बिहार की डरावनी कहानी

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मेरा नाम अतुल सिंह है। मैं पेशे से एक ड़ॉक्‍टर हूं। अब तो मेरी उम्र हो चली है लेकिन, उन दिनों में भूत-प्रेतों पर बिल्‍कुल विश्‍वास नहीं करता था। तब तक जब तक की खुद मेरा उनसे सामना नहीं हुआ था। बात 1994 की है। मैं बिहार के एक दूर-दराज गांव में अपना एक किलिनिक चलाता था। यहीं कोई नवबंर का महीना रहा होगा। मुझें अच्‍छे से याद है। उन दिनों बहुत तेज सर्द हवाएं चला करती थी। रात को कोहरा भी इतना होता था कि इंसान को बाहर जाने में भी ड़र लगें। उस समय जिस गांव में मेरा क्‍लिनिक था, वहां सिर्फ नाम की ही बिजली थी। वो बहुत सुन-सान इलाका था। सड़कों की भी हालात बहुत खराब थी। और इन सारी दिक्‍कतों के बीच में मैं और मेरी वाईफ उस गांव में ही एक किराए के घर में रहा करते थें, जो कि हमारे क्‍लिनिक से 1 किलोंमीटर दूर था। मेरी शादी को अभी तीन महीनें भी पूरे नहीं हुए थे। इसलिए मैं अभी अपने ड़ॉक्‍टर वाले काम पर ज्‍यादा ध्‍यान भी नहीं दे पा रहा था।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
एक दिन मैं अपने क्‍लिनिक से मरीजों को देखकर घर पहुंचा तो काफी रात हो चुकी थी। मैं भी बहुत थक चुका था। इसलिए खाना खाने के बाद मैं और मेरी वाईफ दोनों चले गए। ठंड भी बहुत ज्‍यादा थी इसलिए मुझे लेटते ही नींद आ गई। लेकिन, कुछ देर बाद ही मेरी वाईफ ने मुझे जगा दिया। मैं अधमने मन से उठ कर बोला क्‍या है? तो उसने कहां कोई दरवाजे को पीट रहा है। मैंने भी दरवाजा पीटने की आवाज सुनी। मैंने अपनी वाईफ को कहा की लगता है कोई आज फिर गांव में बीमार हो गया है। मैंने घड़ी की तरफ देखा तो रात के करीब 11 बज रहे थे। मैंने सोचा की इतनी रात को पता नहीं अब कौन आ गया है? मैंने ऑयल लैम्‍प जलाया और दरवाजे को जाकर खोला, दरवाजा खोला तो देखा बाहर एक औरत खड़ी है। उसने अपना चेहरा घूंघट से ढ़क रखा था। उन दिनों गांव की औरतें बाहर जाते हुए अपना चेहरा घूंघट से ढ़क लिया करती थी। ‘क्‍या बात है’ मैंने पूछा। तो उसने कहां ड़ॉक्‍टर साहब मेरा बेटा बहुत बीमार है। उसकी आवाज से मालूम पड़ रहा था कि उसकी उम्र 25 से 27 के आसपास होगी। मैंने उससे कहा की मैं इतनी रात को बाहर नहीं जा सकता। तुम कल दिन में आ जाना। लेकिन, वो रोती हुई बोली की अगर मैं नहीं गया तो बेटा मर जाएगा। उसकी तबीयत बहुत खराब है। मैनें उससे उसके बारें में पूछा तो वो बोली की वो पास ही के गांव चिनपूर की है और उसके ससुर का नाम रामधनी मेहतों है। वो बहुत बूढ़े आदमी है, चल-फिर नहीं सकते। और उसका पता कॉलकत्‍ता में नौकरी करता है। घर पर ओर किसी के ना होने के कारण उसे खुद ही इतनी देर रात को आना पड़ा। उसकी बात सुनकर मैं ना चाहते हुए उसके साथ जाने को तैयार हो गया। मैंने ठंड वाले कपड़े पहने, अपना बॉक्‍स लिया और अपनी वाईफ को दरवाजे बंद करने को बोलकर साईकिल लेकर उसके साथ चल पड़ा। रात में ठंड बहुत ज्‍यादा थी। मैं अपनी साईकिल लेकर उस औरत के साथ पैदल ही चल रहा था। बाहर चारों तरफ सन्‍नाटा था। गांव का एक भी आदमी बाहर नहीं दिख रहा था।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories सुन-सान रास्‍ते नवबंर का महीना, कोहरा भी बहुत घना था। और रह-रहके दूर खेतों से सियार के रोने के आवाज सब कुछ माहौल को बहुत ड़रावाना बना रहे थे। वो औरत शायद जयादा बोलती नहीं थी। पूरे रास्‍ते उसने ज्‍यादा बात नहीं की। बस जल्‍दी चलने को ही बोलती रही। करीब 10-15 मिनट चलने के बाद उसका गांव आ गया। उसने कहा यदि हम इस रास्‍ते से जाएंगे तो जल्‍दी पहुचेंगे। मैं उस रास्‍ते को बहुत अच्‍छे से जानता था। वो बहुत खराब रास्‍ता था। उस रास्‍ते में बास के बहुत सारे पेड़ थे और बगल में तालाब होने के कारण उस रास्‍ते में हमेशा किचड़ रहता था। लोग उस रास्‍ते का इस्‍तेमाल ना के बराबर ही करते थे। कुछ लोग तो ये भी बात करते थे कि उस रास्‍ते के बास के पेड़ों पर भूत रहा करते है लेकिन, मैं इन सब बातों पर बिल्‍कुल विश्‍वास नहीं करता था। अब क्‍योंकि वो रास्‍ता खराब था तो मैंने कहा कि मैं दूसरे रास्‍ते से साईकिल से आता हूं आप जाओ लेकिन, वो औरत जिद करने लगी की आप इसी रास्‍ते से चलें नहीं तो देर हो जाएगी। मैं जानता था कि मैं इस रास्‍तें से साईकिल लेकर नहीं जा पाऊंगा। लेकिन, वो औरत जिद किए ही जा रही थी कि आप इसी रास्‍ते से चलें। एक बार तो उसकी बातों से ना जाने क्‍या हुआ कि मैं उस रास्‍ते की सच्‍चाई जानते हुए भी उस रास्‍ते से जाने को तैयार हो गया लेकिन, वहां पहुंचते ही मेरा पैर कीचड़ में धस गया। मैंने आगे जाने को साफ मना कर दिया।
अब वो औरत और भी ज्‍यादा जिद करने लगी। उसकी आवाज में रोने वाली गुहार की जगह गुस्‍सा आ गया था। मुझे यह बात बहुत अजीब लगी। मैं अपनी साईकिल दूसरे रास्‍ते की ओर घुमाने लगा। लेकिन, तभी उस औरत ने मेरी कलाई को पकड़ लिया। और अपनी तरफ खींचना चाहा। मैंने अपना हाथ छुड़ाया और उसे ये बोलते हुए की मैं उसके घर दूसरे रास्‍ते से जा रहा हूं। वो बेकार की चिंता ना करें। मैं उसके घर जल्‍दी पहुंच जाऊंगा। मैं वहां से जाने लगा। जाते-जाते मैंने मुड़ के देखा तो वो औरत अपने घर जाने के बजाय मेरी तरफ देख रही थी। कोहरा ज्‍यादा होने की वहज से मैं ज्‍यादा कुछ नहीं देख सका। मैं जितनी जल्‍दी हो सकता था उतनी तेज साईकिल को ऊबड़-खाबड़ रास्‍तों पर रात के अंधेरे में चलाते हुए आखिर उसके गांव में पहुंच ही गया। मैं उस औरत के घर पहुंच ही गया। पर वहां कोई नहीं था।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories ना ही दरवाजे पर वो औरत खड़ी थी। मैंने सोचा की वह औरत घर पहुंच कर अपने बेटे के पास पहुंच गई होगी। मैंने दरवाजे खटखटाया। लेकिन, किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया। मैंने फिर से दरवाजे को खटखटाया लेकिन, इस बार भी किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। 8-10 बार इसी तरह दरवाजा खट-खटाने के बावजूद जब कोई जवाब ना मिला तो मुझे बहुत गुस्‍सा आया की एक तो इतनी रात में मैं ठंड़ में आया हूं। और ये औरत दरवाजा भी नहीं खोल रही है। तब तो उसे बहुत जल्‍दी थी अब क्‍या हुआ? अब मैं दरवाजे को जोर-जोर से खटखटाने लगा और रामधनी मेहतो का नाम लेकर भी आवाज लगाने लगा। मुझे लगा शायद ये नाम सुनकर ही कोई बात बनें। लेकिन, इसके बावजूद कोई दरवाजा नहीं खोल रहा था। मैं ओर परेशान हो गया। मैंने सोचा अगर इस बार भी कोई दरवाजा नहीं खोलेगा तो मैं वापस चला जाऊंगा। मैंने फिर से आवाज लगाई और दरवाजे को जोर-जोर से खटखटाना शुरू कर दिया। मैं बिना उस बच्‍चे को देखे वापस नहीं जाना चाहता था। मेरी आवजा सुनकर पड़ौस के घर वाले जाग गए। उनमें से किसी ने अपने घर से ही आवाज लगाकर पूछा- कौन हो भाई? इतनी रात को क्‍यों शोर मचा रहे हों? मैनें उसे अपना नाम बताया कि मैं ड़ॉक्‍टर अतुल सिंह हूं। ये सुनने के बाद कुछ लोग मेरे पास आए। उन्‍होंने मुझ से पूछा-ड़ॉक्‍टर साहब आप इतनी रात को क्‍यों आए है? hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
मैंने उन लोगों को सारी बात बताई। और बोला अब जब मैं आ गया हूं तो ये लोग दरवाजा भी नहीं खोल रहे हैं। ना जाने क्‍यों मेरी बातों को सुनकर उन लोगों ने बहुत अजीब-सा रिएक्‍ट किया। एक आदमी ने मुझे से पूछा कि क्‍या आपकों पक्‍का याद है उस औरत ने इसी घर का पता बताया था। मैंने झुंझलाते हुए बोला हां भाई मुझे बहुत अच्‍छे-से याद है। वो लोग आपस में ही कुछ हल्‍की-हल्‍की आवाज में बाते कर रहे थें। मैं उनकी बातों को नहीं सुन पा रहा था। इतना ही सुन पाया की वो जरूर वो चुड़ैल होगी। चुड़ैल की बात सुनकर मैंने उनसे पूछा कि आप ये क्‍या बात कर रहे हैं? तो उनमें से एक ने लालटेन की रोशनी को दरवाजे के करीब ले जाते हुए मुझे नीचे देखने को कहा। तो मेरे होश ही उड़ गए, उस दरवाजे पर जिस पर मैं पिछली 10 मिनट तक दस्‍तक दे रहा था, उस पर तो ताला लटका हुआ था। अब मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। फिर वो लोग मुझे एक घर में ले गए। उनके साथ और भी लोग आवाज सुनकर आ गए थें। फिर उन्‍होंने मुझे जो बतलाया उसे सुनकर मेरी जो हालत हुई वो मैं आपको शब्‍दों में ब्‍यान नहीं कर सकता। उन्‍होंने बताया की जिस औरत के बारे में मैं बात कर रहा था वो तो तीन महीनें पहले ही मर चुकी थी। वो औरत प्रेगनेन्‍ट थी और एक रात को उस और को प्रसव पीड़ा यानी की लेबर पेन हुआ। उसकी हालत बहुत खराब थी। वो एक बच्‍चे को जन्‍म देने वाली थी। उसके हालत ओर ज्‍यादा बिगड़ती देख उसके ससुर ने ड़ॉक्‍टर को बुलाने के लिए कहा तो कुछ लोग आपके पास आपको बुलाने गए तो पता चला की आप नहीं है।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories शायद आप शहर गए हुए थे। काफी कोशिशों के बाद भी उस औरत और उसके बच्‍चें को नहीं बचाया जा सका। दर्द में तड़पते हुए उसकी मौत हो गई। उसकी चीखें सुन-सान रात में पूरे गांव में गूंज रही थी। आखिर में एक जोर की चीख के साथ अपने और अपने होने वाले बच्‍चे के साथ इस दुनिया से चल बसी। इसके बाद कई बार उसे कई लोगों ने देखा है। उस बांस वाली वाले रास्‍ते में अपने बच्‍चें को अपनी गोद में लिए खड़ी रहती है। वो अब चुड़ैल बन चुकी है। इन बातों को सुनने के बाद मुझे अहसास हुआ की शायद वो औरत अपनी मौत की वजह मुझें मानती है। और इसलिए मुझे मारने के लिए वो मुझें अपने साथ यहां लेकर आए थी। हालांकि उसके मरने में मेरा कोई दोष नहीं था। लेकिन, फिर भी वो मुझे मारना चाहती थी। ये बात सुनकर मैंने सोचा की आज तो मैं किस्‍मत से बच गया नहीं तो आज मेरी मौत पक्‍की है। कुछ देर वो लोग इसी बारे में बाते करते रहे। उनकी बातों को सुनकर मुझे और भी ज्‍यादा ड़र लग रहा था। मुझें अब अपनी वाईफ की फिक्र होने लगी थी। मैं वापिस अपने घर जाना चाहता था। रात के 12 से ज्‍यादा का वक्‍त हो चुका था। पर मेरी हिम्‍मत नहीं हो रही थी कि मैं अकेले घर जाऊं। उन लोगों में से 5 लोगों ने मुझे मेरे घर छोड़ने को कहा। मैं उनके साथ अपने घर जाने लगा।
मैं अब अपने घर पहुंच चुका था। वो लोग भी अब अपने घर को चले गए। मैं अब भी बहुत परेशान था। मुझे परेशान देखकर मेरी वाईफ बोली की क्‍या हुआ? सब ठीक तो है ना? मैंने उसे कुछ नहीं बताया और कहा की सब ठीक है। लेकिन, सुबह जब मैंने उसे सारी बात बताई तो वो भी बहुत ज्‍यादा ड़र गई और कहा की आइन्‍दा से मैं रात में मरीजों को देखने कभी नहीं जाऊंगा।
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