चुड़ैलों की 2 सच्ची कहानियां

horror stories in hindi

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कहानी-1 मैं जो कहानी आपकों बताने जा रही हूं ये बिल्‍कुल सच है और ये मुम्‍बई में हुआ था। ये मेरी फ्रैंड की अम्‍मी के साथ हुआ था। आंटी एक शादी में गई हुई थी। जहां पर वो रहती है वहां से 4-5 स्‍टेशन की दूरी पर वो जगह थी, जहां पर वो शादी में गई थी। शादी से वापस आते हुए उन्‍हें बहुत देर हो गई थी। वो लास्‍ट लॉकल ट्रेन में बैठ गई। क्‍योंकि वो आखिरी ट्रेन थी इसलिए वो पूरी खाली थी। सिर्फ आंटी ही अकेली उसमें बैठी हुई थी।hindi horror stories, horror stories in hindi, ghost stories in hindi, ghost stories in india in hindi, daravani kahaniya, hindi daravni kahaniya, indian ghost stories
लेकिन, फिर अगले स्‍टेशन पर एक और लैड़ उस ट्रेन में चढ़ गई। आंटी ने उस औरत को ऊपर से नीचे तक देखा। वो बहुत सजी-धजी हुई थी। सर के लेकर पैरो तक सजी हुई थी किसी दुल्‍हन की तरह। आंटी उस ट्रेन में अकेली थी इसलिए वो औरत भी उन्‍हीं के पास आकर बैठ गई। साथ बैठे हुए उन्‍होंने एक-दूसरे से थोड़ी बहुत बाते भी की। बात खत्‍म हुई तो दोनों अपनी-अपनी खिड़की में देखने लगें। आंटी अपने साईड़ वाली खिड़की में देख रही थी। और वो दूसरी औरत अपने अपोजिट साईड वाली खिड़की में देख रही थी। आंटी बीच-बीच में उस औरत की तरफ भी देख रही थी। तभी आंटी की नजर उसके पैरों पर पड़ी। उन्‍होंने उसके पैरों की ओर देखा तो वो बहुत ड़र गई क्‍योंकि कुछ देर पहले तक तो उस औरत की पैर की अंगुलिया तो थी लेकिन, अचानक से उसकी अंगुलिया गायब हो चुकी थी। उन्‍होंने देखा की उसके पैरों के पीछे वाला हिस्‍सा उनके सामने की तरफ था। वो ये देखकर बहुत ड़र गई। उनको समझ आ गया की वो औरत कोई इंसान नहीं बल्‍कि कुछ और ही है। उनकी नजरे अब भी उसके पैरो पर ही थी। तभी वो औरत गुस्‍से से आंटी की तरफ मुड़ी और आंटी को गुस्‍सें से देखने लगी। आंटी ने जोर-जोर से कुरान की आयत पढ़ना शुरू कर दिया। ऐसा करते ही वो औरत चलती ट्रेन से कूद गई। ये सब देखकर आंटी इतना ड़र गई की आंटी अगले स्‍टेशन पर ही उतर गई। और वहां जो पुलिस वाले थें उनकों सब कुछ बता दिया। आंटी ने पुलिस वालों से रिक्‍वेस्‍ट की वो उन्‍हें उनके घर तक छोड़ दें। उनकी हालत देखकर पुलिस कान्‍सटेबल उन्‍हें उनके घर तक छोड़ने आए। उस रात के बाद उन्‍होंने अकेले रात में सफर करने से तौबा कर ली।

कहानी-2 मेरा नाम अमन है और मैं मुम्‍बई का रहने वाला हूं और जो कहानी मैं आपकों बताने जा रहा हूं। ये बिल्‍कुल सच्‍ची है। ये लगभग 20 साल पहले की बात है। मेरे पापा के एक चचरे भाई है, जिनका नाम मनोज है। मनोज उस समय जवान थे और रात-रात भर अपने दोस्‍तो के साथ मस्‍ती किया करते थें। एक रात करीब 2 बजे के बाद अपने दोस्‍तों से विदा लेने के बाद वो वो अपनी बिल्‍ड़िंग के पास एक बरगद के पास बैठकर सिगरेट पीने लगें। तभी एक औरत बुरखा जिसने बुरखा पहना हुआ था उसने अपने हाथ में एक बच्‍चा लिया हुआ था, मनोज से आकर से बोली- भईया मुझे बाथरूम जाना है क्‍या आप मेरे बच्‍चे को संभाल लेंगे? मनोज ने शराब भी पी हुई थी और वो नशे में भी था। इसलिए उन्‍हें उस समय ज्‍यादा कुछ नहीं सूझा। नशे में ना होते थे तो शायद इतनी रात बच्‍चे के साथ किसी औरत को देखकर जरूर सोचते की ये यहां क्‍या कर रही है। उन्‍होंने बच्‍चे को ले लिया और वो औरत पास ही के एक पब्‍लिक टॉयलेट में चली गई। बहुत देर हो गई लेकिन, वो औरत वापस नहीं नहीं आई। और साथ ही मनोज को महसूस हुआ कि वो बच्‍चा जिसकों मनोज ने गोद में लिया हुआ था, वो भी साईज में थोड़ा बड़ा हो चुका है। और उसका वजन भी बढ़ गया है। मनोज को लगा शायद नशें की वजह से उसको ऐसा वहम हो रहा है। लेकिन, धीर-धीर बच्‍चें का वजन ओर बढ़ता गया। और अचानक मनोज का माथा ठनका। उसने सोचा की उस औरत को गए काफी वक्‍त हो चुका है। और साथ ही ये बच्‍चा भी कुछ अजीब है। उन दिनों शहर में काफी ज्‍यादा क्राईम था और गुंड़ा गर्दी रहती थी। इसलिए एक औरत का इतनी रात में निकलना और भी ज्‍यादा खतरनाक था। मनोज उठा और उस टॉयलेट की और चल दिया, जिस टॉयलेट में वो औरत गई थी। और उसके बाहर जाकर उस औरत को आवाजे लगाने लगा। तभी उसने देखा की उसके गोद में जो बच्‍चा है, ज्‍यादा ही भारी हो गया है और उसके पैर भी कुछ ज्‍यादी ही लंबे हो गए है, इतने लंबे की वो नींचे जमीन को छू रहे थें। वो समझ गया की ये औरत और वो बच्‍चा जरूर कोई छलावा है और उन्‍हें अपने दादा जी की बात याद आ गई की अगर कोई छलावा हम पर चढ़ जाए या हमने उसे पकड़ा हो तो उसे जोर से जमीन पर पटक देना चाहिए और भाग जाना चाहिए मनोज ने ठीक वैसा ही किया। हाथ में पकड़े उस चीज को जोर से जमीन पर पटका और तेजी से बिल्‍ड़िंग की तरफ भागने लगा लेकिन, तभी उसकी नजर उसके बाई तरफ गई उसने देखा की वहीं बुरखे वाली औरत बिल्‍ड़िंग के सामने खड़ी है। ठीक उनके बिल्‍ड़िंग जितनी ही लंबी हो चुकी है। वो बिल्‍डिंग कुछ 15 मीटर ऊंची थी और वो औरत भी उतनी ही लंबी हो चुकी थी। ये देखकर मनोज के तो होश ही उड़ गए और वो बिना कुछ सोचे-समझे पीछे की तरफ भागने लगा जिस तरफ हमारा घर था। वो भागते हमारे घर पहुंचा। उस समय तक मैं पैदा भी नहीं हुआ था। घर पर सभी ने उनसे पूछा कि क्‍या हुआ है? इतना ड़रे क्‍यों हुए हो? मनोज ने सबकुछ बता दिया और इसके बाद मनोज को 3 हफ्तों का बहुत तेज बुखार आया और वो बिस्‍तर पर ही पड़े रहे। उस रात के बाद मनोज ने सिगरेट, शराब और आवारागर्दी जैसी सारी बुरी आदते छोड़ दी।hindi horror stories,

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