भयानक जंगलो की खतरनाक कहानिया – Search and Rescue Horror Stories

REAL HORROR STORIES IN HINDI. STORY OF GHOST IN HINDI. HAUNTED STORIES IN HINDI

Search and Rescue Horror Stories in Hindi – Part 1

ये कहानिया भेजी है US के एक retired सर्च एंड रेस्क्यू (search and rescue) officer ने. जिस तरह हमारे यहाँ आपातकाल पुलिस होती है. उसी तरह America में एक अलग पुलिस डिपार्टमेंट होता है जिनका काम जंगलो और पहाड़ो पर खोये हुए लोगो को ढूंढ़ने का होता है.
नीचे बताई गयी कहानिया बिलकुल सच्ची है, और अफसर के साथ घटित हो चुकी हैं,

RAL HORROR STORIES IN HINDI. STORY OF GHOST IN HINDI
HAUNTED STORIES IN HINDI. Search and Rescue Horror Stories in Hindi


अपनी 35 साल की नौकरी में खोये हुए लोगो को ढूंढ़ने का मेरा बहुत अच्छा रिकॉर्ड रहा है. ज्यादातर लोग या तो अपने रास्ते से भटक जाते हैं या फिर किसी पहाड़ी से फिसल कर रास्ता भूल जाते है और वापिस नहीं जा पाते. जैसा की पुरानी कहावत है की – अगर खो जाओ तो जहाँ हो वहीँ रहो – इसलिए ज्यादातर लोग जो जंगलो और पहाड़ो पर खो जाते हैं वो वही आस पास ही मिल जाते हैं और कहीं दूर नहीं जाते. लेकिन दो बार मेरे पास ऐसे केस आये जहाँ ऐसा नहीं हुआ. इन दोनों ही cases ने मुझको अंदर तक हिला के रख दिया था. और इन्ही केसेस ने मुझे आगे motivation दी की मैं पूरी शिद्दत के साथ खोये हुए लोगो को ढूँढू जिन लोगो को ढूंढ़ने का जिम्मा मुझे दिया गया है.

पहला केस था एक छोटे से लड़के का जो अपने अपने माँ बाप के साथ जंगल में पिकनिक मनाने गया था. वो बच्चा और उसकी छोटी बहन दोनों एक ही साथ खोये थे. दोनों बच्चे माँ बाप के साथ ही खेल रही थे, की माँ बाप की नजर सिर्फ कुछ सेकण्ड्स के लिए ही उनसे हटी और दोनों बच्चे अचानक गायब हो गए. माँ बाप के काफी ढूंढ़ने पर भी जब बच्चे नहीं मिले तब उन्होंने हमें फ़ोन किया. मैं अपनी टीम के साथ उस जगह पंहुचा जहाँ से बच्चे गायब हुए थे. थोड़ा सा ढूंढ़ने पर बच्ची तो बहुत जल्दी मिल गयी. पर वो छोटा लड़का नहीं मिला. जब बच्ची से हमने उसके भाई के बारे में पूछा तो उसने बताया की भैया को “भालू अंकल” ले कर गए हैं. उसने बताया की “भालू अंकल” ने उसको खाने के लिए बेर दिए और उसको किसी को कुछ न बताने के लिए बोला. “वो बस भैय्या के साथ थोड़ी देर खेलना चाहता था”, बच्ची ने बताया. आखरी बार बच्ची ने अपने भाई को देखा था तब वो “भालू अंकल” के कंधो पर बैठा हुआ था और खुश था. जाहिर था की हमारा सबसे पहला शक गया की शायद ये किडनेपिंग का केस है. और बच्चे को किसी ने बेहला फुसला के किडनैप कर लिया है. लेकिन उस एरिया को अच्छे से छानने के बाद भी हमें किसी दूसरे आदमी के वहां आने का कोई सुराग नहीं मिला. लड़की बार बार यही बता रही थी की वो “भालू अंकल” दिखने में बिलकुल अलग था, उसका कद बहुत लम्बा था और उसके शरीर पर बहुत बाल थे, जैसे की भालू के होते हैं, और उसका चेहरा बहुत अजीब सा था. अजीब सा. बच्ची ने यही बताया. हमने उस इलाके को कई हफ्तों तक छाना लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला. वो मेरी लाइफ के सबसे लम्बे चले cases में से एक था. आखिर में हार कर हमें वो केस बंद ही करना पड़ा.

दूसरा केस था एक 11-12 साल की लड़की का जो अपनी मम्मी और दादा जी के साथ पहाड़ो पर घूमने के लिए गयी थी. उसकी मम्मी ने बताया की वो बस एक मिनट के लिए एक पेड़ पर चढ़ी थी ये देखने के लिए की आस पास और क्या क्या है. बस फिर वो लड़की उस पेड़ से कभी नीचे नहीं आयी. पता नहीं पेड़ से ही कहाँ गायब हो गयी. उन्होंने उसका घंटो तक पेड़ के नीचे वेट किया. ना कोई चिल्लाने की आवाज़ आयी ना ही गिरने की. लड़की पेड़ के ऊपर से ही ऐसे गायब हो गयी जैसे की हवा में गायब हो गयी हो. घंटो वेट करने के बाद उन्होंने हमसे कांटेक्ट किया. जब हम वहां पहुंचे तो हमने भी उस इलाके को अच्छे से ढूंढा, लेकिन लड़की का कहीं कोई अता पता नहीं मिला.

मैं आज तक नहीं समझ पाया की वो दोनों बच्चे कहाँ गायब हुए, और उन मासूमो का ढूंढ ना पाने का दर्द मैं आज भी महसूस करता हूँ.

कई बार जब किसी खोये हुए शख्स को ढूंढ़ने जाना होता था तो मैं अकेला ही अपने खोजी कुत्तो को साथ लेके निकल पड़ता था. और अकसर वो खोजी कुत्ते मुझे सीधा किसी ऊँची पहाड़ी के नीचे ले जाते. कोई छोटी मोटी पहाड़ी नहीं, बल्कि ऊँची ऊँची पहाड़ियां. जहाँ ना कोई पेड़, ना कोई चट्टान, ना ही कोई पत्थर, सिर्फ सीधी खड़ी ऊँची पहाड़ियां. जिनपर चढ़ना किसी आम इंसान तो छोड़ो, किसी professional के बस का भी नहीं था. ऐसी पहाड़िया जहाँ ठीक से हाथ रखने तक की जगह नहीं होती थी. और हमेशा ही खोया हुआ इंसान पहाड़ के ऊपर या फिर दूसरी तरफ ही मिलता था, वो भी हीलीकाप्टर की मदद से कई कई किलोमीटर दूर . उन लोगो को याद ही नहीं होता था की वो वहां कैसे पहुंचे. दिमाग घूम जाता था ये सोचके की वो उस तरफ कैसे पहुंच जाते थे. कोई ना कोई जवाब तो जरूर ही होगा इसका, लेकिन मुझे इसका आज तक कोई जवाब नहीं मिला.

एक केस मुझे अच्छे से याद है जिसमे हमें एक डेड-बॉडी मिली थी. एक 11 साल की लड़की एक नदी पार कर रही थी उसपे बने एक छोटे से पुल से. अचानक उसका पैर फिसला और वो निचे एक पत्थर पर जा गिरी. लड़की सर के बल गिरी थी और गिरते ही उसकी मौत हो गयी थी. ऐसा नहीं था की मैंने पहली बार कोई डेड बॉडी देखी हो, लेकिन उस लड़की की माँ को जब उसके मौत की खबर मिली तो उसकी माँ की वो दिल दहला देने वाली चीखे मैं कभी नहीं भूल सकता. लड़की की बॉडी को जब हम एम्बुलेंस में डाल रही थे तब उसकी लाश को देखके उसकी माँ की वो दिमाग को फाड़ कर रख देने वाली चीखे बहुत डरावनी थी. ऐसा लगा मनो उसकी बेटी के साथ ही उसका सब कुछ ख़तम हो गया हो. उसकी चीख में जो दर्द था, ऐसा लगा मानो उसकी बेटी के साथ उसकी भी मौत हो गयी हो. कुछ दिनों बाद मेरे ही एक साथी ने बताया की उस माँ ने खुद कुशी कर ली है. वो अपनी बेटी के बिना नहीं रह सकती थी. काश मैं उसके लिए कुछ कर पता.

एक बार मुझे एक दूसरी टीम के अफसर के साथ काम करने का मौका मिला, मैं खुद भी एक officer ही था. हुआ यूँ था की हमें एक इलाके में कुछ भालुओं के होने की रिपोर्ट मिली थी, उसी रिपोर्ट के सिलसिले में हम वहां जांच करने गए थे. दरअसल उसी दौरान उस इलाके में एक आदमी के खो जाने की भी रिपोर्ट मिली थी. वह आदमी पहाड़ी चढ़ने(hiking) के लिए गया था और उसको कुछ दिन में वापिस आ जाना था, लेकिन वो वापिस आया नहीं.
ट्रेनिंग के दौरान हमें पहाड़ चढ़ना सिखाया जाता है. और उस आदमी को ढूंढ़ने के लिए हमें बहुत मुश्किल मुश्किल पहाड़िया चढ़नी पड़ी. आखरी में हमें वो मिल ही गया. उसका पैर दो पत्थरो के बीच बने छोटे से छेद में फंस गया था और टूट गया था. मालूम पड़ा की वो वहां दो दिन से फंसा हुआ था और उसका पैर सड़ना शुरू हो चुका था. काफी देर मशक्कत करने के बाद किसी तरह हमने उसको बाहर निकला और हेलीकाप्टर पर चढ़ाया. हेलीकाप्टर में सिर्फ डॉक्टर ही था उसके साथ . बाद में उस डॉक्टर ने हमको बताया की वो आदमी चुप ही नहीं हो रहा था और रोये जा रहा था. बार बार एक ही बात बोले जा रहा था की वो तो बिलकुल ठीक था, और अच्छे से पहाड़ी की चढाई कर रहा था की उसको वहां एक रहस्यमयी आदमी मिला. उस आदमी के पास चढाई का कोई औजार नहीं था और वो सफ़ेद कपडे पहने हुए था. वो उस रहस्यमयी आदमी के पास गया और उसको पीछे से आवाज़ दी, वो आदमी पलटा तो उसने देखा की उसका कोई चेहरा ही नहीं है. सिर था लेकिन कोई आँख, नाक, मुँह कुछ नहीं था. उसने बताया की उस आदमी को देख के वो इतना डर गया की जल्दी से पहाड़ी के नीचे आने लगा और उसी दौरान उसका पैर फिसला और वो वहां फंस गया. उसने बताया की जब वो वहां फंसा हुआ था तो पूरी रात उस बिना मुँह के आदमी के नीचे उतरने की आवाज़ें सुनता रहा था, नीचे उतरते हुए उस आदमी  की भयानक दिल दहला देने वाली चीखे पूरी रात उसने सुनी. डॉक्टर की ये बात सुन के मेरा रोग रोग खड़ा हो गया था. अच्छा हुआ जब वो ये कहानी सुना रहा था मैं उस के साथ हीलीकाप्टर में नहीं था .

मेरी जिंदगी की सबसे भयानक cases में से था एक था, एक लड़की का ढूंढ़ने का केस, जो की अपने दोस्तों के ग्रुप के साथ पहाड़ चढ़ने (hiking) के लिए गयी थी और उनसे अलग हो गयी . उस दिन हम देर तक बाहर पहाड़ी पर ही उसको ढूंढ रहे थे क्योकि हमारे खोजी कुत्तो को उसकी गंध मिल गयी थी. आखिरकार वो हमें मिली. जब वो हमें मिली तब वो एक बड़े सड़े लक्कड़ के अंदर सहमी हुई बैठी थी. उसको देखने से ही पता चल रहा था की वो सदमे में थी और बहुत ज्यादा डरी हुई थी. उसके एक पैर का जूता भी गायब था और उसका बैग भी वहां नहीं था. हालांकि उसको कोई चोट नहीं लगी थी, इसलिए हम उसको अपने साथ पैदल ही वापिस ले जाने लगे अपने बेस पर. अँधेरा हो चुका था. वापिस जाते समय वो लड़की बार बार पीछे मुड़ मुड़ के देख रही थी और बार बार पूछ रही थी की वो बड़ी बड़ी काली आँखों वाला आदमी हमारा पीछा क्यों कर रहा है. हमें वहां कोई आदमी नहीं दिखा, लेकिन वो बार बार पीछे देख रही थी. हमें लगा शायद वो सदमे के कारन ऐसी बहकी बहकी बाते कर रही है. लेकिन हम जैसे जैसे अपने बेस के पास पहुंच रहे थे, उसकी अजीब हरकतें बढ़ती जा रही थी और उसने चिल्लाना शुरू कर दिया था. बार बार वो मुझसे कह रही थी – “उस आदमी को बोल दो मुझे देख के मूह ना बनाये”. एक मौका तो ऐसा आया, की वो लड़की वही रुक गयी और पलट के चिल्लाने लगी – “मेरा पीछा करना बंद करो, मेरा पीछा करना बंद करो. मैं तुम्हारे साथ नहीं जाउंगी, मैं तुम्हे इन लोगो को भी तुम्हारे साथ नहीं ले जाने दुंगी. ”
बड़ी मुश्किल से हम उसको खींच के आगे बढ़े, लेकिन उसके अचानक बाद हमें अपने चारो तरफ से अजीब अजीब सी आवाज़ें आने लगी. अँधेरे होने के कारन कुछ दिख तो नहीं रहा था लेकिन आवाज़ें चारो तरफ से आ रही थी. ऐसा लग रहा था मनो कोई खांस रहा हो. लेकिन वो कोई नार्मल खांसी नहीं थी, कोई बनावटी खांसी लग रही थी, एक लय में आ रही थी, वो भी चारो तरफ से. जैसे रात के अँधेरे में कीड़े आवाज़ करते है ना, बिलकुल ऐसे. मुझे नहीं पता मैं उस आवाज़ को कैसे बयान करू.
जब हम अपने बेस पर बस पहुंचने ही वाले थे, वो लड़की रुकी और उसने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें इतनी ज्यादा फटी हुई थी जितना कोई इंसान नोर्मली नहीं खोल सकता.
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोली– ” वो कह रहा है की तुम जल्दी से यहाँ से निकल जाओ, उसको तुम्हारी गर्दन पर बना चोट का निशान बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा है.”
मेरी गर्दन पर बचपन में लगी एक चोट का निशान है जो की कपडे पहनने के बाद नहीं दिखता. और उस टाइम तो मैंने जैकेट भी पहनी हुई थी, मुझे नहीं पता उस लड़की को उस निशान के बारे में कैसे पता चला. लेकिन जैसे ही उसने मुझको ये बोला, अचानक वो खांसने की आवाज़ बिलकुल मेरे कान के अंदर से ही आने लगी. मेरे रोग रोग खड़ा हो गया, और दिल धाड़ धाड़ बजने लगा. मेरे साथ मेरे और साथी भी थे, मैंने उनको बोला जल्दी से निकलो यहाँ से, मैं बहादुर दिखने की कोशिश कर रहा था अपने साथियो के सामने , लेकिन सच ये है के मैं उस समय हद से ज्यादा डर गया था. आखिर हम अपने बेस पहुंच गए, लेकिन उस रात जो हुआ उसको सोच के मैं आज भी काँप उठता हूँ.

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