के साथ था.
KD हैरान होकर उससे पूछती है –“कौन धुंधला आदमी? क्या उसके चेहरे और शरीर पर बाल थे”
बच्चा कहता है नहीं उसके शरीर पर कोई बाल नहीं था वह धुंधला आदमी था. जैसे की हम थोड़ी थोड़ी आंख खोलकर देखते हैं तो हमको सब blurry या धुंधला दिखाई देता है बिल्कुल वैसा.
बच्चे ने बताया कि वह आदमी जंगल में से आया और उसका हाथ पकड़कर उसको अपने साथ घने जंगल में ले गया. बच्चे ने बताया कि वह एक पेड़ के अंदर सोता था जो कि अंदर से खोखला था और वह धुंधला आदमी उसको खाने के लिए बेर दिया करता था. KD ने हैरान होकर पूछा कि क्या वह आदमी डरावना था क्या वह तुम को मारता भी था ??
बच्चे ने बताया नहीं नहीं वह मुझे बिल्कुल परेशान नहीं करता था और डरावना भी नहीं था. बस उसको उसका चेहरा पसंद नहीं था क्योंकि उसकी आंखें नहीं थी.
केडी ने बताया कि उसके बाद वह उसको हेडक्वार्टर ले जाते हैं जहां से कि एक पुलिसवाला बच्चे को अपने साथ ले जाता है उसके गायब होने की पूछताछ करने के लिए. वह पुलिसवाला भी KD का ही दोस्त था और उसने KD को बताया कि बच्चा यही बता रहा था कि कोई धुंधला आदमी उसको अपने साथ जंगल में ले गया जहां वह एक पेड़ के अंदर रहता था. और जब भी उसको भूख लगती तो वह आदमी उसको खाने के लिए बेर दे देता. वह धुंधला आदमी बच्चे को खेलने भी देता, लेकिन बस थोड़ी ही दूर तक. और अगर बच्चा दूर चला जाता तो वह बहुत गुस्सा करता और जोर से चिल्लाता, वह भी बिना मुंह के. बच्चे ने बताया कि रात में अगर उस को अंधेरे में डर लगता तो वह आदमी रात में भी रोशनी कर देता और उसको घास से बनी बॉल देता खेलने के लिए. बच्चे ने बताया कि वह धुंधला आदमी उसको अपने साथ रखने वाला था. लेकिन उसने उसको छोड़ दिया क्योंकि वह वैसा नहीं था जैसा उसको चाहिए था. किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि बच्चा क्या बात कर रहा है. बच्चे ने बताया कि उसको उसके भाई के बारे में कुछ नहीं पता और उसके भाई को कभी उसने देखा भी नहीं उसके खोने के बाद. उसके भाई की भी उसके बाद कभी कोई खबर नहीं मिली.
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आखिरी कहानी KD ने जो मुझे बताई वह तब की थी जब वह नयी नयी थी इस डिपार्टमेंट में. और अपने ग्रुप से अलग हो गई थी. हुआ यूँ कि वह अपने ग्रुप के साथ एक जंगल में गई थी एक ट्रेनिंग के लिए और उसी बीच लंच ब्रेक के दौरान अपने ग्रुप से थोड़ा सा दूर चली गई क्योंकि उसको टॉयलेट जाना था. टॉयलेट करके वह अपने ग्रुप के पास जाने लगती है. उसने बताया कि वह बस 5 6 फीट आगे बढ़ी थी कि वह रास्ता भूल जाती है. और उसको याद ही नहीं रहता कि वह कहां निकल गई है. और उसको बिलकुल भी पहचान नहीं आ रहा था कि वह किस जगह पर है. ऐसे जैसे कि उसकी याददाश्त चली गई है. तो थोड़ी देर के लिए वहां खड़ी हो जाती है ओर सोचती है कि वह कहां है और अब उसे क्या करना है. लेकिन वह जितनी ज्यादा देर वहां खड़ी होती है उसकी कंफ्यूजन बढ़ती जाती है. इसीलिए वह फिर से चलना शुरु कर देती है. वह एक दिशा पकड़ लेती है और उसी तरफ आगे बढ़ती जाती है. लेकिन एक पॉइंट के बाद उसको लगता है कि उसको तो कुछ याद ही नहीं आ रहा है यहां तक कि उसको यह भी समझ नहीं आ रहा था कि वह इतने घने जंगल में कर क्या रही है. KD ने बताया–” मैं चलती जाती हूं और फिर मुझको अपने सर के अंदर से कोई आवाज सुनाई देती है. बहुत हल्की हल्की सी. और वह आवाज मुझे बार-बार कह रही थी. कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा. बस तुम कुछ खा लो, खा लो, खा लो. तो मैं अपने चारों तरफ कुछ खाने के लिए ढूंढने लगती हूं और कसम से मुझे अपनी जिंदगी में कभी इतनी भूख नहीं लगी थी जितनी उस वक्त लग रही थी. सच बताऊं तो मैं उस समय इतनी भूखी थी कि मेरे सामने कुछ भी होता तो मैं उसे खा लेती.
मुझे वक्त का कोई अंदाजा ही नहीं रह गया था, इसीलिए मुझे यह भी नहीं पता था कि मैं वहां कितनी देर तक थी. तभी मुझे कुछ दूर से एक असली आवाज आती सुनाई देती है. मैं आगे बढ़ती हूं तो देखती हूं कि मेरी ही टीम का साथी मुझे ढूंढ रहा है. वह बहुत ज्यादा डरा हुआ था. वह मेरी तरफ भाग कर आता है और मुझ से पूछता है कि क्या मैं ठीक हूं, और मैं वहां क्या कर रही हूं.
और सबसे अजीब बात मैं आपको बताऊं तो जब वह मेरी तरफ भाग के आ रहा होता है तो मेरा दिल कर रहा होता है कि मैं अपना चाकू निकालूं और उसको मार कर खा लूँ. पता नहीं क्यों मुझे और कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. सिर्फ यही लग रहा था कि किसी तरह अपनी भूख शांत कर लूं. वह मुझे मेरा चाकू निकालते हुए देखता है तो एकदम से पीछे हो जाता है. और मुझ पर जोर से चिल्लाता है. उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर मानो मैं नींद से जाग जाती हूं. मैं अपने चारों तरफ देखती हूं तो मुझको याद आता है की मैं कहाँ हूँ. मैं अपने साथी से पूछती हूं कि मैं कितनी देर से बाहर हूं. मुझे लगा वह बोलेगा की कोई 1- 2 घंटों से. लेकिन वह बताता है कि मैं 2 दिन से गायब हूं. मैं दो पहाड़ियां चढ़ चुकी हूं और पहाड़ के दूसरी तरफ पहुंच चुकी हूं. मैं करीब 300 किलोमीटर दूर पैदल चल चुकी थी और अगर मैं आगे भी चलती जाती तो शायद वह मुझे कभी ढूंढ भी नहीं पाते. उन सब को लगा कि मैं मर चुकी हूं.
मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. मेरे लिए तो मानो जैसे वक्त बिलकुल रुक सा गया था. मेरा साथी मुझको पिकअप पॉइंट पर ले जाता है जहां मुझे हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट करवाकर हॉस्पिटल ले जाया जाता है. हॉस्पिटल में तमाम तरह के टेस्ट कराए जाते हैं यह पता लगाने के लिए कि मुझे क्या हो गया था. टेस्ट में कुछ पता नहीं लगता. सब को लगता है कि शायद मुझे किसी तरह का कोई दौरा आया और मैं सब भूल गई कुछ देर के लिए. लेकिन सच्चाई यही है कि किसी को भी, यहां तक कि मुझे भी नहीं पता था कि मुझे क्या हुआ था. लेकिन सच बताऊं तो उस दिन के बाद मैं जंगल में कभी अकेली नहीं गई. मेरे दोस्त कई बार मेरा मजाक भी उड़ाते थे इस बात को लेकर. लेकिन टॉयलेट करने के लिए किसी को साथ ले जाना अच्छा है बजाय इसके कि मैं कभी वापस ही ना आऊं.
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मेरा एक और बहुत अच्छा दोस्त था. उसका नाम है एडवर्ड. यह काल्पनिक नाम है क्योंकि मैं उसका असली नाम सबके सामने नहीं बताना चाहता. एडवर्ड एक ट्रेनर हुआ करता था लेकिन बाद में वह EMT में चला गया था. EMT मतलब इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट.
अभी तो वह भी नौकरी छोड़ चुका है मेरी तरह, लेकिन फिर भी कई बार जब जरूरत पड़ती है तो हम जैसे पुराने ऑफिसर्स को भी बुला लिया जाता है ऑपरेशन में.
एडवर्ड को खोए हुए बच्चे ढूंढने में महारत हासिल थी. पता नहीं कैसे उसको पता चल ही जाता था कि बच्चे किस तरफ गए हैं. इस काम में तो उसको उस्ताद ही माना जाता था. एक बार वह मेरे घर आया था डिनर के लिए. तो खाना खाते हुए हम एक दूसरे को अपनी अपनी कहानियां सुनाने लगे. उसकी ज्यादातर कहानियां नॉर्मल ही थी. तो मैंने उससे बोला कि कुछ ऐसी कहानियां सुनाओ जहां कुछ अजीब हुआ हो.
मैंने उसको सीढ़ियों के बारे में बताया कि एक बार मेरा एक दोस्त उनके ऊपर चला गया था. यह बात सुनकर एडवर्ड चुप हो गया. फिर उसने मुझसे पूछा कि क्या तुमने उस बच्चे की कहानी सुनी है जो कुछ साल पहले एक पार्क से गायब हो गया था?? मैंने कहा नहीं मुझे मुझे तो नहीं पता.
उसने मुझे पूरी कहानी सुनाई.
वह लोग एक खोज 11 साल के लड़के को ढूंढ रहे थे. वह बच्चा एक नदी किनारे से गायब हो गया था. सबसे पहले तो सबको यही लगा की शायद बच्चा नदी में गिर गया होगा और डूब के कहीं दूर बह गया होगा. लेकिन जब खोजी कुत्तों को बुलाया गया तो वह उन्हें नदी से दूर घने जंगल में ले गए. जंगल के जिस इलाके में कुत्तों को गंध मिल रही थी वह बहुत ही ज्यादा घना था. तो उन लोगों ने कुछ टीम्स बनाई और उस इलाके का चप्पा चप्पा छानने लगे. आगे बताने से पहले आप लोगों को बता दू कि जब भी हम टीम्स बनाकर ढूंढते हैं तो जिस भी जगह को हमें ढूंढ़ना होता है हम उस इलाके को छोटे-छोटे हिस्सों में डिवाइड कर लेते हैं. जिससे कि कोई भी जगह ना छूट जाये. तो जब वह लोग वहां ढूंढ रहे थे तो उनको बच्चे के वहां आने के निशान मिलने लगे. लेकिन उनको बहुत ही अजीब सा पेटर्न दिखाई दे रहा था बच्चे के वहां होने का. जैसे कि एक हिस्से में कुत्तों को गंध मिलते तो उसके अगले हिस्से में वह गंध खो देते. फिर उसको अगले हिस्से में फिर से गंध मिल जाती है तो अगले हिस्से में फिर से खो देते. सब कंफ्यूज से थे कि ऐसा कैसे हो सकता है. जैसे शतरंज के बॉक्स होते हैं ना. एक बॉक्स में गंध मिलती तो अगले बॉक्स में गायब हो जाती फिर अगले में फिर से मिल जाती. ऐसा लग रहा था मानो बच्चा उछल-उछलकर आगे गया हो. लेकिन वह तो हो ही नहीं सकता था इस घने जंगल में.
एडवर्ड आगे बढ़ ही रहा था कि अचानक उसको करीब 50 फीट दूर सीढ़ियां दिखाई देती हैं. वह तुरंत अपने साथी को बताता है. और उसको आगे चलकर उन सीढ़ीओ को चेक करने के लिए बोलता है. लेकिन उसका साथी साफ साफ मना कर देता है. वह एडवर्ड को साफ बोल देता है कि वह कभी उन सीढ़ियों के पास नहीं जाएगा. वह एडवर्ड से कहता है तुम चाहो तो वहां जाकर चेक कर सकते हो लेकिन मैं नहीं जाऊंगा. मैं यही खड़ा होकर तुमको देखता हूं. एडवर्ड को गुस्सा तो आता है लेकिन उसको भी पता था कि उनको उन सीढ़ियों के पास जाने की सख्त मनाही थी. इसलिए वह अपने साथी को फ़ोर्स भी नहीं करता. और अकेले ही सीढ़ियों की तरफ बढ़ता है. एडवर्ड ने बताया कि वह सीढ़ियां छोटी थी. आमतौर पर जैसी बेसमेंट में होती है ना वैसी ही. और उनकी तरफ बढ़ते हुए उसको कोई डर भी नहीं लग रहा था. एडवर्ड ने बताया –“उनके करीब पहुंचते ही मैं देखता हूं कि सबसे नीचे वाली सीढ़ी में कुछ रखा हुआ है, कुछ लिपटा हुआ. यह देखते ही मेरे दिल में डर सा आ जाता है. मैं बार-बार सोच रहा था कि सब कुछ ठीक हो और बच्चा सही सलामत मिल जाए. हमें पूरी उम्मीद भी थी कि बच्चा सही सलामत मिल जाएगा क्योंकि उसको खोए हुए कुछ घंटे ही हुए थे. लेकिन थोड़ा और करीब पहुंचते ही मैं समझ गया था कि यह वही बच्चा है और यह भी कि वह अब जिंदा नहीं है. उसको देखने से ही पता चल रहा था कि मरते समय वह भयंकर दर्द से गुजरा था. लेकिन मुझे वहां बिल्कुल भी खून नहीं दिखाई दिया. हां उसकी थोड़ी और होंठ पर थोड़ा सा खून जरूर लगा था. मैंने अपने बाकी साथियों को रेडियो पर कॉल किया और वहां बुलाया. फिर हमने उसकी बॉडी को वहां से निकाला. बच्चे के परिवार का रो रो कर बुरा हाल था. उनको समझ ही नहीं आ रहा था कि बच्चा मर कैसे सकता है जब कि उसको खोए हुए अभी दो-तीन घंटे ही हुए थे. ना ही हमें उसकी मौत का कोई कारण दिखाई पड़ रहा था. और इसकी वजह से हम उन लोगों को कोई जवाब भी नहीं दे पा रहे थे. हम लोग ज्यादा नहीं सोचना चाहते थे इस बारे में. इसलिए हमने यही मान लिया कि शायद बच्चे ने कोई जहरीला फल खा लिया और उसकी मौत हो गई. उसके बाद मैं अपने घर चला गया और कोशिश करता रहा कि इस बारे में ना सोचू. बच्चों की लाश देखकर मैं टूट सा जाता हूं. मुझे अपनी नौकरी बहुत प्यारी थी, लेकिन बच्चों की लाशें देखने की हिम्मत मेरे अंदर नहीं थी. मेरी खुद की दो बेटियां हैं और उनको कुछ खो जाने का ख्याल भी…..
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ख़ैर यही वजह थी कि आखिर में मुझे वह नौकरी छोड़नी ही पड़ी. ज्यादातर cases में हम मौत की वजह जानने की परवाह नहीं करते क्योंकि वह हमारा काम नहीं है. लेकिन मेरा एक दोस्त पुलिस डिपार्टमेंट में ही था. और जब भी ऐसा कोई अजीब सा केसा आता था तो वह मुझे जरूर बता देता था उसके बारे में. तो करीब 1 हफ्ते बाद वह मुझसे पूछता है कि क्या मुझे उस बच्चे के बारे में याद है ?
मैंने कहा बिल्कुल बहुत अच्छे से याद है.
तो वह बताता है कि यहां कुछ बहुत ही अजीब सा चल रहा है. वह बताता है कि जिन डॉक्टर ने उस बच्चे का पोस्टमार्टम किया था उनको समझ ही नहीं आ रहा था कि बच्चे की मौत कैसे हुई. डॉक्टर्स ने अपनी जिंदगी में कभी ऐसा केस नहीं देखा था. उसने बताया कि जब डॉक्टर ने उस उस बच्चे की बॉडी को खोला पोस्टमार्टम के लिए तो उनको यकीन ही नहीं हुआ अपनी आंखों पर. उसने बताया कि बच्चे के अंदर के हर एक हिस्से में छेद हो रखे थे. सिर्फ उसके दिल और फेफड़ों को छोड़कर. उसके पेट किडनी यहां तक कि एक टेस्टिकल में भी छेद हो रखे थे. बिल्कुल साफ छेद. ऐसा मानो की लेजर से किए गए हो. छेद इतनी सफाई से किए गए थे कि मानो किसी मशीन से किए गए हो. लेकिन सिर्फ अंदर के हिस्सों पर. ऊपर से बच्चे की बॉडी पर खरोच तक नहीं थी. ना किसी कटे का निशान था. डॉक्टर को समझ ही नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है. मैंने उससे पूछा कि क्या और भी कोई ऐसा केस आया है कभी तुम्हारे पास. तो उसने बताया कि नहीं ऐसा वह पहला ही केस था. लेकिन डॉक्टर को अपनी रिपोर्ट देनी ही होती है. तो उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यही लिखा कि बच्चे की मौत अंदरूनी ब्लीडिंग की वजह से हुई है.
हालांकि उनमें से किसी को नहीं पता था कि ऐसा कैसे हुआ.
एडवर्ड ने बताया कि सालों बीत जाने के बाद भी वह उस बच्चे को भूल नहीं पाया है.
और तो और वह अपने बच्चों को भी कभी जंगल में नहीं जाने देता है और कभी वह बाहर जाते भी हैं तो वह उनको कभी अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देता है. बातों बातों में हमारा डिनर भी हो जाता है. और वह बाहर जाने लगता है. जाते-जाते वह मेरे कंधों पर हाथ रखता है और पास आकर धीरे से बोलता है. वह बोलता है कि इन जंगलों में बहुत खतरनाक चीजें मौजूद हैं ऐसी चीजें जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते. ऐसी चीजें जिनको कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा परिवार भी है, कि हमारे बच्चे हैं, हमें दर्द होता है और हम कुछ महसूस भी कर सकते हैं. वह मुझसे बोलता है कि इन जंगलों में हमेशा अपना ध्यान रखना.
यह कहकर वहां से चला जाता है.
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अपने दोस्तों की बात करूं तो मेरा एक और बहुत अच्छा दोस्त हुआ करता था. उसका नाम पॉल है.
एक दिन अचानक उससे मुलाकात हो गई और हम कुछ देर बैठ गए गप्पे मारने के लिए. हम दोनों ने कई साल एक साथ काम किया था. लेकिन फिर उसका दूसरे स्टेट में ट्रांसफर हो गया था. तो बातों बातों में हम उन रहस्यमई सीढ़ियों के बारे में बात करने लगे. मैंने उससे पूछा है कि मैं उनके बारे में और जानना चाहता हूं. वह कुछ देर के लिए चुप हो गया. वह मुझे कुछ बताना चाहता था लेकिन बता नहीं रहा था. मैं उसको फिर से पूछता हूं. तो वह मुझसे कहता है ठीक है लेकिन उससे पहले अपना रेडियो फोन बंद कर लो.
हम अपना रेडियो फोन कभी बंद नहीं करते हैं, क्योंकि किसी भी इमरजेंसी में हमें इसी पर मैसेज मिलता है. लेकिन मैंने सोचा 10-15 मिनट में क्या फर्क पड़ता है. तो मैंने अपना रेडियो फोन बंद कर लिया.
उसने बताया कि करीब 7 साल पहले एक ऑपरेशन पर गया था जंगल में. उसके साथ एक नया नया लड़का था जिसने कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया था. वह जंगल के एक ऐसे हिस्से में थे जहां से बहुत सारी अजीब अजीब घटनाओं के होने की रिपोर्ट मिल चुकी थी. अजीब अजीब घटनायें जैसे कि किसी के गायब हो जाने या रात में अजीब अजीब सी आवाजें आने या फिर रात में रंग बिरंगी लाइट दिखाई देने की घटनाएं.
पॉल ने बताया कि वह नया लड़का बहुत डरा हुआ था और बार बार जंगल में होने वाली अजीब बातों के बारे में बात कर रहा था. उसने बताया कि वह लड़का बार-बार गोटमैन(goatman) का नाम ले रहा था. गोट मैन यानी किया ऐसा आदमी जिसका चेहरा बकरे जैसा होता है और बाकी का शरीर इंसान जैसा. गोटमैन ये गोटमैन वो. बस यही बातें करे जा रहा था.
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आखिर में मैंने उसे बोला कि इन भयानक जंगलों में गोटमैन के अलावा भी बहुत सारी चीजें हैं जिससे तुम को डरना चाहिए. इसलिए बेहतर होगा कि तुम गोटमैन का नाम लेना बंद करो. लड़के ने पूछा किस तरह की चीजें . मैंने उससे बोला अपना मुंह बंद रखो, काम पर ध्यान दो. आगे हमने एक छोटी सी पहाड़ी पार करी और उस को पार करते ही हम से करीब 30 फीट दूर हमें सीढ़ियां दिखाई दी.
लड़का चुप करके खड़ा हो जाता है. बिल्कुल चुप चाप. उन सीढ़ियों को वहां देख कर मैंने कहा, देखा यह वह चीज है जिसे तुम को डरना चाहिए. लड़के ने हैरानी से मुझे पूछा कि वह सीढ़ियां इस घने जंगल में क्या कर रही है और वह उनके बारे में जानना चाहता है. अब वह लड़का हमारी टीम ज्वाइन कर ही चुका था तो ना चाहते हुए भी मैं जो कुछ भी जानता था उनके बारे में मैं उसको सब बताता चला गया. मैंने उसको बोला कि तुम को इतना सब कुछ बताने के बाद मैं भी मुसीबत में पड़ सकता हूं. लेकिन तुम अच्छे लड़के हो इसी लिए बेहतर होगा की इनके बारे में ज्यादा सवाल ना पूछो. और इनसे दूर ही रहो. लड़का पॉल की बात अच्छे से समझ गया. मैंने फिर उससे पूछा कि मुझे और बताओ इन सीढ़ियों के बारे में. जितना भी तुमको पता है सब कुछ. बातें करते करते Paul अचानक से रुक गया और मुझसे बोला, ठीक है मैं तुमको सब बताता हूं. लेकिन भूल कर भी हमारे सुपरवाइजर्स को इसके बारे में मत बताना. मैंने कहा बिल्कुल नहीं. फिर वह मेरा रेडियो फोन चेक करता है कि मैंने उसे ठीक से बंद किया है या नहीं. पॉल ने बताया, जब मैंने नौकरी शुरू ही की थी तब हम आपस में बिल्कुल बातें नहीं करा करते थे इन सीढ़ियों के बारे में. ना ही जंगल में होने वाली दूसरी चीजों के बारे में.
यहां तक कि जब कोई हमारी टीम ज्वाइन करने वाला होता तो उसके ज्वाइन करने से पहले ही हम उसको warn कर देते थे कि उसका सामना कुछ बहुत डरावनी चीजों से हो सकता है. जिससे कि कमजोर दिल वाले लोग इस डिपार्टमेंट को ज्वाइन ही ना करें. इतना ही नहीं जॉइनिंग के टाइम पर हर एक आदमी से एग्रीमेंट साइन करवाया जाता था कि जंगल में होने वाली किसी भी अजीब घटना की जानकारी वह किसी को नहीं देंगे, मीडिया में नहीं जाएंगे और बातें लिख नहीं करेंगे. यहां तक कि अपने परिवार वालों को भी कुछ नहीं बताएंगे. क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि कोई डरपोक नया लड़का हमारी टीम ज्वाइन कर ले और मीडिया में जाकर सब कुछ बता दे, इन सीढ़ियों के बारे में और दूसरी डरावनी चीजों के बारे में. लेकिन बाद में सब को लगा कि ऐसे किसी एग्रीमेंट की जरूरत ही नहीं है. क्योंकि इनसे सामना होने के बाद कोई भी इनके बारे में दोबारा बात करना ही नहीं चाहेगा. कई बार मीडिया कोशिश भी करता था हमसे खोए हुए लोगों के बारे में पूछने की, लेकिन हम में से कोई भी अपनी जुबान नहीं खोलता था.
पता नहीं क्यों शायद इसीलिए क्योंकि हम खुद भी यह नहीं मानना चाहते थे कि इन जंगलों में कुछ ऐसा है जो हमारी समझ से परे है. यह हमारा पेशा था. जंगल में रहना हमारा काम था और हमारा घर इसी से चलता था. और इन डरावने जंगलों में डर कर काम नहीं किया जा सकता. इसीलिए हम सब यही दिखाने की कोशिश करते कि सब ठीक है. लेकिन अब तुम पूछ रहे हो तुम्हें जिंदगी में पहली और आखरी बार इनके बारे में बात करूंगा. और मुझे भरोसा है कि तुम उसके बाद इन को लेकर कभी अपना मुंह नहीं खोलोगे. Paul ने बताया कि यह सीढ़ियां बहुत लंबे समय से जंगलों में पाई जा रही है. हमारे डिपार्टमेंट को दसियो सालों से उनके देखे जाने की रिपोर्ट मिलती आई हैं. कई बार कुछ लोग इनके ऊपर भी गए लेकिन कुछ नहीं हुआ. लेकिन कई बार बहुत बुरा बुरा भी हुआ है. एक बार मैंने अपनी आंखों के सामने ही हमारे ही एक साथी का हाथ उसके शरीर से अलग होते हुए देखा था. वह उन सीढ़ियों के बिल्कुल ऊपर चढ़ गया था. और ऊपर जाकर एक टहनी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था, कि अचानक उसका हाथ कट गया. सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया. एक सेकंड पहले उसका हाथ था ओर अगले ही पल उसका हाथ कट चुका था. हाथ नीचे भी नहीं गिरा था. पता नहीं हवा में ही कहां गायब हो गया. हाथ बिलकुल सफाई से कटा था जैसे कि किसी तेज तलवार से एक झटके में काट दिया गया हो. वह मरते मरते बचा था.
दूसरी एक लड़की थी जिसने नया-नया जॉइन किया था. उसने बस एक सीढ़ी को टच ही किया था कि उसके दिमाग की नस फट गई. बिल्कुल फट गई. समझ रहे हो ना. जैसे पानी का गुब्बारा फटता है ना एकदम से. बिल्कुल वैसे. वह लड़खड़ाती हुई मेरे पास आई और बोली-” मुझे लगता है मुझे कुछ हुआ है”
बस इतना ही बोल पाई थी. इतना बोलते ही वह धड़ाम से जमीन पर गिर गई. जमीन छूने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी.
उसकी आंखों में से खून निकल रहा था. मैं वह मंजर कभी नहीं भुला सकता. मेरे देखते ही देखते उसका चेहरा खून में लाल हो चुका था. और मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था.
हम हमेशा सबको मना करते थे उनके पास जाने को लेकिन फिर भी हर बार एक ना एक सरफिरा बहादुरी दिखाने की गलती कर बैठता था. अगर वह बच भी जाते तो भी कुछ ना कुछ गलत हो ही जाता था. या तो कोई बच्चा गायब हो जाता जंगल से या फिर अगले दिन किसी के दो टुकड़े हो जाते जंगल के बीचो-बीच, सबके सामने. पता नहीं क्यूं लेकिन कुछ ना कुछ बुरा हमेशा ही होता था मुझे नहीं पता वह सीढ़ियां इन जंगलों में क्या कर रही है. लेकिन उनके यहां होने का कोई ना कोई मतलब तो जरूर है. हम तो बस इतना कर सकते हैं कि उनके पास ना जाए और अपने साथियों को भी ना जाने दे.
कुछ देर के लिए हम दोनों चुप हो जाते हैं.
मैं कुछ बोलने वाला ही था कि वो मुझसे पूछता है -“क्या तुमने कभी एक ही सीढ़ी दो बार देखी ?”
मैंने कहा-” नहीं”
इसके बाद वह चुप हो गया. फिर वह जंगली जानवरों की बातें करने लगा. मैंने भी फिर उससे और ज्यादा पूछना ठीक नहीं समझा. उसके बाद हमने अपने रेडियो को ऑन कर लिया. अंधेरा होने में काफी समय था लेकिन पॉल ने बताया कि उसको तबीयत ठीक नहीं लग रही है. इसीलिए वह जल्दी निकल गया. उस दिन के बाद से मेरी पोल से कभी कोई बात नहीं हुई.

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7 Comments

  1. Mahie February 25, 2018
    • razia sultana May 5, 2018
    • Arnav July 6, 2018
    • Nadeem akhtar July 7, 2018
  2. Yashwant March 31, 2018
  3. Abhishek April 22, 2018
  4. Bulbul Ranawat July 5, 2018

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